कोलकाता,4 मई (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य में राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुँच गई है। सोमवार को मतगणना शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही सियासी माहौल गरमा गया,जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया। उन्होंने आशंका जताई कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी की कोशिशें की जा सकती हैं और इसके खिलाफ पूरी रात चौकन्ना रहने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि कार्यकर्ता न सिर्फ जागते रहें,बल्कि हर गतिविधि पर कड़ी नजर भी रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से उन्हें ऐसी सूचनाएँ मिल रही हैं,जहाँ जानबूझकर बिजली काटी जा रही है। उनके अनुसार हुगली के श्रीरामपुर से लेकर नदिया के कृष्णानगर और बर्दवान के औसग्राम से लेकर कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र तक कई जगहों पर संदिग्ध गतिविधियाँ सामने आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है,जिससे सीसीटीवी कैमरे बंद हो जाएँ और निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ जाए।
ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वे स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास पूरी रात डटे रहें और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को तुरंत दर्ज कराएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कहीं भी किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई दे तो तुरंत शिकायत दर्ज कराई जाए और संबंधित सीसीटीवी फुटेज की माँग की जाए। मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का भी आरोप लगाया,जिससे राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
मतगणना की प्रक्रिया सोमवार सुबह डाक मतपत्रों की गिनती के साथ शुरू होगी,जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के मतों की गिनती की जाएगी। इस बार राज्य की 293 विधानसभा सीटों के लिए कुल 77 मतगणना केंद्र बनाए गए हैं,जहाँ सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं और पूरे राज्य में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है।
इस चुनाव में सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी दोनों ने ही मतों में हेरफेर की आशंका जताई है। दोनों दलों के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है और अब मतगणना से पहले इस तरह के आरोपों ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था,जो 29 अप्रैल को समाप्त हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार इस बार मतदान प्रतिशत 92.47 रहा,जो आजादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि राज्य के लोगों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गहरी रुचि और जागरूकता है।
हालाँकि,चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रही। दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में गंभीर चुनावी अनियमितताओं की शिकायत के बाद वहाँ का चुनाव रद्द कर दिया गया था। अब इस सीट पर 21 मई को पुनः मतदान कराया जाएगा। इस घटना ने भी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं,हालाँकि चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई जाएगी।
मतगणना से पहले रविवार शाम को ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए अपनी पार्टी के मतगणना एजेंटों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। इस बैठक में उन्होंने एजेंटों को जरूरी निर्देश दिए और हर स्तर पर सतर्कता बरतने को कहा। भवानीपुर सीट मुख्यमंत्री के लिए बेहद अहम मानी जा रही है,क्योंकि वह स्वयं इस सीट से उम्मीदवार हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव परिणाम बेहद दिलचस्प हो सकता है। एक ओर जहाँ तृणमूल कांग्रेस लगातार सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है,वहीं भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में मतगणना के नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले का माहौल बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बना हुआ है। मुख्यमंत्री के बयान ने जहां कार्यकर्ताओं को सतर्क कर दिया है,वहीं विपक्षी दलों के आरोपों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। अब सभी की नजरें सोमवार को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं,जो यह तय करेंगे कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और आगामी वर्षों में बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
