केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय यूनियन के ट्रेड एंड इकोनॉमिक सेफ्टी कमिश्नर मारोस सेफकोविक (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

भारत-ईयू एफटीए पर ब्रुसेल्स में अहम बातचीत,पीयूष गोयल ने आधुनिक और संतुलित व्यापारिक साझेदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली,10 जनवरी (युआईटीवी)- भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर बातचीत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय यूनियन के ट्रेड एंड इकोनॉमिक सेफ्टी कमिश्नर मारोस सेफकोविक से मुलाकात की,जिसमें प्रस्तावित भारत-ईयू एफटीए के प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक को दोनों पक्षों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

पीयूष गोयल ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान प्रस्तावित समझौते के अहम क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने नियमों पर आधारित व्यापारिक ढाँचे और एक आधुनिक आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। गोयल के अनुसार,यह साझेदारी न केवल भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने में मदद करेगी,बल्कि किसानों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

भारत सरकार की मंशा यूरोपीय यूनियन के साथ ऐसा व्यापारिक समझौता करने की है,जो दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए समान रूप से लाभकारी हो। एफटीए के तहत भारत की विशेष रुचि उन क्षेत्रों में है,जहाँ श्रम का अधिक उपयोग होता है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। इनमें टेक्सटाइल,चमड़ा,रेडीमेड कपड़े,रत्न एवं आभूषण,हस्तशिल्प जैसे सेक्टर प्रमुख हैं। भारत चाहता है कि इन उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में जीरो ड्यूटी या न्यूनतम शुल्क पर प्रवेश मिले,जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिल सके और घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

पीयूष गोयल का ब्रुसेल्स दौरा केवल व्यापारिक वार्ता तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बढ़ते राजनयिक और तकनीकी सहयोग का भी प्रतीक माना जा रहा है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य वार्ता में शामिल टीमों को रणनीतिक दिशा देना,अब तक लंबित मुद्दों को सुलझाना और एक ऐसे समझौते को जल्द अंतिम रूप देना है,जो संतुलित होने के साथ-साथ महत्वाकांक्षी भी हो। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिख रहे हैं कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में मजबूत और भरोसेमंद साझेदारियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

यह मंत्रिस्तरीय बैठक ब्रुसेल्स में एक सप्ताह तक चले गहन विचार-विमर्श के बाद हुई है। इस प्रक्रिया की नींव इस सप्ताह की शुरुआत में भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सबाइन वेयंड के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान रखी गई थी। इन बैठकों में तकनीकी और नीतिगत स्तर पर कई जटिल मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई,जिससे मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए माहौल तैयार हुआ।

आधिकारिक बयान के अनुसार,भारत और यूरोपीय यूनियन के आर्थिक संबंध इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं। नौ वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद जून 2022 में भारत-ईयू एफटीए वार्ताओं को दोबारा शुरू किया गया था। यह कदम दोनों पक्षों की उस पारस्परिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है,जिसके तहत वे आर्थिक एकीकरण को और गहरा करना चाहते हैं। वार्ताओं के पुनः आरंभ होने के बाद से अब तक गहन बातचीत के 14 दौर पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा मंत्रिस्तरीय स्तर पर भी कई अहम बैठकें हुई हैं,जिनमें सबसे हालिया दौर दिसंबर 2025 में आयोजित किया गया था।

भारत के लिए यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यूरोपीय यूनियन दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है और वहाँ भारतीय उत्पादों की बेहतर पहुँच से निर्यात को नई गति मिल सकती है। वहीं,यूरोपीय यूनियन के लिए भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में आकर्षक साझेदार है।

दोनों पक्षों के सामने अभी भी कुछ संवेदनशील मुद्दे हैं,जिनमें बाजार पहुँच,टैरिफ, मानक,टिकाऊ विकास और आर्थिक सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। हालाँकि,हालिया बातचीत से यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत और यूरोपीय यूनियन इन चुनौतियों को पार करते हुए एक साझा समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। पीयूष गोयल और मारोस सेफकोविक की यह बैठक इस दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है,जो आने वाले समय में भारत-ईयू एफटीए को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है।