भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

सेबी ने बंद किया आईआरआरए प्लेटफॉर्म,तकनीकी मजबूती बढ़ने के बाद लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली,8 मई (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए इन्वेस्टर रिस्क रिडक्शन एक्सेस यानी आईआरआरए प्लेटफॉर्म को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। बाजार नियामक ने कहा कि भारतीय ट्रेडिंग इकोसिस्टम में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तकनीकी ढाँचे और सुरक्षा व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है,जिसके कारण अब इस प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं रह गई थी। सेबी के इस फैसले को भारतीय पूँजी बाजार के तकनीकी विकास और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेबी ने अपने आधिकारिक सर्कुलर में बताया कि स्टॉक एक्सचेंजों ने नियामक को सूचित किया था कि अक्टूबर 2023 में प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से किसी भी ब्रोकर ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। नियामक के अनुसार,यह इस बात का संकेत है कि बाजार की मौजूदा तकनीकी और परिचालन व्यवस्थाएँ इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि बैकअप प्लेटफॉर्म की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।

आईआरआरए प्लेटफॉर्म की शुरुआत दिसंबर 2022 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि किसी ब्रोकर के सिस्टम में तकनीकी खराबी आ जाए या उसका ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अस्थायी रूप से बंद हो जाए,तो निवेशकों को ट्रेडिंग जारी रखने के लिए एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा सके। यह व्यवस्था निवेशकों के जोखिम को कम करने और बाजार में निर्बाध कारोबार बनाए रखने के लिए तैयार की गई थी।

हालाँकि,पिछले कुछ समय में भारतीय शेयर बाजार के तकनीकी ढाँचे में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। सेबी ने कहा कि तकनीकी अपग्रेड,सख्त नियामकीय उपायों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की उपलब्धता ने सिस्टम की निरंतरता को काफी मजबूत बना दिया है। यही वजह है कि आईआरआरए जैसे बैकअप प्लेटफॉर्म की उपयोगिता लगातार कम होती गई।

नियामक ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टॉक एक्सचेंजों ने सामूहिक रूप से इस प्लेटफॉर्म की समीक्षा की थी। उपयोगिता का आकलन करने के बाद सभी एक्सचेंजों ने सर्वसम्मति से इसकी सेवाएँ बंद करने की सिफारिश की। इसके बाद सेबी ने यह निर्णय लिया कि अब इस प्लेटफॉर्म को जारी रखने की जरूरत नहीं है।

सेबी के अनुसार,वर्तमान समय में ब्रोकर्स अधिक उन्नत और सुरक्षित तकनीकी सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। इनमें मजबूत बिजनेस कंटिन्युटी और डिजास्टर रिकवरी मानक शामिल हैं। इसके अलावा साइबर सुरक्षा ढाँचे को भी काफी मजबूत किया गया है। नियामक ने कहा कि अब मार्केट सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर यानी एम-एसओसी जैसे आधुनिक सुरक्षा तंत्र लागू किए जा चुके हैं,जिससे बाजार की डिजिटल सुरक्षा और अधिक मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पूँजी बाजार ने तकनीकी स्तर पर बड़ी छलांग लगाई है। ट्रेडिंग सिस्टम अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज,सुरक्षित और स्थिर हो गए हैं। अगर किसी कारणवश मुख्य सर्वर या प्राइमरी साइट में समस्या आती भी है,तो सिस्टम को तुरंत वैकल्पिक साइट पर शिफ्ट किया जा सकता है। इससे ट्रेडिंग गतिविधियों में रुकावट की संभावना काफी कम हो गई है।

सेबी ने अपने बयान में यह भी कहा कि अब कई ब्रोकर्स ने स्वतंत्र ‘कोल्ड साइट्स’ विकसित कर ली हैं। ये ऐसी वैकल्पिक तकनीकी साइट्स होती हैं,जिन्हें आपातकालीन स्थिति में तुरंत सक्रिय किया जा सकता है। इससे तकनीकी गड़बड़ी या साइबर हमले जैसी परिस्थितियों में भी सेवाएँ लगातार जारी रखी जा सकती हैं। नियामक का मानना है कि इस तरह की आधुनिक व्यवस्थाओं ने आईआरआरए प्लेटफॉर्म की आवश्यकता को लगभग समाप्त कर दिया है।

हालाँकि,प्लेटफॉर्म को बंद करने के बावजूद सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया है। नियामक ने कहा कि एक्सचेंजों को कंटिजेंसी पूल ट्रेडिंग सुविधा की समीक्षा करनी चाहिए और उसे और अधिक मजबूत बनाना चाहिए। यह सुविधा भविष्य में किसी तकनीकी व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में काम करती रहेगी। सेबी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में निवेशकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार,सेबी का यह फैसला भारतीय शेयर बाजार की परिपक्वता को दर्शाता है। एक समय था जब तकनीकी खराबियों के कारण ट्रेडिंग में रुकावटें आम बात थीं,लेकिन अब बाजार की तकनीकी क्षमताएँ काफी मजबूत हो चुकी हैं। यही वजह है कि नियामक अब उन व्यवस्थाओं को बंद कर रहा है,जिनकी वास्तविक उपयोगिता समाप्त हो चुकी है।

इस बीच,सेबी ने हाल ही में बाजार पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। नियामक ने महत्वपूर्ण सूचकांकों के इंडेक्स प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे छह महीने के भीतर सेबी के साथ पंजीकरण कराएँ। इस फैसले का उद्देश्य इंडेक्स संचालन और प्रशासन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

हालाँकि,जिन इंडेक्स प्रदाताओं के सूचकांकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा महत्वपूर्ण या अधिकृत बेंचमार्क घोषित किया गया है,उन्हें इस नियम से छूट दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वित्तीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।

सेबी लगातार भारतीय पूँजी बाजार को अधिक सुरक्षित,पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आईआरआरए प्लेटफॉर्म को बंद करने का फैसला भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। नियामक का मानना है कि आधुनिक तकनीकी संरचना और बेहतर सुरक्षा उपायों के साथ अब भारतीय बाजार किसी भी संभावित व्यवधान से निपटने में पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्षम हो चुका है।

फिलहाल बाजार सहभागियों ने सेबी के इस फैसले का स्वागत किया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अनावश्यक प्रणालियों को हटाकर संसाधनों को अधिक प्रभावी तकनीकी सुधारों की दिशा में लगाया जा सकेगा। आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार में और अधिक डिजिटल सुधार देखने को मिल सकते हैं,जिससे निवेशकों को बेहतर और सुरक्षित ट्रेडिंग अनुभव मिलेगा।