वाशिंगटन,16 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका ने किसी भी तरह से युद्धविराम बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। उन्होंने उन रिपोर्टों को पूरी तरह गलत बताया,जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ईरान के साथ सीजफायर को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
कैरोलिन लीविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुबह कुछ ऐसी खबरें सामने आईं,जो भ्रामक थीं और वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका की ओर से युद्धविराम बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं किया गया है और इस तरह की खबरों पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल अपने सख्त रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इसी के साथ अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को और अधिक सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार,यह प्रतिबंध ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगा। खासतौर पर अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में इस नाकेबंदी का प्रभाव साफ देखा जा रहा है। यह कदम क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने और ईरान पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नाकेबंदी के तहत ईरान से जुड़े सभी समुद्री मार्गों की निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद,अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करते हुए उन जहाजों के लिए नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगा,जो ईरानी बंदरगाहों के अलावा अन्य स्थानों तक जा रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और आवाजाही पर अमेरिकी नजर बनी हुई है।
अमेरिकी नौसेना इस समय ओमान की खाड़ी में सक्रिय रूप से गश्त कर रही है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार,ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी को पूरी सख्ती से लागू किया जा रहा है। अमेरिकी सेनाएँ इस मिशन को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी तरह के उल्लंघन को रोकने के लिए तैयार हैं।
सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि नाकेबंदी लागू होने के शुरुआती 48 घंटों के दौरान कोई भी जहाज अमेरिकी निगरानी को पार नहीं कर सका। इसके अलावा,कम से कम नौ जहाजों को अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए वापस लौटना पड़ा। ये जहाज या तो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे थे या वहाँ से निकल रहे थे। इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अमेरिका इस प्रतिबंध को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
इसी बीच,अमेरिकी सैन्य उपस्थिति भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ाई गई है। यूएस सेंट्रल कमांड ने अरब सागर में संचालित हो रहे यूएसएस अब्राहम लिंकन का एक वीडियो साझा किया है,जिसमें विमान वाहक पोत पर चल रहे ऑपरेशनों की झलक दिखाई गई है। इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिक,नाविक और मरीन शामिल हैं,जो इस मिशन का हिस्सा हैं।
अमेरिका की इस कार्रवाई को ईरान के खिलाफ एक बड़े रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नाकेबंदी केवल आर्थिक या सैन्य कदम नहीं है,बल्कि यह एक व्यापक राजनीतिक संदेश भी है। इसके जरिए अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हालाँकि,इस सख्ती के बीच व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया है कि कूटनीतिक समाधान की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कैरोलिन लीविट ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका को किसी संभावित समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों को मानता है,तो यह उसके अपने हित में होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यहाँ किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना जताई जा रही है। जहाँ एक ओर अमेरिका अपनी सैन्य ताकत के जरिए दबाव बना रहा है,वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की संभावना भी बनी हुई है। अब यह देखना अहम होगा कि ईरान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।
