चेन्नई,22 अप्रैल (युआईटीवी)- तमिलनाडु की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम के खिलाफ चुनाव आयोग में गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी चुनाव से ठीक पहले के संवेदनशील ‘मौन काल’ के दौरान बड़े पैमाने पर ऑनलाइन राजनीतिक अभियान चलाने की योजना बना रही है,जो चुनावी कानूनों का उल्लंघन है।
यह शिकायत एल. देवसहायम और पी. आदिकेशवन की ओर से तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई है। इसमें कहा गया है कि 22 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन काल में किसी भी तरह का प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित होता है,लेकिन इसके बावजूद टीवीके कथित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति बना रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह न केवल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है,बल्कि चुनाव आचार संहिता की भावना के भी खिलाफ है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पार्टी के कुछ कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से प्रचार सामग्री को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए फेसबुक,इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है। आरोप है कि यह अभियान इस तरह डिजाइन किया गया है कि मौन काल के दौरान भी मतदाताओं पर प्रभाव डाला जा सके,जो कि चुनावी नियमों के तहत पूरी तरह निषिद्ध है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि कुछ कार्यकर्ता मतदान केंद्रों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर वोट डालते समय उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करने की योजना बना रहे हैं। कहा गया है कि इन वीडियो को बाद में सोशल मीडिया पर वायरल किया जाएगा,ताकि एक विशेष चुनाव चिह्न के पक्ष में माहौल बनाया जा सके। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि इस तरह की गतिविधियाँ पहले भी पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आई थीं,जहाँ मतदान के दिन गुपचुप तरीके से वीडियो रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका गया,तो इससे मतदान की गोपनीयता और पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा है कि इस कथित अभियान को तुरंत रोका जाए,संबंधित ऑनलाइन सामग्री को हटाया जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एल. देवसहायम ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें इस योजना के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह स्वतंत्र,निष्पक्ष और गोपनीय मतदान सुनिश्चित करे। अगर मतदान केंद्रों के भीतर इस तरह की रिकॉर्डिंग होती है, तो इससे मतदाताओं का विश्वास कमजोर होगा और चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे।
इस पूरे मामले ने राज्य की चुनावी राजनीति में हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच चुनाव आयोग के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं। मौन काल जैसे प्रावधान पारंपरिक प्रचार को रोकने के लिए बनाए गए थे,लेकिन अब ऑनलाइन माध्यमों के जरिए इन नियमों को दरकिनार करने की आशंका बढ़ गई है।
हालाँकि,इस मामले पर अभी तक तमिलगा वेट्री कझगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और क्या आरोपों की पुष्टि के लिए जाँच शुरू की जाती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह न केवल संबंधित पार्टी के लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकता है,बल्कि भविष्य में डिजिटल चुनाव प्रचार को लेकर भी सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।
फिलहाल, इस विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मतदाताओं की गोपनीयता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसे आरोपों के बीच उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा और आयोग की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
