वाशिंगटन,30 जून (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर सहमत हो गया है। दोहा में होने वाली नई वार्ता से ठीक पहले दिए गए इस बयान में ट्रंप ने भरोसा जताया कि अमेरिका सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति में है तथा उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति स्पष्ट है और वह किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। हालाँकि, ट्रंप ने अपने दावे के समर्थन में किसी औपचारिक समझौते या लिखित सहमति का विवरण साझा नहीं किया और न ही यह स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच किन शर्तों पर सहमति बनी है।
ओवल ऑफिस में एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी पहले ही कतर के लिए रवाना हो चुके हैं। वहाँ दोहा में मंगलवार को ईरान से जुड़े महत्वपूर्ण वार्ता दौर का आयोजन होना है। ट्रंप ने कहा कि यह बैठक भविष्य की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है,हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह देखना बाकी है कि बातचीत से कितना ठोस परिणाम निकलता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि दोहा में होने वाली बैठक महत्वपूर्ण हो सकती है और यह भी संभव है कि उसकी आवश्यकता उतनी अधिक न रहे। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति बातचीत के दौरान ही स्पष्ट होगी। ट्रंप के अनुसार,अमेरिका इस वार्ता को लेकर आशावादी है, लेकिन वह परिणामों को लेकर किसी प्रकार की जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहता।
अपने बयान में ट्रंप ने हाल के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका को रणनीतिक बढ़त मिली है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य दृष्टि से अमेरिका अपने उद्देश्य हासिल करने में सफल रहा है और वर्तमान परिस्थितियाँ वॉशिंगटन के पक्ष में हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि सैन्य स्थिति का आकलन किया जाए,तो अमेरिका लगभग अपनी जीत सुनिश्चित कर चुका है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य किसी जटिल राजनीतिक एजेंडे को लागू करना नहीं है,बल्कि उसका उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट और सीमित है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन केवल ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है। ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों और उनका मानना है कि ईरान भी इस बात पर पूरी ईमानदारी के साथ सहमत हो गया है।
हालाँकि,ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान की ओर से यह सहमति किस स्तर पर दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि क्या दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक दस्तावेज पर सहमति बनी है या यह केवल वार्ता के दौरान व्यक्त की गई राजनीतिक इच्छा है। इसके अलावा उन्होंने दोहा में होने वाली बैठक के एजेंडे के बारे में भी कोई जानकारी साझा नहीं की। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वार्ता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी या क्षेत्रीय सुरक्षा,प्रतिबंधों और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोहा में होने वाली यह वार्ता ऐसे समय हो रही है,जब मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। हाल के महीनों में क्षेत्र में बढ़े तनाव और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा समझ तक पहुँचते हैं,तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।
ट्रंप ने अपनी बातचीत के दौरान वैश्विक तेल बाजार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है और इसे उन्होंने ईरान से जुड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा। राष्ट्रपति के अनुसार,तेल की कीमतें अब लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं और यह पहले की तुलना में कम स्तर है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बनी सकारात्मक स्थिति का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
हालाँकि,ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें कई वैश्विक कारकों से प्रभावित होती हैं,जिनमें उत्पादन,माँग,भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ और आर्थिक गतिविधियाँ शामिल हैं। ऐसे में केवल किसी एक घटनाक्रम को कीमतों में बदलाव का कारण मानना आसान नहीं होता। फिर भी ट्रंप ने अपने बयान में इस गिरावट को अमेरिका की रणनीति और ईरान के साथ चल रही प्रक्रिया का सकारात्मक परिणाम बताया।
ओवल ऑफिस में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एक नए प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करना था। इस मेमोरेंडम के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण एजेंसी को निर्देश दिया है कि वह ऐसे कदम उठाए,जिनसे अमेरिकी उपभोक्ताओं को अपनी गाड़ियों की मरम्मत स्वयं करने में अधिक सुविधा मिल सके। प्रशासन का मानना है कि इससे वाहन मरम्मत के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।
मेमोरेंडम के तहत आफ्टरमार्केट ऑटोमोबाइल पार्ट्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की भी योजना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे वाहन मालिकों को मरम्मत के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और वे केवल अधिकृत सेवा केंद्रों पर निर्भर नहीं रहेंगे। इस पहल का उद्देश्य मरम्मत की लागत कम करना और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना भी है।
पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के प्रशासक ली जेल्डिन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम “राइट टू रिपेयर” यानी उपभोक्ताओं के अपनी वस्तुओं की स्वयं मरम्मत करने के अधिकार को मजबूत करेगा। उनके अनुसार,यह नीति अमेरिकियों को अपनी गाड़ियों की मरम्मत करने से रोकने वाली बाधाओं को कम करेगी और आफ्टरमार्केट पार्ट्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे तीसरे पक्ष द्वारा किए जाने वाले प्रमाणन की प्रक्रिया में अधिक संतुलन आएगा और कैलिफोर्निया की कथित एकाधिकार जैसी स्थिति समाप्त करने की दिशा में भी प्रगति होगी।
हालाँकि,इस कार्यक्रम का प्रमुख विषय वाहन मरम्मत से जुड़ा प्रशासनिक निर्णय था, लेकिन पत्रकारों के सवालों के जवाब में ट्रंप ने सबसे अधिक समय ईरान और दोहा में होने वाली वार्ता पर ही दिया। उनके बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किए हुए है।
अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें दोहा में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप के दावों के अनुरूप दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या नहीं। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है,तो इससे लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद के समाधान की दिशा में नई संभावना पैदा हो सकती है। वहीं यदि मतभेद बने रहते हैं,तो क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है।
फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखते हुए भी अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं से कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान का परमाणु निरस्त्रीकरण ही अमेरिका का मुख्य उद्देश्य है और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दोहा में होने वाली वार्ता को आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले दिनों में इस बातचीत के नतीजे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों,बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।
