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भारत से अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश,नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास दुनिया में सबसे आगे: सर्जियो गोर

वाशिंगटन,30 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयों को छू रही है। इसी कड़ी में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने वर्ष 2026 के दौरान अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर के नए निवेश आकर्षित करने में सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ भारत में अमेरिकी मिशन निवेश आकर्षित करने के मामले में दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों में पहले स्थान पर पहुँच गया है। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों,निवेशकों के बढ़ते विश्वास और कारोबारी सहयोग के विस्तार का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय सफलता नहीं है,बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और भरोसेमंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी दूतावासों के बीच निवेश आकर्षित करने को लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रहती है। ऐसे माहौल में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास का शीर्ष स्थान हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश अमेरिका तक पहुँचाया है और इस मामले में उसने अन्य सभी अमेरिकी मिशनों को पीछे छोड़ दिया है। सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे अमेरिकी मिशन के लिए गर्व का विषय है और इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत के साथ आर्थिक संबंधों को अमेरिका किस स्तर पर महत्व दे रहा है।

राजदूत ने कहा कि भारत आज वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद और तेजी से विकसित होता निवेश गंतव्य बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक सुधारों, डिजिटल बदलाव,बुनियादी ढाँचे के विकास और व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि अब अमेरिकी कंपनियाँ भारत के साथ काम करने और यहां निवेश करने को लेकर पहले से कहीं अधिक आश्वस्त दिखाई देती हैं।

सर्जियो गोर ने बताया कि अक्सर अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश करने से पहले कई महत्वपूर्ण सवाल पूछती हैं। वे जानना चाहती हैं कि क्या भारत में निवेश करना सुरक्षित है, क्या उनकी बौद्धिक संपदा सुरक्षित रहेगी,क्या यहाँ की नीतियाँ स्थिर हैं,क्या कर व्यवस्था पारदर्शी और भरोसेमंद है तथा क्या कारोबारी माहौल दीर्घकालिक निवेश के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इन सभी सवालों का सकारात्मक उत्तर देने में गर्व महसूस होता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर भरोसा करता है और दोनों देश मिलकर दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत बना रहे हैं। उनके अनुसार,निवेशकों का विश्वास किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी पूँजी होता है और भारत ने पिछले वर्षों में यह विश्वास अर्जित किया है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच निवेश,व्यापार और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

सर्जियो गोर ने अपने भारत में अब तक के कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि पिछले छह महीनों में उन्होंने देश में कई सकारात्मक परिवर्तन देखे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में आर्थिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं और उद्योग जगत में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दूतावास अब केवल राजनयिक कार्यक्रमों और औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता,बल्कि उसका उद्देश्य वास्तविक आर्थिक परिणाम हासिल करना है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह भारत केवल औपचारिक स्वागत समारोहों में शामिल होने के लिए नहीं आए हैं। उनका मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार,निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली भी परिणाम आधारित है और अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि विदेश नीति का लाभ सीधे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई दे।

राजदूत ने कहा कि अमेरिकी दूतावास हमेशा निवेशकों,उद्योगपतियों और कारोबारी समुदाय के लिए खुला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि यदि किसी निवेश परियोजना या व्यावसायिक योजना के दौरान सरकारी प्रक्रियाओं,नियमों या अन्य प्रशासनिक कारणों से कोई कठिनाई आती है,तो वे सीधे अमेरिकी दूतावास से संपर्क करें।

उन्होंने कहा कि कई बार अच्छी परियोजनाएँ केवल प्रक्रियागत कारणों से आगे नहीं बढ़ पातीं। यदि अमेरिकी दूतावास उचित स्तर पर संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुँचाकर समाधान निकालने में सहायता कर सकता है,तो वह हर संभव सहयोग करेगा। उनके अनुसार,दूतावास का उद्देश्य केवल राजनयिक संबंध बनाए रखना नहीं,बल्कि व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में सक्रिय भागीदार बनना भी है।

सर्जियो गोर ने कहा कि निवेशकों को यह भरोसा होना चाहिए कि अमेरिकी दूतावास उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि कारोबारी समुदाय के लिए दूतावास के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे और किसी भी समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक कूटनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन विदेश नीति को केवल राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से नहीं देखता,बल्कि आर्थिक अवसरों और व्यापारिक सहयोग को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानता है। उनके अनुसार,आज की वैश्विक दुनिया में आर्थिक कूटनीति किसी भी देश की विदेश नीति का एक प्रमुख आधार बन चुकी है।

सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं भी अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में नए अवसर दिलाने और निवेश को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप का मानना है कि कोई भी निवेश छोटा नहीं होता। यदि किसी निवेश से अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है,तो राष्ट्रपति स्वयं भी उस कंपनी के समर्थन में आगे आने के लिए तैयार रहते हैं।

उन्होंने कहा कि यह कार्यशैली पहले की सरकारों से अलग है,क्योंकि वर्तमान प्रशासन का ध्यान सीधे परिणामों पर है। उनके अनुसार,आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को विदेश नीति से जोड़ने की यह रणनीति अमेरिका के लिए भी लाभकारी है और उसके साझेदार देशों के लिए भी।

राजदूत ने कहा कि आने वाले वर्षों में अमेरिका भारत के साथ कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने विशेष रूप से तकनीक,रक्षा,विमानन, विनिर्माण,ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया। उनके अनुसार,इन क्षेत्रों में दोनों देशों के पास अपार संभावनाएँ हैं और यदि मिलकर काम किया जाए,तो वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर,उन्नत विनिर्माण,डिजिटल तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमेरिका इन क्षेत्रों में भारत का विश्वसनीय साझेदार बनना चाहता है। इसी प्रकार रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और संयुक्त अनुसंधान,उत्पादन तथा तकनीकी साझेदारी की नई संभावनाएँ सामने आ रही हैं।

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्य,लोगों के बीच मजबूत संपर्क,शिक्षा,विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्र हैं,जहाँ सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लाखों लोग अमेरिका की अर्थव्यवस्था,तकनीक और शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं,जबकि अनेक अमेरिकी कंपनियाँ भारत में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन कर रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता भरोसे,साझा अवसरों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित है। यही कारण है कि समय के साथ दोनों देशों की साझेदारी और अधिक व्यापक होती जा रही है। उनके अनुसार,रक्षा और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ अब व्यावसायिक कूटनीति भी इस संबंध का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता निवेश सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव,नई तकनीकों का विकास, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार और डिजिटल अर्थव्यवस्था का बढ़ता महत्व भारत को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहा है। वहीं अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार होने के साथ-साथ विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार भी है।

नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास द्वारा 20.5 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने की उपलब्धि इसी बदलते आर्थिक परिदृश्य का संकेत मानी जा रही है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच केवल राजनीतिक और रणनीतिक संबंध ही नहीं,बल्कि आर्थिक सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है।

सर्जियो गोर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच निवेश,व्यापार और औद्योगिक सहयोग को और गति देने की तैयारी है। अमेरिकी प्रशासन आर्थिक कूटनीति को अपनी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए भारतीय कंपनियों और निवेशकों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देना चाहता है। यदि दोनों देशों के बीच इसी प्रकार विश्वास और सहयोग का वातावरण बना रहता है,तो आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत द्विपक्षीय साझेदारियों में शामिल हो सकते हैं।