चेन्नई,3 जनवरी (युआईटीवी)- तमिल और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में ऐतिहासिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का एक अलग ही आकर्षण रहा है। जब किसी फिल्म में बीते युग की वीरता,संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को सजीव रूप में दिखाया जाता है,तो दर्शक न केवल मनोरंजन के लिए बल्कि इतिहास को जानने की जिज्ञासा के कारण भी सिनेमाघरों का रुख करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक मोहन जी क्षत्रिय की बहुचर्चित फिल्म ‘द्रौपदी 2’ सुर्खियों में है। लंबे समय से चर्चा में बनी इस ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म के बारे में अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है,जिसने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने ‘द्रौपदी 2’ को रिलीज के लिए यू/ए सर्टिफिकेट प्रदान कर दिया है। सेंसर बोर्ड की इस मंजूरी के साथ फिल्म की थिएटर रिलीज का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह सर्टिफिकेट इस बात का संकेत है कि फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकती है,हालाँकि कुछ दृश्यों के लिए अभिभावकीय मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है। ऐतिहासिक फिल्मों में अक्सर युद्ध,सामाजिक संघर्ष और राजनीतिक उथल-पुथल जैसे प्रसंग शामिल होते हैं, इसलिए यू/ए सर्टिफिकेट को फिल्म के गहरे विषयों का स्वाभाविक परिणाम माना जा रहा है।
निर्देशक मोहन जी क्षत्रिय ने इस उपलब्धि की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। नए साल की शुभकामनाओं के साथ उन्होंने लिखा कि ‘द्रौपदी 2’ इतिहास के उन पन्नों को सामने लाएगी,जिन पर अब तक बहुत कम चर्चा हुई है। उनके मुताबिक,फिल्म 14वीं सदी के एक ऐसे दौर को उजागर करेगी,जिसे दक्षिण भारत के इतिहास में उथल-पुथल, बदलाव और संघर्ष का समय माना जाता है। इस वक्त सत्ता,समाज और संस्कृति—तीनों स्तरों पर बड़े परिवर्तन हो रहे थे,जिनका असर आम लोगों के जीवन पर भी पड़ा। फिल्म इन्हीं घटनाओं को नाटकीय और भावनात्मक अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश करेगी।
यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं,बल्कि एक सिनेमैटिक री-इमेजिनेशन के रूप में सामने आने वाली है,जो दर्शकों को अतीत के साथ संवाद का अवसर देगी। निर्देशक के शब्दों से साफ झलकता है कि उन्होंने कहानी को तथ्यात्मक शोध और रचनात्मक प्रस्तुति के संतुलन के साथ गढ़ने की कोशिश की है। खासकर 14वीं सदी के सामाजिक ढाँचे,साम्राज्य विस्तार,धार्मिक और सांस्कृतिक आंदोलनों के संदर्भ को फिल्म में प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
‘द्रौपदी 2’ का निर्माण चोला चक्रवर्ती ने नेटाजी प्रोडक्शंस के बैनर तले किया है। प्रोडक्शन हाउस की ओर से भी लगातार यह संकेत दिए गए हैं कि फिल्म तकनीकी स्तर पर भव्य और विजुअल रूप से प्रभावशाली होगी। सेट डिज़ाइन,कॉस्ट्यूम, हथियारों की शैली और लोकेशंस को उस युग के अनुरूप तैयार करने में विशेष ध्यान दिया गया है। फिल्म की टीम का मानना है कि जब दर्शक बड़े पर्दे पर ऐतिहासिक परिदृश्य देखते हैं,तो वे उसी दुनिया का हिस्सा महसूस करना चाहते हैं और यही अनुभव इस फिल्म के माध्यम से देने की कोशिश की गई है।
फिल्म की रिलीज डेट को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। शुरुआत में खबर आई थी कि निर्माता 23 जनवरी 2026 को रिलीज की योजना बना रहे हैं। हालाँकि,आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है,लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट मिल जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि रिलीज को अब ज्यादा देर तक टाला नहीं जाएगा। फिल्म इंडस्ट्री के विश्लेषकों का मानना है कि रिलीज शेड्यूल ऐसे समय तय किया जाएगा,जब सिनेमाघरों में ऐतिहासिक और पीरियड फिल्मों के दर्शकों की संख्या अधिक होने की संभावना रहती है।
दर्शकों के बीच ‘द्रौपदी 2’ को लेकर जो उत्साह देखा जा रहा है,उसकी एक वजह यह भी है कि हाल के वर्षों में कई ऐतिहासिक फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ऐसे प्रोजेक्ट्स न केवल मनोरंजन देते हैं,बल्कि बीते युगों के बारे में नई पीढ़ी की जिज्ञासा भी बढ़ाते हैं। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय सिनेमा ने अपने भव्य प्रोडक्शन,मजबूत स्क्रिप्ट और सशक्त अभिनय के दम पर ऐतिहासिक शैलियों में नई पहचान बनाई है। ‘द्रौपदी 2’ उसी परंपरा का अगला अध्याय साबित हो सकती है।
फिल्म के कथानक से जुड़े विवरण अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं,लेकिन निर्देशक के संकेतों से यह स्पष्ट है कि कहानी में सत्ता संघर्ष,मान-सम्मान की रक्षा और समाज में व्याप्त अन्याय के खिलाफ उठती आवाज जैसे विषय प्रमुख होंगे। यह फिल्म सिर्फ राजाओं-रानियों की गाथा नहीं,बल्कि सामान्य लोगों के दृष्टिकोण से इतिहास को समझने की कोशिश करेगी। यही पहलू इसे समकालीन दर्शकों के लिए और भी प्रासंगिक बनाता है।
सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब फिल्म की प्रचार रणनीति तेज होने की उम्मीद है। ट्रेलर,पोस्टर्स और प्रमोशनल इवेंट्स के जरिए फिल्म के विजुअल्स और किरदारों से धीरे-धीरे पर्दा उठाया जाएगा। सिनेमाघर मालिक भी इसे संभावित बड़े बजट और बड़े विजन वाली फिल्म के रूप में देख रहे हैं,जो रिलीज के समय अच्छी ओपनिंग दर्ज करा सकती है।
‘द्रौपदी 2’ न केवल एक नई ऐतिहासिक फिल्म है,बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा की उस रचनात्मक परंपरा का प्रतीक है,जो इतिहास को वर्तमान की आँखों से देखने और समझने का अवसर देती है। सेंसर बोर्ड की मंजूरी के साथ फिल्म अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है और जल्द ही बड़े पर्दे पर दर्शकों से मुखातिब होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जब यह कहानी सिनेमाघरों में सजीव रूप में सामने आएगी,तो दर्शक इसे किस तरह स्वीकार करते हैं और यह फिल्म इतिहास-प्रेमियों की उम्मीदों पर किस हद तक खरी उतरती है।
