दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@tulsi_silawat)

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर भारत-दक्षिण कोरिया का जोर,राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने साझा सहयोग की वकालत की

नई दिल्ली,20 अप्रैल (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन की स्थिरता को लेकर भारत के साथ गहरे सहयोग की जरूरत पर बल दिया है। सोमवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट कहा कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया को मिलकर काम करना होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक,राष्ट्रपति ली ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक लिखित इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उनके अनुसार,इस संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग के बाधित होने का जोखिम बढ़ गया है,जिससे तेल की कीमतों में उछाल और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट देखने को मिल रही है।

राष्ट्रपति ली ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस जैसे संसाधनों की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकती है। उन्होंने इस संदर्भ में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल व्यापारिक मार्ग नहीं,बल्कि दोनों देशों के लिए जीवनरेखा के समान है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के लिए बहुपक्षीय प्रयासों में भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। राष्ट्रपति ली के मुताबिक,यह जरूरी है कि दोनों देश मिलकर ऐसे उपाय करें,जिससे समुद्री मार्ग सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित होते रहें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी भारत और दक्षिण कोरिया को एक साथ काम करना चाहिए,ताकि वैश्विक स्तर पर स्थिरता कायम रखी जा सके।

राष्ट्रपति ली ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित संवाद बनाए रखना जरूरी है,जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी जहाज बिना किसी बाधा के होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सकें। उन्होंने इस साझा प्रतिबद्धता को बनाए रखने के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।

ऊर्जा सुरक्षा के अलावा,राष्ट्रपति ली ने आवश्यक खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और भारत को पारंपरिक आयात मॉडल से आगे बढ़कर नए सहयोग के रास्ते तलाशने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि कोरिया की उन्नत तकनीक को भारत के खनन और रिफाइनिंग उद्योग के साथ जोड़कर एक स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित की जा सकती है। इससे दोनों देशों की आयात पर निर्भरता कम होगी और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए यह जरूरी है कि देश अपने संसाधनों के प्रबंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच इस तरह का सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत देगा।

आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी बात करते हुए राष्ट्रपति ली ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,रक्षा,शिपिंग और शिपबिल्डिंग जैसे सेक्टर में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में पहले से मौजूद सहयोग को और गहरा करने की जरूरत है।

राष्ट्रपति ली के अनुसार,भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक संबंधों में अपार संभावनाएँ हैं,जिन्हें सही दिशा में प्रयास करके और अधिक विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ाने से न केवल व्यापारिक अवसरों में वृद्धि होगी,बल्कि तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति ली का यह बयान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्ग की सुरक्षा पर जोर देना यह दर्शाता है कि एशियाई देश अब अपनी ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं।

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश इस दिशा में किस तरह के ठोस कदम उठाते हैं और अपनी साझेदारी को किस स्तर तक ले जाते हैं।