नई दिल्ली,10 जनवरी (युआईटीवी)- इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और उससे जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तेज-तर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा है। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि यह छापेमारी असल में राजनीतिक जासूसी और विपक्ष को डराने की कोशिश है,जिसका जवाब बंगाल की जनता आने वाले महीनों में देगी।
महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईडी की यह कार्रवाई किसी कानूनी जाँच का हिस्सा नहीं,बल्कि सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “ईडी हमारे घर में डकैती करने आई है। यह एजेंसी राजनीतिक जासूसी कर रही है और हमारी संपत्ति की राजनीतिक लूट कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को कमजोर करने और चुनाव से पहले उनकी रणनीति जानने के लिए कर रही है।
महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट किया कि आई-पैक कोई गुप्त या संदिग्ध संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि देश का हर राजनीतिक दल जानता है कि आई-पैक क्या है और वह कैसे काम करता है। टीएमसी ने आई-पैक के साथ एक औपचारिक अनुबंध किया है,जिसके तहत चुनावी रणनीति और संगठनात्मक कामकाज में सहयोग लिया गया। उनके अनुसार,पार्टी और चुनाव से जुड़ी तमाम जानकारियां स्वाभाविक रूप से आई-पैक के कार्यालय में मौजूद थीं। ऐसे में अचानक ईडी का वहाँ छापा मारना संदेह पैदा करता है।
टीएमसी सांसद ने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच अचानक एजेंसियों को यह मामला क्यों याद आया। उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान वहाँ पार्टी की संवेदनशील और व्यक्तिगत जानकारी मौजूद थी,जिसे हासिल करने का खतरा था। महुआ मोइत्रा के मुताबिक,मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसलिए खुद आगे आईं,ताकि पार्टी और नेताओं की निजी जानकारी को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि यह हर राजनीतिक दल और नेता का अधिकार है कि उसकी निजी और रणनीतिक जानकारी की रक्षा की जाए,वरना केंद्रीय एजेंसियाँ यह जानकारी भाजपा को सौंप सकती हैं।
महुआ मोइत्रा ने इस मौके पर भाजपा सांसद और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रविशंकर प्रसाद देश के “सबसे फेल कानून मंत्री” रहे हैं और उन्हें कानून और गैरकानूनी की बातें करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। महुआ ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ नहीं है और वे केवल सत्ता के दम पर एजेंसियों का दुरुपयोग करना जानते हैं।
ईडी की छापेमारी के विरोध में टीएमसी ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। महुआ मोइत्रा ने बताया कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल के हर ब्लॉक में पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और शुक्रवार को जमीनी स्तर पर आंदोलन तेज किया गया। उन्होंने कहा कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समय एक मार्च का नेतृत्व कर रही हैं,जो यह दिखाता है कि पार्टी इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।
महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर हमला करते हुए पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि जिस दिन भाजपा ने बंगाल में कदम रखा और 60 सीटें जीतीं,वह दिन बंगाल के लिए काला दिन था। उनके मुताबिक,भाजपा ने बंगाल की संस्कृति,उसकी परंपराओं और उसकी महान विभूतियों का अपमान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने रवींद्रनाथ ठाकुर और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों को सही मायनों में सम्मान नहीं दिया,वह बंगाल के हितों की बात नहीं कर सकती।
अपने बयान के अंत में महुआ मोइत्रा ने भाजपा के लिए एक कड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “भाजपा बंगाल में जितने काले दिन लेकर आई है,अब और कुछ देखना बाकी नहीं है। सबसे काला दिन इनके लिए तब आएगा,जब मई महीने में ये दस सीटों से भी नीचे आ जाएँगे।” उनके इस बयान को आगामी चुनावों से पहले टीएमसी की आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
फिलहाल,आई-पैक पर ईडी की छापेमारी ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। जहाँ भाजपा इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है,वहीं टीएमसी इसे लोकतंत्र पर हमला और राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला केवल कानूनी नहीं,बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने के संकेत दे रहा है।
