नई दिल्ली, 24 मई (युआईटीवी)- बॉलीवुड से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी और कई हिट फिल्मों में यादगार अभिनय कर चुके अभिनेता मुकुल देव का निधन हो गया है। 54 वर्ष की उम्र में उन्होंने शुक्रवार रात अंतिम सांस ली। इस खबर ने ना केवल फिल्म इंडस्ट्री को झकझोर दिया है,बल्कि उनके प्रशंसकों को भी गहरा सदमा पहुँचाया है। मुकुल देव की पहचान एक ऐसे कलाकार के रूप में थी,जो हर किरदार में खुद को ढाल लेने की क्षमता रखते थे,चाहे वह एक पुलिस अधिकारी हो,विलेन हो या कॉमिक रोल।
मुकुल देव के निधन की पुष्टि होते ही सोशल मीडिया पर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के सितारे उन्हें श्रद्धांजलि देने लगे। अभिनेता विंदू दारा सिंह ने इंडिया टुडे से बातचीत में उनके निधन की खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि मुकुल कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। विंदू ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर मुकुल के साथ एक पुराना वीडियो शेयर कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
एक्ट्रेस और उनकी करीबी दोस्त दीपशिखा नागपाल ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक थ्रोबैक फोटो साझा करते हुए सिर्फ एक शब्द लिखा – “आरआईपी”। यह संक्षिप्त संदेश भी गहरे दुख को व्यक्त करने के लिए काफी था।
Rest in peace my brother #MukulDev ! The time spent with you will always be cherished and #SonOfSardaar2 will be your swansong where you will spread joy and happiness to the viewers and make them fall down laughing ! pic.twitter.com/oyj4j7kqGU
— Vindu Dara Singh (@RealVinduSingh) May 24, 2025
मुकुल देव ने अपने करियर की शुरुआत 1996 में टीवी सीरियल ‘मुमकिन’ से की थी। यहीं से उनकी अभिनय यात्रा शुरू हुई। टीवी पर लोकप्रियता पाने के बाद उन्होंने बड़े पर्दे की ओर रुख किया और फिल्म ‘दस्तक’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। यह फिल्म पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन की भी पहली फिल्म थी। फिल्म में मुकुल ने एसीपी रोहित मल्होत्रा की भूमिका निभाई थी।
इसके बाद उन्होंने कई मशहूर फिल्मों में अभिनय किया,जिनमें सन ऑफ सरदार,आर…राजकुमार,जय हो,किस्मत कनेक्शन,यमला पगला दीवाना प्रमुख हैं।उनका आखिरी फिल्मी किरदार हिंदी फिल्म ‘एंथ द एंड’ में देखा गया था। इसके अलावा वे रियलिटी शो ‘फियर फैक्टर इंडिया’ के पहले सीज़न के होस्ट भी रहे थे। उनकी आवाज़ और व्यक्तित्व में वह कमांड था,जो दर्शकों को तुरंत आकर्षित करता था।
मुकुल देव का जन्म दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिताजी हरी देव,दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर थे। उनके परिवार की जड़ें पंजाब के जालंधर के पास के एक गाँव से जुड़ी थीं।
मुकुल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अफगान संस्कृति और भाषा के बारे में पहली जानकारी अपने पिता से ही मिली थी। उनके पिता पश्तो और फारसी भी बोल सकते थे और इसी बहुभाषी वातावरण में मुकुल बड़े हुए।
अभिनय की ओर मुकुल देव का पहला झुकाव तब हुआ,जब वे आठवीं कक्षा में थे। उन्होंने दूरदर्शन के एक डांस शो में माइकल जैक्सन की स्टाइल में डांस किया था। यही उनकी पहली पब्लिक परफॉर्मेंस थी और इसके लिए उन्हें जीवन का पहला पारिश्रमिक भी मिला था।
हालाँकि,अभिनय की दुनिया में आने से पहले मुकुल ने एक बिल्कुल अलग राह अपनाई थी। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी से पायलट की ट्रेनिंग ली थी और वाणिज्यिक विमान उड़ाने की विधिवत शिक्षा प्राप्त की थी,लेकिन उनकी आत्मा कला और अभिनय के साथ जुड़ी थी और इसी खिंचाव ने उन्हें अंततः एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ओर मोड़ दिया।
मुकुल देव की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर रोल को पूरी ईमानदारी और गहराई से निभाते थे। उन्होंने पुलिस ऑफिसर,आतंकवादी,हास्य कलाकार, खलनायक जैसे विविध रोल निभाए और हर बार दर्शकों को प्रभावित किया। वे कभी ‘हीरो’ की चमक में नहीं दिखे,लेकिन एक ‘परफॉर्मर’ के रूप में उन्होंने हर किरदार में जान डाल दी। यही वजह थी कि फिल्म इंडस्ट्री के अंदर उनके काम की बड़ी इज्ज़त थी।
मुकुल देव अभिनेता राहुल देव के छोटे भाई थे। दोनों भाइयों ने अपने-अपने अभिनय कौशल से इंडस्ट्री में पहचान बनाई। राहुल देव जहाँ खलनायक की भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं,वहीं मुकुल ने एक बहुपरतीय कलाकार के रूप में खुद को स्थापित किया।
मुकुल देव के जाने से हिंदी सिनेमा ने एक शांत,लेकिन बेहद प्रभावशाली कलाकार खो दिया है। वे ऐसे अभिनेता थे,जो कैमरे के सामने चमकने के बजाय परदे पर किरदार में समा जाना पसंद करते थे। उनका जीवन एक मिसाल है कि जुनून,धैर्य और समर्पण से कोई भी कलाकार चमक सकता है,भले ही वह सुर्खियों में न हो।
मुकुल देव का सफर अभिनय की दुनिया में सादगी,शुद्धता और समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने जो छाप छोड़ी है,वह कभी नहीं मिटेगी। फिल्म इंडस्ट्री,उनके दोस्त, परिवार और लाखों प्रशंसक आज एक सच्चे कलाकार को याद कर रहे हैं,जिन्होंने शोर से दूर रहकर भी दिलों में जगह बनाई।
