नई दिल्ली,29 जुलाई (युआईटीवी)- देशभर में चर्चा का विषय बने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जाँच एक महत्वपूर्ण चरण में पहुँच गई है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि इस बहुचर्चित मामले में दाखिल की गई चार्जशीट लगभग 20 हजार पेज की है। हालाँकि,चार्जशीट के साथ संलग्न सभी एनेक्स्चर यानी दस्तावेज अभी पूरी तरह दाखिल नहीं किए जा सके हैं। सीबीआई ने अदालत को बताया कि इन दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य जारी है, इसलिए उन्हें प्रस्तुत करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। अदालत ने जाँच एजेंसी की इस माँग को स्वीकार करते हुए दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय प्रदान कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक प्रकरण पिछले कई महीनों से देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बाद इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो को सौंपी गई थी। जाँच एजेंसी ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी,पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और दस्तावेजों की जाँच के बाद विस्तृत चार्जशीट तैयार की है। सीबीआई के अनुसार,यह चार्जशीट करीब 20 हजार पेज की है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि जाँच का दायरा काफी व्यापक रहा है और बड़ी मात्रा में साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।
राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ले लिया। साथ ही न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि चार्जशीट के साथ दस्तावेजों की सूची,गवाहों के बयान तथा जब्त की गई वस्तुओं का विवरण संलग्न किया गया है। हालाँकि,अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि चार्जशीट में जिन बयानों और दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है,वे रिकॉर्ड पर उपलब्ध क्यों नहीं हैं।
इस पर सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट से जुड़े लगभग 20 हजार पेज के एनेक्स्चर दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटल प्रक्रिया अभी जारी है। एजेंसी ने कहा कि दस्तावेजों की संख्या अत्यधिक होने के कारण उन्हें व्यवस्थित रूप से तैयार करने में समय लग रहा है। इसी वजह से अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया गया। अदालत ने सीबीआई के तर्क को स्वीकार करते हुए संबंधित दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय प्रदान कर दिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि तब तक सीबीआई सभी एनेक्स्चर,गवाहों के बयान,जब्ती संबंधी रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर देगी। इन दस्तावेजों के रिकॉर्ड पर आने के बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।
जाँच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और अदालत में अभियोजन पक्ष को मजबूत बनाने के लिए सीबीआई ने विशेष कानूनी टीम का भी गठन किया है। एजेंसी ने अधिवक्ता वीके पाठक और अधिवक्ता अर्जुन आनंद को इस मामले में लोक अभियोजक नियुक्त किया है। दोनों अधिवक्ता राऊज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई की ओर से पैरवी करेंगे। इन नियुक्तियों को मामले की गंभीरता और उसकी संवेदनशीलता को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नीट-यूजी देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसके माध्यम से देश के सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस,बीडीएस और अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
पेपर लीक की आशंकाओं के बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। छात्रों,अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जाँच की माँग की थी। इसके बाद जाँच की जिम्मेदारी केंद्रीय जाँच ब्यूरो को सौंपी गई,जिसने देश के विभिन्न राज्यों में फैले कथित नेटवर्क की जाँच शुरू की। जाँच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जाँच कराई गई और बड़ी मात्रा में दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए गए।
चार्जशीट का आकार इस बात का संकेत देता है कि जाँच एजेंसी ने मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू का विस्तृत अध्ययन किया है। इसमें कथित आरोपियों की भूमिका,डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन,गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी जानकारियाँ शामिल होने की संभावना है। हालाँकि,इन सभी तथ्यों का अंतिम परीक्षण न्यायालय में सुनवाई के दौरान ही होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड वाले मामलों में एनेक्स्चर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। चार्जशीट में किए गए दावों को प्रमाणित करने के लिए संबंधित दस्तावेज,जब्ती मेमो,गवाहों के बयान और अन्य रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। इन्हीं के आधार पर अदालत आगे आरोप तय करने और मुकदमे की सुनवाई की दिशा में निर्णय लेती है।
फिलहाल इस मामले में अदालत ने केवल चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लिया है और एनेक्स्चर दाखिल करने के लिए सीबीआई को अतिरिक्त समय दिया है। अब सभी की नजर 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि उस दिन जाँच एजेंसी सभी शेष दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करेगी,जिसके बाद मामले की सुनवाई अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करेगी। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जाँच और न्यायिक प्रक्रिया पर देशभर के लाखों छात्र,अभिभावक और शिक्षा जगत की निगाहें बनी हुई हैं,क्योंकि इस मामले का परिणाम परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
