अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

वेनेज़ुएला पर ट्रंप प्रशासन की सख्ती बढ़ी,तेल कंपनियों और टैंकरों पर लगाया नए प्रतिबंध

नई दिल्ली,1 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला पर दबाव बढ़ाने की अपनी रणनीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाया है। इस बार निशाना सीधे वेनेज़ुएला की तेल इंडस्ट्री पर साधा गया है,जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने वेनेज़ुएला के तेल व्यापार से जुड़ी चार कंपनियों और उनसे संबद्ध चार बड़े तेल टैंकरों पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन कदमों से वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की “गैर-कानूनी सरकार” की आय के स्रोतों को सीमित किया जा सकेगा और उस पर राजनीतिक दबाव और बढ़ेगा।

वित्त विभाग के अनुसार जिन चार कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं,उनमें बैन एरीज ग्लोबल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड,कॉर्नियोला लिमिटेड,क्रेप मर्टल कंपनी लिमिटेड और विंकी इंटरनेशनल लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के स्वामित्व या संचालन वाले तेल टैंकर—डेला,वैलिएंट,नॉर्ड स्टार और रोज़ालिंड को भी प्रतिबंधित जहाजों की सूची में जोड़ा गया है। इसका अर्थ यह है कि इन जहाजों से जुड़ी वित्तीय लेन-देन, बीमा,मरम्मत और अंतर्राष्ट्रीय सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लागू होंगे,जिससे उनका संचालन लगभग असंभव हो जाएगा।

अमेरिकी वित्त विभाग ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि वेनेज़ुएला के तेल व्यापार में शामिल किसी भी संस्था या व्यक्ति के लिए खतरा कायम है। विभाग के मुताबिक,जब तक मादुरो सरकार “अवैध गतिविधियों” और “लोकतांत्रिक संस्थाओं के दमन” का रास्ता नहीं छोड़ती,तब तक प्रतिबंधों का दायरा और भी बढ़ सकता है।

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीति साफ है—वेनेज़ुएला की मादुरो सरकार को तेल निर्यात से लाभ उठाने नहीं दिया जाएगा,खासकर तब जब अमेरिका आरोप लगा रहा है कि इसी व्यापार की आड़ में ड्रग्स की तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। बेसेंट ने कहा कि वित्त विभाग राष्ट्रपति द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप “अधिकतम दबाव” की रणनीति को जारी रखेगा,ताकि वेनेज़ुएला सरकार पर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर असर पड़े।

अमेरिका ने इन जहाजों को उस “गुप्त समुद्री बेड़े” का हिस्सा बताया है,जो कथित रूप से ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके,जहाजों के नाम और झंडे बदलकर या जटिल शिपिंग नेटवर्क का उपयोग करके प्रतिबंधों को चकमा देता है। अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि इन तरीकों के जरिए वेनेज़ुएला चोरी-छिपे तेल का निर्यात कर विदेशी मुद्रा जुटाने की कोशिश करता है,जिससे मादुरो सरकार को सहारा मिलता है।

ट्रंप प्रशासन की ओर से यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है,जब वेनेज़ुएला पहले से ही आर्थिक संकट,महँगाई और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य—सरकार के मुताबिक लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और “मुक्त चुनाव” का रास्ता साफ करना है। हालाँकि,आलोचकों का मानना है कि लगातार बढ़ते प्रतिबंध आम नागरिकों के लिए और मुश्किलें खड़ी कर देते हैं,क्योंकि तेल निर्यात में गिरावट से राज्य राजस्व प्रभावित होता है और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है।

इससे पहले भी अमेरिका ने वेनेज़ुएला और उससे जुड़े सहयोगियों पर कई चरणों में पाबंदियाँ लगाई हैं। हाल ही में,इस सप्ताह की शुरुआत में,अमेरिका ने वेनेज़ुएला और ईरान में मौजूद 10 कंपनियों और व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी आरोप है कि इन दोनों देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन तकनीक के व्यापार में सहयोग किया,जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। इसके साथ ही,अमेरिका ने इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी निर्णय लिया है,ताकि संभावित खतरों और गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो,उनकी पत्नी,परिवार और उनके कई करीबी सहयोगी पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने उन्हें “अवैध शासन” करार देते हुए दबाव बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी कदम उठाए हैं। प्रतिबंधों में संपत्तियों को फ्रीज़ करना,यात्रा पर रोक लगाना और अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुँच बंद करना शामिल है।

इसी सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की थी कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला में एक डॉक पर हमला किया। उनके अनुसार,इस डॉक का उपयोग नावों पर ड्रग्स लोड करने के लिए किया जा रहा था और यह वेनेज़ुएला के खिलाफ पहला “जमीनी हमला” था,जिसका उद्देश्य देश के सबसे बड़े निर्यात स्रोत को नुकसान पहुँचाकर मादुरो सरकार की आय सीमित करना था। इससे पहले, ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला सरकार को आतंकवादी संगठन के तौर पर भी सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही थी,जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्थिति और कमजोर पड़ती।

अमेरिकी मीडिया के विश्लेषण के मुताबिक,ट्रंप सरकार की इस रणनीति के पीछे दो प्रमुख मकसद हैं। पहला,वेनेज़ुएला के भीतर राजनीतिक परिवर्तन के लिए दबाव बनाना और दूसरा, क्षेत्रीय स्तर पर अमेरिकी सुरक्षा हितों की रक्षा करना। अमेरिका का दावा है कि वेनेज़ुएला के तेल राजस्व का उपयोग भ्रष्टाचार,दमन और अंतर्राष्ट्रीय अवैध नेटवर्क को बढ़ावा देने में हो रहा है। वहीं,मादुरो सरकार इन आरोपों को अमेरिका की “साम्राज्यवादी साजिश” बताते हुए खारिज करती रही है और कहती है कि प्रतिबंध उनके देश की संप्रभुता पर हमला हैं।

नई पाबंदियों से वेनेज़ुएला की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल निर्यात पर चोट से सरकार के पास सार्वजनिक कल्याण योजनाएँ चलाने और विदेशी कर्ज चुकाने की क्षमता और घट सकती है। साथ ही,ब्लैक-मार्केट और छिपे हुए तेल व्यापार के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है,क्योंकि लगातार प्रतिबंधों से पारदर्शी रास्ते सीमित हो जाते हैं।

फिलहाल,ट्रंप प्रशासन अपनी नीति को सही ठहराते हुए कह रहा है कि यह कदम वेनेज़ुएला के लोगों के लिए बेहतर भविष्य का रास्ता खोलेगा,लेकिन यह भी सत्य है कि मौजूदा परिदृश्य में हर नई पाबंदी के साथ तनाव की एक और परत जुड़ जाती है। प्रतिबंधों,आरोपों और जवाबी बयानों के इस दौर में वेनेज़ुएला एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है,जहाँ आर्थिक नीतियाँ और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति मिलकर उसके भविष्य की दिशा तय करेंगी।