वाशिंगटन,3 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपनी सेहत और जीवनशैली को लेकर चर्चा में रहते हैं। इस बार वजह बना उनका एस्पिरिन लेने का खुद किया गया खुलासा। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने माना कि वे डॉक्टरों की सलाह से अधिक मात्रा में एस्पिरिन लेते हैं और इसके बावजूद अपनी आदत बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह दवा पिछले दो दशकों से उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनी हुई है और वे इसे छोड़ना या कम करना नहीं चाहते।
वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने खुलकर बताया कि वे प्रतिदिन उच्च मात्रा में एस्पिरिन लेते हैं। डॉक्टरों ने उन्हें कम-डोज़ की एस्पिरिन लेने का सुझाव दिया है,लेकिन ट्रंप ने इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे कुछ हद तक “अंधविश्वासी” हैं और मानते हैं कि एस्पिरिन उनके खून को पतला रखकर दिल पर दबाव कम करती है। उनके शब्दों में,वे नहीं चाहते कि “गाढ़ा खून” दिल से गुज़रे,बल्कि “पतला खून” ही बेहतर है क्योंकि इससे हृदय पर जोर कम पड़ता है।
ट्रंप के निजी चिकित्सक,नेवी कैप्टन सीन बारबाबेला के अनुसार, राष्ट्रपति एस्पिरिन का इस्तेमाल कार्डियक प्रिवेंशन यानी दिल से जुड़ी संभावित जटिलताओं से बचाव के उद्देश्य से करते हैं। डॉक्टर ने बताया कि ट्रंप रोज़ाना 325 मिलीग्राम एस्पिरिन लेते हैं। वहीं मेयो क्लिनिक के मानकों के अनुसार,कम-डोज़ वाली एस्पिरिन आमतौर पर 81 मिलीग्राम मानी जाती है,जिसे विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर की सलाह से दिया जाता है। यह अंतर खुद यह दिखाता है कि ट्रंप जिस मात्रा का सेवन कर रहे हैं,वह सामान्य प्रिवेंटिव डोज़ से काफी अधिक है।
इसी बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपनी सेहत को लेकर समय–समय पर उठने वाली चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल करवाई गई एक विशेष मेडिकल जाँच के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर तरह–तरह के अनुमान लगाए गए,जिन पर अब उन्हें अफसोस होता है। उन्होंने माना कि शायद इस जाँच को सार्वजनिक करने से बेहतर होता कि इसे निजी ही रहने दिया जाता,क्योंकि इससे अनावश्यक बहस छिड़ गई।
डॉ. बारबाबेला के मुताबिक,ट्रंप का सीटी स्कैन वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में किया गया था। हालाँकि,उनका एमआरआई नहीं हुआ। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि यह जाँच दिल से जुड़ी संभावित समस्या को पूरी तरह खारिज करने के लिए की गई थी और रिपोर्ट सामान्य आई। व्हाइट हाउस की ओर से डॉक्टर को मीडिया इंटरव्यू के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया,लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि मेडिकल टीम लगातार राष्ट्रपति के स्वास्थ्य की निगरानी करती रही है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ट्रंप ने पैरों में सूजन कम करने के लिए एक समय कंप्रेशन सॉक्स पहनने की कोशिश की थी,लेकिन असुविधा के कारण उन्होंने इन्हें जल्दी ही छोड़ दिया। इसके बावजूद डॉक्टरों का मानना है कि ट्रंप की समग्र सेहत अच्छी है और वे अपने व्यस्त कार्यक्रम और लंबे कार्यदिवस सँभालने में सक्षम रहे हैं। व्हाइट हाउस अधिकारियों के अनुसार,उनके दैनिक शेड्यूल में लगातार बैठकें, यात्राएँ और सार्वजनिक कार्यक्रम शामिल रहते थे,जो सक्रिय जीवनशैली का संकेत देते हैं।
अमेरिका में लंबे समय से माना जाता रहा है कि एस्पिरिन दिल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती है। कई लोग इसे “हार्ट-प्रोटेक्टिव” दवा के रूप में देखते हैं,लेकिन हाल के वर्षों में मेडिकल गाइडलाइंस में बदलाव आए हैं। डॉक्टर अब इस बात पर जोर देते हैं कि एस्पिरिन का नियमित सेवन हर व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है,क्योंकि इससे ब्लीडिंग जैसे साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एस्पिरिन केवल डॉक्टर की देखरेख में और व्यक्ति की उम्र,जोखिम और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए ही लेनी चाहिए।
ट्रंप के मामले में बहस इसलिए तेज हुई है क्योंकि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वे डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उच्च मात्रा लेते रहते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सार्वजनिक जीवन के बड़े नेता को अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य निर्णयों में अधिक सावधानी नहीं बरतनी चाहिए,खासकर तब जब उनकी बातों का प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक भी ऐसी जानकारी देखकर स्वयं दवा की मात्रा बढ़ाने लगे,तो यह खतरनाक साबित हो सकता है।
ट्रंप अक्सर अपनी अच्छी सेहत का श्रेय “बेहतरीन जेनेटिक्स” को देते रहे हैं। 79 वर्ष की उम्र में भी वे खुद को ऊर्जावान और सक्षम बताते हैं। हालाँकि,एस्पिरिन को लेकर उनका पुराना विश्वास और डॉक्टरों की सलाह से अलग रुख यह दिखाता है कि वे अपनी आदतों को बदलने के पक्ष में नहीं हैं। इस स्वीकारोक्ति के बाद मेडिकल समुदाय में चर्चा है कि क्या उन्हें अब अपनी दिनचर्या की समीक्षा करनी चाहिए,खासकर तब जब नए शोध संकेत देते हैं कि बिना स्पष्ट जोखिम वाले लोगों में रोज़ाना उच्च मात्रा में एस्पिरिन लेना फायदेमंद से ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।
फिर भी,उनके डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल ट्रंप की रिपोर्ट सामान्य है और वे अपने दायित्व निभाने में सक्षम रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि दवाइयों का “सेल्फ-मैनेजमेंट” कितना जोखिम भरा हो सकता है और क्यों हर दवा—यहाँ तक की एस्पिरिन जैसी आम दिखने वाली के उपयोग से पहले चिकित्सीय सलाह अनिवार्य है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने न केवल उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर चर्चा को नई दिशा दी है,बल्कि आम लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ा है कि दिल की सुरक्षा के नाम पर किसी भी दवा का दीर्घकालिक उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना ही समझदारी है।
