अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Arya909050)

अमेरिका में सरकारी शटडाउन: ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच टकराव से ठप पड़ा कामकाज

वाशिंगटन,1 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका एक बार फिर से सरकारी शटडाउन की स्थिति में पहुँच गया है। सालों बाद अमेरिकी संघीय सरकार का कामकाज ठप हो गया है,जिसकी वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेट्स के बीच गहराता राजनीतिक गतिरोध है। दरअसल,अमेरिकी सीनेट में अस्थायी फंडिंग बिल पास न हो पाने के कारण संघीय एजेंसियों को आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए और सरकारी कामकाज बंद करने की स्थिति आ गई। यह घटनाक्रम न केवल अमेरिकी राजनीति में उथल-पुथल पैदा कर रहा है,बल्कि लाखों सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की जिंदगी पर भी गहरा असर डाल सकता है।

सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं और किसी भी बिल को पास कराने के लिए न्यूनतम 60 वोटों की जरूरत होती है। रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों में बहुमत होने के बावजूद उनके पास इस बिल को पास कराने के लिए सात वोट कम पड़ गए। इसका मतलब यह था कि रिपब्लिकन पार्टी को डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन चाहिए था,लेकिन डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर असहमति जताते हुए बिल के पक्ष में वोट देने से इंकार कर दिया।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि वे तब तक सहयोग नहीं करेंगे,जब तक स्वास्थ्य सेवा में की गई कटौतियों को वापस नहीं लिया जाता। दरअसल,इस साल की शुरुआत में रिपब्लिकन बहुमत से पारित हुए तथाकथित “बिग ब्यूटीफुल बिल” में स्वास्थ्य सेवाओं के बजट में बड़े पैमाने पर कटौती की गई थी। डेमोक्रेट्स का मानना है कि यह फैसला आम अमेरिकी नागरिकों के हितों के खिलाफ है और इसी वजह से उन्होंने अस्थायी फंडिंग बढ़ाने वाले बिल के समर्थन से दूरी बना ली।

राष्ट्रपति ट्रंप ने हालाँकि डेमोक्रेट्स पर समझौते की राह रोकने का आरोप लगाया है। सोमवार को हुई मुलाकात में किसी ठोस परिणाम पर न पहुँचने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक एआई-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया,जिसमें डेमोक्रेटिक नेताओं – सदन के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज और सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर का मजाक उड़ाया गया। इस कदम ने दोनों दलों के बीच तनाव को और भड़का दिया।

मंगलवार को ट्रंप ने अपने बयानों को और तीखा करते हुए डेमोक्रेट्स पर यह आरोप लगाया कि वे “जरा भी झुकने के लिए तैयार नहीं हैं।” उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि शटडाउन की वजह से अगर हालात बिगड़ते हैं,तो वे संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देंगे। राष्ट्रपति के शब्दों में, “जब आप इसे बंद करते हैं,तो आपको छंटनी करनी पड़ती है। हम बहुत से लोगों को नौकरी से निकाल देंगे।” ट्रंप के इस बयान ने सरकारी कर्मचारियों में असुरक्षा और बेचैनी को और बढ़ा दिया है।

गौरतलब है कि अमेरिका में ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी एक लंबा शटडाउन हुआ था,जो पूरे 35 दिनों तक चला था और यह अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन माना जाता है। उस दौरान लाखों सरकारी कर्मचारियों को या तो बिना वेतन के काम करना पड़ा था या फिर उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था। मौजूदा स्थिति भी इसी ओर इशारा कर रही है कि अगर राजनीतिक गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ,तो यह शटडाउन भी लंबा खिंच सकता है।

सरकारी शटडाउन का असर अमेरिकी जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ना तय है। हालाँकि,सीमा सुरक्षा,कानून प्रवर्तन और हवाई यातायात नियंत्रण जैसी आवश्यक सेवाएँ जारी रहेंगी,लेकिन कई अहम कार्यक्रम प्रभावित होंगे। इनमें खाद्य सहायता कार्यक्रम,सरकारी वित्त पोषित प्री-स्कूल,खाद्य निरीक्षण सेवाएँ और राष्ट्रीय उद्यानों का संचालन शामिल है। इन सेवाओं में कटौती या अस्थायी रोक से सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को झटका लगेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शटडाउन लंबे समय तक जारी रहता है,तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। हवाई यात्रा सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है,क्योंकि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और सुरक्षा कर्मियों को बिना वेतन के काम करना पड़ेगा। ऐसे में उनके काम पर न आने या असंतोष जताने की स्थिति में हवाई यातायात व्यवस्था चरमरा सकती है। इसके अलावा,वित्तीय बाजार भी इस राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित होंगे और निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है।

डेमोक्रेट्स का रुख फिलहाल कड़ा नजर आ रहा है। वे चाहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं की कटौती को वापस लिया जाए और आम नागरिकों को राहत दी जाए। दूसरी ओर,रिपब्लिकन पार्टी अपने प्रस्ताव पर अड़ी हुई है,जिसमें उन्होंने 21 नवंबर तक फंडिंग बढ़ाने की बात कही है,लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान है,स्थायी नहीं। यही वजह है कि दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ आमने-सामने खड़े हो गए हैं और बीच का रास्ता निकलना मुश्किल होता जा रहा है।

अमेरिकी राजनीति में यह शटडाउन केवल वित्तीय संकट की वजह से नहीं है,बल्कि यह गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण और सत्ता संघर्ष का नतीजा भी है। ट्रंप प्रशासन अपनी नीतियों को बिना समझौते लागू करना चाहता है,जबकि डेमोक्रेट्स इसे जनविरोधी मानकर विरोध कर रहे हैं। नतीजतन,सबसे बड़ी कीमत आम अमेरिकी नागरिक और सरकारी कर्मचारी चुका रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स किसी साझा समाधान तक पहुँच पाते हैं या नहीं। अगर गतिरोध बना रहा,तो शटडाउन न केवल अमेरिकी प्रशासन की कार्यप्रणाली को पंगु बना देगा,बल्कि यह ट्रंप सरकार की लोकप्रियता और 2026 के चुनावी समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल अमेरिका एक बार फिर उसी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है,जहाँ राजनीति की जंग में आम जनता की जिंदगी दांव पर लगी हुई है।