नई दिल्ली,29 जून (युआईटीवी)- अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और इसमें किसी प्रकार की जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद अब याचिका पर जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। इस मामले को लेकर पहले से ही जाँच जारी है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच दल अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सरकार को सौंप चुका है।
यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है। याचिका में माँग की गई है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ-साथ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की निगरानी में विशेष जाँच दल के गठन की भी माँग की है। उनका आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं,जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच दल ने बिना किसी आपराधिक मामला दर्ज किए जाँच शुरू कर दी,जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी कथित वित्तीय अनियमितता या चोरी के मामले में पहले विधिक प्रक्रिया के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उसके बाद जाँच आगे बढ़नी चाहिए। उनका तर्क है कि वर्तमान प्रक्रिया में कई कानूनी पहलुओं का पालन नहीं किया गया है।
दरअसल,13 जून को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जाँच दल का गठन किया था। इस जाँच दल को पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जाँच दल ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। हालाँकि,रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और जाँच अभी भी जारी है।
जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया तो न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अदालत ने कहा कि यदि इस याचिका पर नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होती है,तो इससे किसी प्रकार की असाधारण स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। न्यायालय ने यह भी कहा कि अदालत की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया और समय-सारिणी के अनुसार ही आगे बढ़ती है तथा केवल गंभीर और असाधारण परिस्थितियों में ही तत्काल सुनवाई का निर्णय लिया जाता है।
पीठ ने तत्काल सुनवाई की माँग को अस्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि इस याचिका पर 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में विचार किया जाएगा। अदालत के इस फैसले से स्पष्ट हो गया कि फिलहाल मामले में किसी विशेष या त्वरित न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानी गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि मामले में लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। उनका कहना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया,तो महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रह सकती है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सुनवाई की जाए और जाँच की निगरानी उच्च स्तर पर सुनिश्चित की जाए। हालाँकि,सर्वोच्च न्यायालय ने इन दलीलों को तत्काल सुनवाई का पर्याप्त आधार नहीं माना।
इस पूरे मामले में पुलिस की जाँच भी लगातार जारी है। अब तक राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या यह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। पुलिस विभिन्न दस्तावेजों,वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जाँच कर रही है।
जाँच के क्रम में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया जा चुका है। पुलिस ने उनसे ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। इनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित कई अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि चंपत राय ने कुछ समय पहले ही ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि उनके इस्तीफे और वर्तमान जाँच के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद जाँच एजेंसियाँ मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं,ताकि किसी भी संभावित तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।
राम मंदिर देश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी कथित वित्तीय विवाद या अनियमितता के आरोप स्वाभाविक रूप से व्यापक चर्चा का विषय बन जाते हैं। इसी कारण जाँच एजेंसियाँ पूरे मामले को गंभीरता से लेकर सभी तथ्यों की जाँच कर रही हैं। राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जाँच दल भी अपनी जाँच आगे बढ़ा रहा है,जबकि पुलिस की आपराधिक जाँच समानांतर रूप से जारी है।
अब इस मामले में सभी की निगाहें जुलाई में होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता अपने तर्क विस्तार से रखेंगे,जबकि जाँच एजेंसियों की प्रगति और राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई भी न्यायालय के सामने आ सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में किसी अतिरिक्त जाँच,स्वतंत्र निगरानी या अन्य निर्देश की आवश्यकता महसूस करता है या नहीं। फिलहाल अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ेगी और किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
