विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच पाँच दिवसीय दौरे पर आएँगे भारत (तस्वीर क्रेडिट@GOVuz)

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मिलेगी नई गति,विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच पाँच दिवसीय दौरे पर आएँगे भारत

नई दिल्ली,1 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच 2 से 5 अगस्त तक आधिकारिक यात्रा पर भारत आएँगे। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक,आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,इस दौरान वह भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट करेंगे,विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एक महत्वपूर्ण बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश,ऊर्जा,प्रौद्योगिकी,शिक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों में संबंधों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार,उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री 2 अगस्त की रात 10 बजकर 45 मिनट पर नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर पहुँचेंगे। भारत पहुँचने के बाद उनके दौरे का औपचारिक कार्यक्रम 3 अगस्त से शुरू होगा। सुबह राष्ट्रपति भवन में उनकी भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट निर्धारित है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों और भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सैदोव बख्तियार ओडिलोविच नई दिल्ली में आयोजित बिजनेस फोरम में भाग लेंगे। इस मंच पर भारत और उज्बेकिस्तान के उद्योग जगत, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श होगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने,नए निवेश के अवसर तलाशने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य एशिया में भारत की बढ़ती आर्थिक उपस्थिति के संदर्भ में यह बिजनेस फोरम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

यात्रा का सबसे अहम कार्यक्रम 3 अगस्त की शाम है,जब हैदराबाद हाउस में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। इस वार्ता में दोनों देश राजनीतिक संबंधों,रणनीतिक साझेदारी,व्यापार,निवेश,ऊर्जा सुरक्षा, संपर्क परियोजनाओं,शिक्षा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अनेक विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके अलावा,मध्य एशिया और दक्षिण एशिया से जुड़े समसामयिक क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार,4 अगस्त को भी उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री का दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने का कार्यक्रम निर्धारित है। इस दौरान वे सरकारी अधिकारियों,व्यापारिक प्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख हितधारकों से मुलाकात कर सकते हैं। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रही परियोजनाओं की समीक्षा करना और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना होगा। यात्रा के अंतिम दिन 5 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर वह नई दिल्ली से अपने देश के लिए रवाना होंगे।

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है,जब भारत और उज्बेकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय संवाद लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में 20 जुलाई को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच के बीच टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की थी। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है।

उधर,उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी इस टेलीफोन वार्ता को सार्थक बताया था। उन्होंने कहा था कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष नियमित संवाद को जारी रखने और आपसी विश्वास को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने यह भी कहा था कि दोनों देशों ने उच्चतम स्तर पर होने वाली आगामी द्विपक्षीय बैठकों के कार्यक्रमों पर चर्चा की है। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के भीतर सहयोग को और मजबूत करने तथा साझा हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसेमंद संवाद भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल राजनीतिक या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार,निवेश,ऊर्जा,शिक्षा,संस्कृति और प्रौद्योगिकी जैसे अनेक क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। भारत मध्य एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की नीति पर लगातार काम कर रहा है और उज्बेकिस्तान इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता,आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और संपर्क परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर कार्य कर रहे हैं।

इसी क्रम में मई महीने में नई दिल्ली में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच विदेश कार्यालय परामर्श का 17वां दौर आयोजित किया गया था। इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यापार और निवेश,पर्यटन,ऊर्जा,शिक्षा,नवाचार,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की थी। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए थे और सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति व्यक्त की थी।

पिछले कुछ वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने,निवेश के नए अवसर विकसित करने और परिवहन एवं संपर्क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारत की कंपनियाँ उज्बेकिस्तान में फार्मास्यूटिकल्स,सूचना प्रौद्योगिकी,कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं,जबकि उज्बेकिस्तान भी भारतीय निवेशकों को अपने यहां निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच की यह यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकातों से न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी,बल्कि व्यापार,निवेश,ऊर्जा,शिक्षा,प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में भी नए अवसर खुलने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता संवाद इस बात का संकेत है कि भारत और उज्बेकिस्तान भविष्य में अपनी साझेदारी को और अधिक व्यापक तथा बहुआयामी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।