नई दिल्ली,20 जुलाई (युआईटीवी)- भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के नियामक दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने कॉलर पहचान सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी ट्रूकॉलर द्वारा 140 और 1600 नंबर श्रृंखला से आने वाली कॉल्स पर “फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड” का लेबल दिखाने पर आपत्ति जताई है। नियामक का कहना है कि इस प्रकार के टैग उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं और वैध व्यावसायिक तथा सरकारी कॉल्स के प्रति अनावश्यक संदेह उत्पन्न कर सकते हैं। ट्राई का मानना है कि जिन नंबरों को नियामकीय व्यवस्था के तहत विशेष उद्देश्य के लिए निर्धारित किया गया है,उन्हें इस प्रकार के लेबल के साथ दिखाना उचित नहीं है।
ट्राई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में कहा कि 140 और 1600 नंबर श्रृंखला को विशेष नियमों और दिशानिर्देशों के तहत अलग-अलग उद्देश्यों के लिए निर्धारित किया गया है। ऐसे में यदि इन नंबरों पर “फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड” जैसा संदेश प्रदर्शित किया जाता है,तो उपयोगकर्ताओं के मन में यह धारणा बन सकती है कि इन नंबरों से आने वाली सभी कॉल संदिग्ध या अवांछित हैं। इससे उन सेवाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, जिन्हें नियामकीय व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है।
नियामक का कहना है कि इस प्रकार के लेबल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण बैंकिंग सूचना,सरकारी संदेश या वित्तीय लेनदेन से जुड़ी कॉल को केवल इस कारण नहीं उठाता कि उस पर “फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड” का टैग दिखाई दे रहा है, तो इससे उसे गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। ट्राई का मानना है कि कॉल की प्रकृति और उद्देश्य को समझे बिना इस तरह का सामान्य लेबल लगाना उपभोक्ता हितों के अनुरूप नहीं है।
इसी कारण ट्राई ने ट्रूकॉलर को सुझाव दिया है कि वह उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी उपलब्ध कराए कि यदि वे 140 नंबर श्रृंखला से आने वाले प्रचार संबंधी संदेश या कॉल प्राप्त नहीं करना चाहते हैं,तो इसके लिए ट्राई के आधिकारिक “डू नॉट डिस्टर्ब” यानी डीएनडी प्रेफरेंस मैनेजमेंट ऐप का उपयोग कर सकते हैं। नियामक के अनुसार,यह अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित व्यवस्था है,जिसके माध्यम से उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार प्रचार संबंधी संचार को नियंत्रित कर सकते हैं।
ट्राई का कहना है कि अलग-अलग नंबरों पर चेतावनी या लेबल लगाने की बजाय लोगों में डीएनडी प्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ाना अधिक प्रभावी समाधान होगा। इससे उपभोक्ता स्वयं यह तय कर सकेंगे कि वे किस प्रकार के व्यावसायिक संदेश प्राप्त करना चाहते हैं और किन्हें रोकना चाहते हैं। साथ ही,वैध और आवश्यक कॉल्स के प्रति अनावश्यक अविश्वास की स्थिति भी नहीं बनेगी।
नियामक ने विशेष रूप से 1600 नंबर श्रृंखला के महत्व पर भी जोर दिया है। ट्राई के अनुसार,यह नंबर श्रृंखला बैंकिंग,वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र की विनियमित संस्थाओं की सेवा एवं लेनदेन संबंधी कॉल्स के लिए निर्धारित की गई है। इस श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक,भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड,भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण तथा पेंशन फंड विनियामक एवं विकास प्राधिकरण जैसे नियामकों की निगरानी में कार्य करते हैं।
इन नंबरों का उपयोग केवल वित्तीय संस्थानों तक सीमित नहीं है। सरकार और नागरिकों के बीच होने वाले कई महत्वपूर्ण संवाद भी इसी श्रृंखला के माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में यदि इन नंबरों को इस प्रकार चिह्नित किया जाता है कि उपभोक्ता उन्हें उठाने से बचने लगें, तो इसका सीधा असर आवश्यक सेवाओं और सरकारी संचार पर पड़ सकता है।
ट्राई के वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में 1600 नंबर श्रृंखला को ऐसे टैग के साथ नहीं दिखाया जाना चाहिए,जिससे उपभोक्ताओं को लगे कि ये कॉल अविश्वसनीय या अनचाही हैं। उन्होंने कहा कि इन कॉल्स में बैंकिंग लेनदेन की पुष्टि,धोखाधड़ी से जुड़े अलर्ट,खाते की सुरक्षा संबंधी संदेश,बीमा सेवाओं की जानकारी तथा सरकारी सूचनाएँ जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हो सकती हैं। यदि उपभोक्ता इन कॉल्स को नजरअंदाज करने लगेंगे,तो इससे उनकी वित्तीय सुरक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं 140 नंबर श्रृंखला का उपयोग पंजीकृत कंपनियों द्वारा प्रचार संबंधी कॉल्स के लिए किया जाता है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि व्यावसायिक प्रचार कॉल्स और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़ी कॉल्स के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे। ट्राई का मानना है कि यदि उपभोक्ता प्रचार संबंधी कॉल्स नहीं चाहते हैं,तो उनके लिए पहले से ही डीएनडी जैसी व्यवस्था उपलब्ध है और उसी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर,ट्रूकॉलर ने इस पूरे मामले पर अपनी अलग चिंता व्यक्त की है। कंपनी का कहना है कि ट्राई द्वारा समर्पित नंबर श्रृंखला को अनिवार्य बनाए जाने और कॉलर पहचान ऐप्स को इन नंबरों के लिए समुदाय आधारित स्पैम जानकारी प्रदर्शित करने से रोकने के बाद स्पैम कॉल्स की समस्या बढ़ी है। कंपनी का दावा है कि कई उपयोगकर्ताओं ने इन नंबर श्रृंखलाओं से आने वाली सभी कॉल्स को संदेह की नजर से देखना शुरू कर दिया है।
ट्रूकॉलर के अनुसार,बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता अब इन नंबरों से आने वाली कॉल्स को सीधे अनदेखा कर देते हैं या उन्हें ब्लॉक कर देते हैं। कंपनी का कहना है कि इसका असर वास्तविक व्यावसायिक संचार पर भी पड़ रहा है,क्योंकि कई बार वैध कंपनियों और संस्थानों की महत्वपूर्ण कॉल्स भी उपयोगकर्ताओं तक नहीं पहुँच पा रही हैं। कंपनी का तर्क है कि समुदाय द्वारा साझा की गई जानकारी उपभोक्ताओं को संभावित स्पैम कॉल्स की पहचान करने में मदद करती है और इससे उन्हें बेहतर निर्णय लेने का अवसर मिलता है।
हालाँकि,ट्राई का मानना है कि किसी भी तकनीकी समाधान को इस प्रकार लागू नहीं किया जाना चाहिए,जिससे आधिकारिक और विनियमित संचार की विश्वसनीयता प्रभावित हो। नियामक का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए स्पैम कॉल्स पर नियंत्रण के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं से जुड़े संचार को भी सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना जरूरी है।
भारत में डिजिटल भुगतान,ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच सुरक्षित और विश्वसनीय दूरसंचार व्यवस्था की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में 140 और 1600 नंबर श्रृंखला का सही उपयोग तथा उपभोक्ताओं में इनके प्रति स्पष्ट जानकारी होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्राई और ट्रूकॉलर के बीच यह चर्चा इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ी है कि उपभोक्ताओं को स्पैम कॉल्स से सुरक्षा भी मिले और वे किसी महत्वपूर्ण बैंकिंग,वित्तीय या सरकारी कॉल को केवल किसी लेबल के कारण नजरअंदाज न करें। आने वाले समय में इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच संवाद और तकनीकी समाधान के माध्यम से संतुलित व्यवस्था विकसित होने की संभावना जताई जा रही है।
