कोलकाता,22 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के दो चरणों को शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए राज्यपाल आर. एन. रवि ने एक अहम पहल की है। मंगलवार को उन्होंने घोषणा की कि राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान को भयमुक्त बनाने के उद्देश्य से राजभवन की ओर से 24 घंटे चलने वाली नागरिक हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है। इस कदम को चुनावी माहौल में विश्वास बहाली और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि हाल के दिनों में राज्यपाल ने विभिन्न जिलों के नागरिकों से मुलाकात की थी। इन मुलाकातों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने चुनावी हिंसा को लेकर अपनी गहरी चिंताएँ व्यक्त कीं। कई लोगों ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले चुनावों के दौरान उन्हें गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। इनमें मतदान केंद्रों पर हिंसा,मतदाताओं को डराने-धमकाने,मतदान से रोकने और यहाँ तक कि परिवार के सदस्यों पर हमले जैसी घटनाएँ शामिल थीं।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ नागरिकों ने यह बताया कि उन्होंने साहस दिखाते हुए मतदान किया,लेकिन इसके बाद उन्हें शारीरिक हमलों और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। ऐसे अनुभवों ने आम मतदाताओं के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है,जिसे दूर करना इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी पृष्ठभूमि में यह हेल्पलाइन शुरू की गई है,ताकि लोग बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और उन्हें तुरंत सहायता मिल सके।
राज्यपाल कार्यालय के अनुसार,यह हेल्पलाइन चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगी और चुनाव से जुड़े किसी भी प्रकार के भय,हिंसा या अनियमितता की शिकायतें प्राप्त करेगी। इन शिकायतों को संबंधित प्रशासनिक और कानूनी संस्थाओं तक पहुँचाया जाएगा,ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाए,जिससे वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।
हालाँकि,राज्य प्रशासन और पुलिस ने चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं,लेकिन राज्यपाल ने माना कि केवल प्रशासनिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। लोगों के मन से डर निकालना और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह हेल्पलाइन एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगी।
राज्यपाल ने राज्य के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें। उन्होंने कहा कि हर वोट की अहमियत होती है और यह लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार के डर या दबाव के आगे झुकने की जरूरत नहीं है,क्योंकि राज्य की संवैधानिक संस्थाएँ उनके साथ खड़ी हैं।
इस पहल को पिछले अनुभवों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2023 में पंचायत चुनावों के दौरान तत्कालीन राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने भी चुनावी हिंसा को रोकने के लिए ‘पीस रूम’ की स्थापना की थी। यह व्यवस्था काफी प्रभावी मानी गई थी और इसे 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी जारी रखा गया था। अब उसी तरह की पहल को और व्यापक रूप देते हुए हेल्पलाइन शुरू की गई है,ताकि अधिक से अधिक लोगों तक मदद पहुंच सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है,जिसके कारण चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है,बल्कि यह लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को मजबूत करने का भी प्रयास है।
चुनाव आयोग की निगरानी में होने वाले इन चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती,संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था और निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया गया है। इसके बावजूद,यह हेल्पलाइन नागरिकों को सीधे तौर पर अपनी समस्याएँ और आशंकाएँ साझा करने का मंच प्रदान करेगी,जिससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकेगी।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल किस हद तक प्रभावी साबित होती है और क्या इससे मतदाताओं के मन में व्याप्त भय को कम किया जा सकेगा। फिलहाल,इस कदम को एक सकारात्मक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है,जो पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
