दिल्ली में आज से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (तस्वीर क्रेडिट@ibne_zaidi)

दिल्ली में आज से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,भारत की अध्यक्षता में वैश्विक सहयोग और विकास पर मंथन

नई दिल्ली,12 सितंबर (युआईटीवी)- भारत शनिवार से राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों और साझेदार देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे। इसके अलावा आउटरीच के तहत आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भी सम्मेलन में भागीदारी होगी। भारत की मेजबानी में हो रहे इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ आर्थिक विकास,सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार,भारत ने इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए ‘लचीलेपन, नवाचार,सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ को मुख्य थीम बनाया है। इस थीम के तहत भारत का जोर ऐसे सहयोग को बढ़ावा देने पर रहा है,जिससे बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स देश साझा चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकें। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के नेता आपसी हित से जुड़े वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। साथ ही ब्रिक्स के भीतर साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी।

भारत की अध्यक्षता के दौरान इस वर्ष देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को तीन प्रमुख स्तंभों के आधार पर मजबूत करना रहा। इनमें राजनीतिक और सुरक्षा,आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न बैठकों के साथ बिजनेस-टू-बिजनेस और लोगों के बीच सहयोग से जुड़ी पहलों को भी आगे बढ़ाया गया। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स सहयोग को व्यावहारिक और विकासोन्मुख परिणामों की दिशा में ले जाने पर विशेष जोर दिया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार समूह की अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता सँभाली। इस लिहाज से वर्तमान अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2026 ब्रिक्स के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि इस समूह के गठन को दो दशक पूरे हो रहे हैं। ऐसे में 18वां शिखर सम्मेलन संगठन की अब तक की यात्रा,उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।

भारत की अध्यक्षता के लिए तैयार किए गए ब्रिक्स लोगो में भी देश की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक दृष्टिकोण का मेल देखने को मिलता है। लोगो की पंखुड़ियों में सदस्य देशों के जीवंत रंगों को शामिल किया गया है,जो समूह की सामूहिक शक्ति और एकता को दर्शाते हैं। इसके केंद्र में ‘नमस्ते’ की मुद्रा भारत की गर्मजोशी,सम्मान और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की भावना का प्रतीक है। भारत ने लोगो के जरिए ब्रिक्स की विविधता के बीच एकता और सहयोग के संदेश को प्रमुखता दी है।

वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील,चीन,मिस्र, इथियोपिया,भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स के साझेदार देशों में शामिल हैं। समूह के विस्तार के साथ इसकी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक भूमिका भी लगातार बढ़ी है।

ब्रिक्स के एजेंडे में अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित मुद्दे नहीं हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम और रोजगार जैसे विषय भी इसके सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार, व्यापार और विश्व व्यापार संगठन से जुड़े मुद्दों पर भी सदस्य देश लगातार विचार-विमर्श करते रहे हैं।

नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है,जब वैश्विक व्यवस्था कई स्तरों पर बदलाव के दौर से गुजर रही है। व्यापार,ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति शृंखला और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दे दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में ब्रिक्स के मंच से विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद की जा रही है।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन समूह की भविष्य की प्राथमिकताओं को तय करने के साथ-साथ सदस्य और साझेदार देशों के बीच आपसी संवाद को मजबूत करने का अवसर भी देगा। दो दिनों तक चलने वाली बैठकों में होने वाली चर्चाओं और संभावित फैसलों पर दुनिया की नजर रहेगी। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी अध्यक्षता के दौरान किए गए प्रयासों को वैश्विक मंच पर सामने रखने और ब्रिक्स को अधिक प्रभावी, समावेशी तथा विकास केंद्रित सहयोग के मंच के रूप में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।