ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (तस्वीर क्रेडिट@ScriptCritical)

72वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार: ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार,सम्मान में गूँजा स्टैंडिंग ओवेशन

मुंबई,23 सितंबर (युआईटीवी)- मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया। मंगलवार को गुजरात के केवडिया में आयोजित आधिकारिक पुरस्कार समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। जैसे ही ममूटी पुरस्कार लेने के लिए मंच पर पहुँचे,दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका सम्मान किया। लंबे समय से भारतीय सिनेमा में अपने अभिनय का प्रभाव छोड़ने वाले अभिनेता के लिए यह पल बेहद खास रहा।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ममूटी को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान दिया गया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद समारोह स्थल पर मौजूद लोगों ने उनके सम्मान में स्टैंडिंग ओवेशन दिया। दर्शकों की इस प्रतिक्रिया ने उनके लंबे फिल्मी सफर और भारतीय सिनेमा में योगदान के प्रति सम्मान को भी प्रदर्शित किया।

ममूटी को यह राष्ट्रीय सम्मान राहुल सदाशिवन के निर्देशन में बनी पीरियड हॉरर फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके अभिनय के लिए मिला है। फिल्म में ममूटी के साथ अर्जुन अशोकन और सिद्धार्थ भरतन भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। कहानी 17वीं सदी के केरल की पृष्ठभूमि में बुनी गई है और इसमें लोककथाओं, रहस्य, भय और सामाजिक संरचना को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

‘ब्रह्मयुगम’ की कहानी थेवन नाम के एक युवा लोक गायक के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के चलते वह एक सुनसान हवेली में शरण लेने पहुँचता है,लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद खुद को एक ऐसी रहस्यमयी दुनिया में फँसा पाता है, जहाँ सामान्य और असामान्य के बीच की सीमा धीरे-धीरे धुँधली होती जाती है। फिल्म में हवेली, उसके रहस्यमयी वातावरण और वहाँ मौजूद पात्रों के माध्यम से भय और असुरक्षा का माहौल तैयार किया गया है।

फिल्म की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसका ब्लैक एंड व्हाइट में फिल्माया जाना है। निर्माताओं ने दृश्य शैली के जरिए कहानी के रहस्य और भय को और गहरा करने का प्रयास किया है। फिल्म में केरल की लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं को आधार बनाते हुए सत्ता, जाति और शोषण जैसे सामाजिक विषयों को भी कहानी में शामिल किया गया है। इस तरह फिल्म केवल एक हॉरर कहानी तक सीमित नहीं रहती,बल्कि अपने समय और समाज की जटिलताओं को भी सामने लाती है।

ममूटी ने अपने लंबे करियर में विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं और मलयालम सिनेमा के साथ-साथ भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका फिल्मी सफर करीब 45 वर्षों से जारी है। उन्होंने ‘अनुभवंगल पालिचाकल’ से पर्दे पर कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग भूमिकाओं में अपने अभिनय का प्रदर्शन किया और 1980 के दशक में प्रमुख अभिनेताओं में अपनी जगह स्थापित कर ली।

ममूटी की खासियत यह रही है कि उन्होंने अपने करियर में केवल व्यावसायिक फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने गंभीर सामाजिक विषयों, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारिवारिक कहानियों और प्रयोगात्मक सिनेमा में भी काम किया। यही वजह है कि उनके फिल्मी सफर में अलग-अलग दौर और शैलियों की कई महत्वपूर्ण फिल्में शामिल हैं।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ममूटी के लिए भी विशेष महत्व रखता है। वह इससे पहले भी इस श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। उनके नाम सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सात केरल राज्य फिल्म पुरस्कार और 13 फिल्मफेयर पुरस्कार दक्षिण दर्ज हैं। उन्होंने मलयालम के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया है।

ममूटी को वर्ष 2026 में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से भी सम्मानित किया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म भूषण जैसे सम्मान उनके लंबे और बहुआयामी फिल्मी सफर में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में देखे जाते हैं।

इस बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ममूटी ने अभिनेता कार्तिक आर्यन के साथ साझा किया। कार्तिक आर्यन को खेल आधारित जीवनी फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके अभिनय के लिए इसी श्रेणी में सम्मानित किया गया। दोनों अभिनेताओं के अलग-अलग सिनेमाई पृष्ठभूमि और भूमिकाओं के बावजूद एक ही श्रेणी में सम्मानित होना इस पुरस्कार समारोह की खास बात रही।

केवडिया में आयोजित समारोह में ममूटी को मिला सम्मान उनके प्रशंसकों और मलयालम सिनेमा के लिए भी गौरव का क्षण रहा। ‘ब्रह्मयुगम’ जैसी प्रयोगात्मक और अलग विषय वाली फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ उनके लंबे फिल्मी करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। मंच पर पुरस्कार ग्रहण करते समय मिला स्टैंडिंग ओवेशन इस बात की झलक रहा कि भारतीय सिनेमा में ममूटी की यात्रा ने कई पीढ़ियों के दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।