तिरुवनंतपुरम,21 जुलाई (युआईटीवी)- कांग्रेस पार्टी के भीतर खींचतान एक बार फिर से खुलकर सामने आई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.मुरलीधरन ने रविवार को ऐलान किया कि वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को अब तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाले किसी भी पार्टी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर अपना रुख नहीं बदलते,तब तक उन्हें पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुरलीधरन का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी कर रही हैं। संसद के इस सत्र में हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के परिणामों पर जोरदार बहस की उम्मीद है। इसी बीच कांग्रेस के भीतर यह विवाद पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।
मुरलीधरन ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि, “वह (थरूर) जब तक अपना रुख नहीं बदलते,हम उन्हें तिरुवनंतपुरम में आयोजित किसी भी पार्टी के कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करेंगे। वह हमारे साथ नहीं हैं,इसलिए उनके किसी कार्यक्रम का बहिष्कार करने का सवाल ही नहीं उठता।” उनके इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि केरल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और थरूर के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं।
दरअसल,शशि थरूर ने हाल ही में कोच्चि में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि राष्ट्रीय हित हमेशा दलीय राजनीति से पहले आने चाहिए। थरूर ने कहा था, “हमें हमेशा देश को सर्वोपरि रखना चाहिए। राजनीतिक दल देशों को बेहतर बनाने के लिए होते हैं।” उनका यह बयान कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं को पसंद नहीं आया। मुरलीधरन ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ करार देते हुए थरूर की कड़ी आलोचना की।
यह विवाद तब और गहरा गया जब थरूर ने उस सर्वेक्षण को सोशल मीडिया पर साझा किया,जिसमें उन्हें यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताया गया था। इस कदम को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अनुशासनहीनता करार दिया। मुरलीधरन ने भी इसे लेकर थरूर पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संगठनात्मक रूप से काम करती है और किसी भी व्यक्ति को निजी महत्वाकांक्षाओं के आधार पर पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
शशि थरूर का यह बयान और उनका सर्वेक्षण साझा करना केरल कांग्रेस के भीतर पहले से चल रही गुटबाजी को और हवा दे रहा है। थरूर के समर्थकों का मानना है कि वह एक वरिष्ठ नेता के तौर पर अपनी स्वतंत्र राय रखने का हक रखते हैं और राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण संतुलित है। वहीं,मुरलीधरन सहित अन्य वरिष्ठ नेता इसे पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग हटकर बयानबाजी मानते हैं।
कांग्रेस के भीतर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाने की जरूरत है। संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस का मकसद सरकार को पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों पर घेरना है,लेकिन पार्टी के भीतर इस तरह के बयान और मतभेद उसकी रणनीति को कमजोर कर सकते हैं।
मुरलीधरन का यह बयान न केवल थरूर की आलोचना है,बल्कि यह संकेत भी देता है कि कांग्रेस में गुटबाजी की समस्या अभी भी गहरी है। थरूर पिछले कुछ समय से केरल में पार्टी के पारंपरिक नेतृत्व के खिलाफ अपनी स्वतंत्र पहचान बना रहे हैं। खासकर यूडीएफ के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में उनका नाम चर्चा में आने के बाद पार्टी के अंदर उनका विरोध बढ़ गया है।
हालाँकि,थरूर ने इस विवाद पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह पार्टी के भीतर संवाद बनाए रखने के पक्षधर हैं और कांग्रेस की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं,लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या थरूर को तिरुवनंतपुरम के पार्टी कार्यक्रमों में दोबारा शामिल होने की अनुमति मिलती है या नहीं।
कांग्रेस के भीतर यह मतभेद स्पष्ट करता है कि पार्टी में आंतरिक एकजुटता की कमी एक बार फिर उभरकर सामने आई है। संसद सत्र से पहले पार्टी को इन मतभेदों को दूर करना होगा,वरना राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की उसकी रणनीति प्रभावित हो सकती है।
