टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

गौतम गंभीर पर बढ़ा दबाव: साउथ अफ्रीका से 0-2 की हार के बाद बोले—‘मेरे भविष्य का फैसला बीसीसीआई करेगा’

नई दिल्ली,27 नवंबर (युआईटीवी)- साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 0-2 से करारी हार झेलने के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर एक बार फिर आलोचनाओं के केंद्र में आ गए हैं। भारत ने कोलकाता और गुवाहाटी में खेले गए दोनों टेस्ट मुकाबलों में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया,जिसके बाद गंभीर की कोचिंग रणनीति,प्लेइंग इलेवन चयन और खिलाड़ियों में बार-बार किए गए बदलावों पर सवाल उठने लगे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने साफ कहा कि उनके भविष्य का फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) करेगा और वे इसके लिए तैयार हैं।

भारत को पहला टेस्ट मैच कोलकाता में सिर्फ 124 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 30 रन से गंवाना पड़ा। यह हार टीम के बल्लेबाजी क्रम की कमजोरी को उजागर करती है। दूसरे टेस्ट में स्थिति और भी अधिक खराब दिखाई दी,जब गुवाहाटी की पिच पर उन्हें 549 रन का लक्ष्य मिला और पूरी टीम मात्र 140 रन पर ढेर हो गई। यह 408 रन के विशाल अंतर से हार थी,जो टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार बन गई। लगातार खराब प्रदर्शन के चलते कोचिंग स्टाफ पर सवाल उठना स्वाभाविक है और गंभीर भी इसकी वास्तविकता को स्वीकार करते दिखे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने कहा, “यह बीसीसीआई को तय करना है। जब मैंने यह पद संभाला था,तभी मैंने कहा था कि इंडियन क्रिकेट महत्वपूर्ण है,मैं नहीं। आज भी मैं वही बात कह रहा हूँ। जो भी फैसला होगा,मैं उसका सम्मान करूँगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है,जब क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि भारत को टेस्ट फॉर्मेट में नई सोच और स्थिरता की जरूरत है।

गौतम गंभीर ने इस मौके पर इंग्लैंड दौरे की याद भी दिलाई,जहाँ भारत ने पाँच मैचों की टेस्ट सीरीज को 2-2 से बराबरी पर समाप्त किया था। उस दौरे में कई युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था और भारत ने विदेशी परिस्थितियों में बेहतरीन मुकाबला किया था। गंभीर ने कहा, “मैं वही आदमी हूँ,जिसने इंग्लैंड में एक युवा टीम के साथ अच्छे नतीजे दिए। लोग बहुत जल्दी भूल जाते हैं। हर कोई न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 की हार की बात करता है,लेकिन वह भी इसी टीम का हिस्सा था,जिसने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीता था।”

कोच के इस बयान से साफ है कि वे अपनी उपलब्धियों और टीम को दिए गए योगदान को हल्के में नहीं देखना चाहते। हालाँकि,आलोचक यह भी कहते हैं कि गंभीर के कार्यकाल में भारत ने टेस्ट में स्थिरता खो दी है। उनके मार्गदर्शन में खेले गए 18 टेस्ट मैचों में भारत 10 बार हारा है,जो किसी भी भारतीय कोच के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इसके अलावा खेलने वाली टीम में बार-बार किए गए बदलाव,ऑलराउंडर्स को प्राथमिकता देना और टेस्ट फॉर्मेट में स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों को कम मौका देने की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

गंभीर ने स्वीकार किया कि टीम के अनुभव की कमी हार का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा, “हाँ, यह एक युवा टीम है। इनमें से कई खिलाड़ियों ने 15 से कम टेस्ट मैच खेले हैं। आप उनसे तुरंत उम्मीद नहीं कर सकते कि वे शीर्ष टीमों के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेंगे। सीखने के लिए समय चाहिए और वे मैदान पर लगातार सीख रहे हैं।”

उन्होंने गुवाहाटी टेस्ट में टीम की बल्लेबाजी पर भी स्पष्ट रूप से असंतोष जताया। “हम 95/1 पर थे। वहाँ से 120/7 जैसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की गलती नहीं है। जिम्मेदारी सभी की है—खिलाड़ियों की,सपोर्ट स्टाफ की और मेरी भी।” गंभीर का यह बयान टीम के अंदर सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को दर्शाता है,जिसे वे अपनी कोचिंग फिलॉसफी का मूल मानते हैं।

दिलचस्प बात है कि गंभीर ने बहाने बनाने से साफ इंकार किया और यही रवैया उन्हें एक सख्त और स्पष्ट कोच के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने कहा, “मैं बहाने नहीं बनाता और न आगे कभी बनाऊँगा,लेकिन यह भी सच है कि अनुभवहीन बल्लेबाज जब विश्वस्तरीय गेंदबाज़ी का सामना करते हैं,तो शुरुआत में संघर्ष होता है। उन्हें समय देना होगा।”

गंभीर के शब्दों में टीम में क्षमता है,लेकिन निरंतरता की कमी दिख रही है। भारत की गेंदबाजी इकाई भी इस श्रृंखला में प्रभावित नहीं कर सकी। साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों ने दोनों मैचों में भारतीय गेंदबाजी को पूरी तरह पछाड़ दिया,जबकि भारतीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए बेतरह जूझते दिखे।

भारतीय टीम अब टेस्ट फॉर्मेट में एक संक्रमण काल से गुजरती प्रतीत हो रही है। अनुभवी खिलाड़ियों के धीरे-धीरे बाहर होने और युवा खिलाड़ियों पर बढ़ी जिम्मेदारी के बीच टीम एक नई पहचान गढ़ने की कोशिश में है। हालाँकि,गंभीर के कोचिंग निर्णयों पर सवाल उठना स्वाभाविक है,लेकिन यह भी सच है कि नई पीढ़ी को तैयार करना आसान कार्य नहीं होता।

अब यह देखने की बात होगी कि बीसीसीआई गंभीर के भविष्य को लेकर क्या फैसला करता है। क्या भारतीय क्रिकेट लंबे फॉर्मेट में उनकी कोचिंग शैली को मौका देना जारी रखेगा? या नए चेहरे की तलाश शुरू होगी? जो भी हो,गंभीर ने साफ कर दिया है कि वे फैसले से पीछे नहीं हटेंगे और खेल के हित को सर्वोपरि रखेंगे।

हालिया हारों ने भारत को टेस्ट रैंकिंग में भी नुकसान पहुँचाया है और अब टीम को अपने आत्मविश्वास,रणनीति और संयोजन पर नए सिरे से काम करने की आवश्यकता है। गंभीर का मानना है कि यह टीम अनुभव के साथ मजबूत बनेगी और भारत टेस्ट क्रिकेट में अपनी पुरानी प्रतिष्ठा दोबारा हासिल करेगा,लेकिन इसके लिए धैर्य और निरंतरता की जरूरत होगी।