नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत की राजधानी नई दिल्ली आज कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम दिन बन गई है। दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के दो प्रमुख देशों श्रीलंका और मिस्र के शीर्ष नेता इस समय भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या और मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती दोनों आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों की यह मुलाकात भारत की “पड़ोसी पहले” और “महासागर विजन” नीति को और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या अपने दो दिवसीय भारत दौरे के दौरान गुरुवार को नई दिल्ली पहुँचीं। यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है,जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की उम्मीद जगाई है। शुक्रवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत वार्ता करेंगी,जिसमें द्विपक्षीय व्यापार,निवेश,ऊर्जा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा पर बातचीत होने की संभावना है।
अपने दौरे के पहले दिन हरिनी अमरसूर्या ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच मित्रता का रिश्ता ऐतिहासिक,गहरा और जन-जन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीलंका भारत के “पड़ोसी पहले” दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
श्रीलंकाई प्रधानमंत्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज का भी दौरा किया,जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंध सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि भारत के शैक्षणिक संस्थान दक्षिण एशिया के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और युवा पीढ़ी के माध्यम से क्षेत्र में नई साझेदारी और समझ को बढ़ाया जा सकता है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा को लेकर एक बयान जारी करते हुए कहा कि “यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा को आगे बढ़ाती है और गहरी एवं बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी को सुदृढ़ करती है। यह भारत के ‘महासागर विजन’ और ‘पड़ोसी पहले’ नीति से प्रेरित होकर मित्रता के बंधन को और मजबूत करेगी।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत श्रीलंका के साथ ऊर्जा,समुद्री सुरक्षा,कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इसी बीच,मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती भी भारत की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। विदेश मंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है,जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। गुरुवार को उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ भारत-मिस्र रणनीतिक वार्ता की अध्यक्षता की। यह पहली बार है,जब दोनों देशों ने इस स्तर पर औपचारिक रणनीतिक वार्ता आयोजित की।
जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “भारत और मिस्र ग्लोबल साउथ की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम दोनों राष्ट्र विश्व मंच पर विकासशील देशों की आवाज़ को मज़बूत करने,स्वतंत्रता और निर्णय की स्वायत्तता की रक्षा करने के पक्षधर हैं। हमारी यह साझेदारी पारस्परिक सम्मान,विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित है।” उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में भारत और मिस्र के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था,जिसके बाद से रक्षा,ऊर्जा,अंतरिक्ष, व्यापार और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मिस्र के विदेश मंत्री अब्देलती ने भी भारत के प्रति अपने देश की गहरी मित्रता और विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत और मिस्र दोनों प्राचीन सभ्यताएँ हैं,जो आधुनिक युग में विकास और सहयोग के नए अध्याय लिख रही हैं। अब्देलती ने यह भी कहा कि काहिरा भारत के साथ व्यापार,रक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी को और गहरा करना चाहता है।
श्रीलंका और मिस्र दोनों नेताओं की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब भारत हिंद महासागर और अफ्रीका के देशों के साथ अपनी कूटनीतिक पहुँच को तेजी से विस्तार दे रहा है। भारत का उद्देश्य न केवल आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाना है,बल्कि वैश्विक मंच पर दक्षिणी देशों की आवाज़ को एकजुट करना भी है।
विश्लेषकों का मानना है कि श्रीलंका और मिस्र दोनों ही भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का निकटतम समुद्री पड़ोसी है,जबकि मिस्र अफ्रीका और अरब दुनिया के बीच भारत का रणनीतिक द्वार है। इन दोनों दौरों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भारत “वैश्विक दक्षिण” की एक सशक्त आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। उम्मीद है कि इन बैठकों के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा,जिसमें व्यापार,सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित नई पहल की घोषणा हो सकती है। इस प्रकार,इन यात्राओं से भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई दिशा मिलने की पूरी संभावना है।
