नई दिल्ली,3 जून (युआईटीवी)- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर इन दिनों अभूतपूर्व गतिविधि देखने को मिल रही है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र अपने अंकों के सत्यापन और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसी कारण बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक दर्ज किया गया है। हालाँकि,बढ़ती माँग और साइबर हमलों की कोशिशों के बावजूद बोर्ड ने दावा किया है कि उसकी तकनीकी और सुरक्षा टीमें लगातार सक्रिय हैं और छात्रों को निर्बाध सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं।
सीबीएसई द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मंगलवार रात 10 बजे तक लगभग 14 हजार उपयोगकर्ता एक साथ पोर्टल का उपयोग कर रहे थे। इसी अवधि में 28 हजार से अधिक आवेदन सफलतापूर्वक जमा किए जा चुके थे। यह संख्या इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में छात्र अपने परीक्षा परिणामों को लेकर स्पष्टता चाहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का लाभ उठा रहे हैं।
बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि छात्रों और अभिभावकों से लगातार प्राप्त हो रहे सुझावों तथा फीडबैक को ध्यान में रखते हुए पोर्टल में कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल,सुरक्षित तथा सुविधाजनक बनाना है। विशेष रूप से पोर्टल की सेशन टाइम लिमिट बढ़ाई गई है,जिससे छात्रों को आवेदन भरते समय बीच में आने वाली रुकावटों और अचानक लॉगआउट होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
सीबीएसई मुख्यालय के अनुसार हाल के दिनों में पोर्टल पर उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। परीक्षा परिणामों के बाद हजारों छात्र अपने अंकों की दोबारा जाँच करवाना चाहते हैं। ऐसे में पोर्टल पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। बोर्ड का कहना है कि शैक्षणिक कैलेंडर पहले से निर्धारित होने के बावजूद तकनीकी टीमों ने इस अतिरिक्त दबाव को सँभालने के लिए आवश्यक तैयारियाँ की थीं,जिसके कारण सेवाएँ सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं।
वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई बार छात्रों को लगता है कि उनके उत्तरों का मूल्यांकन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ है या अंकों के जोड़ में कोई त्रुटि हो सकती है। ऐसे मामलों में यह प्रक्रिया उन्हें अपने परिणामों की दोबारा जाँच करवाने का अवसर प्रदान करती है। यही कारण है कि परिणाम घोषित होने के बाद हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र इस सुविधा का उपयोग करते हैं।
बोर्ड के अनुसार इस वर्ष कई विषयों में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रक्रियाओं के विस्तार और छात्रों में जागरूकता बढ़ने के कारण अधिक विद्यार्थी अपने अधिकारों और उपलब्ध विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं। इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होता है।
इस बीच सीबीएसई ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि जहाँ एक ओर हजारों छात्र पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर कुछ शरारती तत्वों द्वारा पोर्टल को बाधित करने के प्रयास भी किए गए। बोर्ड के अनुसार हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर साइबर हमलों की कोशिशें सामने आईं,लेकिन सुरक्षा तंत्र की सतर्कता के कारण इनका कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा।
सीबीएसई की साइबर सुरक्षा टीम ने बताया कि पोर्टल को निशाना बनाकर डिनायल ऑफ सर्विस यानी डीओएस हमले का प्रयास किया गया। इस प्रकार के हमलों में किसी वेबसाइट या सर्वर पर अत्यधिक मात्रा में कृत्रिम ट्रैफिक भेजकर उसे बाधित करने की कोशिश की जाती है। बोर्ड के अनुसार एक घटना में मात्र दो मिनट के भीतर पोर्टल पर लगभग 15 लाख हिट दर्ज की गईं। यह संख्या सामान्य उपयोग से कहीं अधिक थी और स्पष्ट रूप से सिस्टम को प्रभावित करने के उद्देश्य से उत्पन्न की गई थी।
इसके अतिरिक्त पोर्टल की फाइलों और आंतरिक संरचना तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करने के लिए भी एक लाख से अधिक प्रयास किए गए। हालाँकि,सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि उसकी साइबर सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय रही और सभी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर उन्हें समय रहते रोक दिया गया। बोर्ड ने कहा कि इन हमलों का छात्रों की आवेदन प्रक्रिया पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा और अधिकांश उपयोगकर्ता सामान्य रूप से पोर्टल का उपयोग करते रहे।
सीबीएसई अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बोर्ड लगातार नई तकनीकों और सुरक्षा उपायों को अपनाकर अपने ऑनलाइन सिस्टम को मजबूत बना रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे नेटवर्क गतिविधियों पर नजर रख रही है,ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत पता लगाया जा सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
छात्रों और अभिभावकों ने भी बोर्ड के इस प्रयास का स्वागत किया है। कई अभिभावकों का कहना है कि परिणामों से संबंधित प्रक्रियाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाने से समय और संसाधनों की बचत होती है। वहीं,तकनीकी सुधारों और बढ़ाई गई सेशन टाइम लिमिट से आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गई है।
बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पोर्टल में लगातार सुधार किए जाते रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार फीडबैक के आधार पर नई सुविधाएँ जोड़ी जाएँगी और तकनीकी ढाँचे को और मजबूत बनाया जाएगा,ताकि भविष्य में भी बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को बिना किसी परेशानी के सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
सीबीएसई का मानना है कि डिजिटल पारदर्शिता,तकनीकी दक्षता और मजबूत साइबर सुरक्षा किसी भी आधुनिक शैक्षणिक व्यवस्था की आधारशिला हैं। इसी दिशा में बोर्ड लगातार काम कर रहा है। पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड ट्रैफिक और साइबर चुनौतियों के बावजूद सेवाओं का सुचारु संचालन इस बात का संकेत है कि बोर्ड अपनी डिजिटल प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में आवेदन संख्या और बढ़ने की संभावना है,लेकिन बोर्ड का कहना है कि वह हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
