ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

होर्मुज स्ट्रेट में फिर बढ़ा तनाव,ईरान ने दी ‘बड़ी जीत’ की चेतावनी,ट्रंप बोले- सीजफायर अब भी लागू

तेहरान,8 मई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह पहले लागू हुआ संघर्षविराम अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास नई सैन्य गतिविधियों तथा हमलों की खबरों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ ने बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि ईरानी जनता जल्द ही अमेरिका और इजरायल के खिलाफ “बड़ी जीत” का जश्न मनाएगी। उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान की आक्रामक रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,मोहम्मद रजा आरेफ ने गुरुवार को देश की स्वास्थ्य सुविधाओं और औद्योगिक क्षेत्रों को हुए नुकसान का निरीक्षण करने के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने नेशनल पेट्रोकेमिकल कंपनी,इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स और खाद्य एवं औषधि प्रशासन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि युद्ध और प्रतिबंधों के बावजूद ईरान पुनर्निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश जल्द ही अपनी बड़ी जीत का जश्न मनाएगा।

आरेफ ने कहा, “हम बहुत जल्द अपनी जीत का जश्न मनाएँगे और देश पर वर्षों से लगाए गए प्रतिबंध तथा दबाव समाप्त हो जाएँगे।” उन्होंने दावा किया कि ईरानी जनता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद धैर्य और एकता बनाए रखी है,जिसकी वजह से देश अपने विरोधियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। उनके बयान को घरेलू समर्थन मजबूत करने और जनता का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरानी उपराष्ट्रपति का बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह समुद्री मार्ग ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है और इसके प्रबंधन को लेकर तेहरान पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आरेफ ने कहा कि ईरान के नियंत्रण में यह जलमार्ग सुरक्षित रहेगा और इससे पूरे क्षेत्र को आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस क्षेत्र में दबदबा स्थापित नहीं करना चाहता,बल्कि क्षेत्रीय सहयोग के जरिए इसे आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहाँ बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हाल के दिनों में यहां सैन्य गतिविधियों और हमलों की खबरों के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी अस्थिरता देखी गई है।

दूसरी ओर अमेरिका की ओर से भी लगातार बयानबाजी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि नई झड़पों के बावजूद ईरान के साथ संघर्षविराम अभी भी लागू है। लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल के पास मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, “अगर सीजफायर नहीं होता,तो आपको इसका तुरंत पता चल जाता। आपको बस ईरान से उठती हुई एक बड़ी चमक दिखाई देती।”

ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब भी सैन्य रूप से पूरी तरह तैयार है और यदि संघर्षविराम टूटता है,तो जवाब बेहद कठोर हो सकता है। हालाँकि,इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन अभी कूटनीतिक समाधान की संभावना को खत्म नहीं मानता।

इसी दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से दिया गया प्रस्ताव केवल “एक पन्ने का ऑफर” नहीं है,बल्कि यह कहीं अधिक व्यापक और गंभीर समझौते का हिस्सा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब खबरें हैं कि तेहरान पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन से मिले संदेश की समीक्षा कर रहा है।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान ने उस कथित प्रस्ताव का जवाब दिया है,तो उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक पन्ने का प्रस्ताव नहीं है। यह ऐसा प्रस्ताव है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। वे हमें न्यूक्लियर डस्ट और कई अन्य चीजें देंगे,जो हम चाहते हैं।”

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि परमाणु कार्यक्रम अब भी अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। वाशिंगटन लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की माँग करता रहा है,जबकि तेहरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा संघर्षविराम बेहद नाजुक स्थिति में है। एक ओर सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं,तो दूसरी ओर बातचीत और समझौते की संभावनाएँ भी खुली हुई हैं। यही वजह है कि मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर दुनिया भर की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिकी हुई हैं।

इजरायल की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान लगातार इजरायल पर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाता रहा है,जबकि इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। ऐसे में यदि तनाव और बढ़ता है,तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व में व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।

फिलहाल,होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और दोनों देशों के आक्रामक बयानों ने यह संकेत दे दिया है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद युद्ध का खतरा पूरी तरह टला नहीं माना जा रहा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका और ईरान बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।