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ब्रिटेन की नई लेबर सरकार के सामने आर्थिक चुनौतियाँ

लंदन,8 जुलाई (युआईटीवी)- लेबर सरकार के हालिया चुनाव ने ब्रिटेन के पूँजी बाजार में तेजी ला दी है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, नई सरकार के पहले दिन,घरेलू स्तर पर केंद्रित एफटीएसई 250 सूचकांक में 0.86 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और देश के 10-वर्षीय बांड पर उपज 0.8 प्रतिशत अंक गिर गई।

इस वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई,जबकि मई में वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई,जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों को समर्थन मिला।

लेबर सरकार ने अपेक्षाकृत मजबूत अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लिया है,लेकिन उसे आर्थिक जड़ता को दूर करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उत्पादकता महामारी-पूर्व स्तर से नीचे बनी हुई है और निवेश दरें अन्य विकसित देशों की तुलना में कम हैं। नई सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना एक महत्वपूर्ण कार्य होगा।

निवेश उल्लेखनीय रूप से कम रहा है,इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी के आँकड़ों से संकेत मिलता है कि ब्रिटेन की कुल निवेश दर 1980 के दशक के अंत में सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 23 प्रतिशत से गिरकर 2000 के बाद से लगभग 17 प्रतिशत हो गई है। इसकी तुलना में,अन्य G7 देशों में निवेश दरें अधिकतर 20 से 25 प्रतिशत के बीच रही हैं।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (एलएसई) में अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर टिम बेस्ली ने इस बात पर जोर दिया कि नई लेबर सरकार को निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए। बेस्ले ने कहा, “जब आप आर्थिक दिग्गजों या उद्यमियों से बात करते हैं,तो वे आपको बताएँगे कि यूके की अर्थव्यवस्था की रणनीतिक दिशा और आर्थिक लक्ष्य प्रदान करने वाले संस्थागत ढाँचे को देखना बहुत कठिन है।”

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