गांधीनगर,13 जनवरी (युआईटीवी)- जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुँचे हैं। अपने भारत दौरे के पहले दिन उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत की। इस उच्चस्तरीय मुलाकात के दौरान भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक, आर्थिक,तकनीकी,रक्षा,शिक्षा,कौशल विकास,हरित ऊर्जा और वैश्विक सहयोग से जुड़े कुल 27 महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के संबंधों में “नई ऊर्जा और नई दिशा” देने वाला कदम बताया है।
अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की बैठक के केंद्र में भविष्य की साझेदारी रही,जिसमें खास तौर पर सेमीकंडक्टर,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,डिजिटल टेक्नोलॉजी,रक्षा औद्योगिक सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल रहे। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत-जर्मनी जैसी साझेदारियाँ न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए,बल्कि वैश्विक स्थिरता और सतत विकास के लिए भी बेहद जरूरी हैं।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के साझा इरादे की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन,तकनीकी साझेदारी और सह-विकास के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊँचाई देना है। जर्मनी की उन्नत रक्षा तकनीक और भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे,दोनों को लाभ पहुँचाने की मंशा साफ नजर आई।
आर्थिक मोर्चे पर भी अहम फैसले लिए गए। दोनों देशों ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के एक फोरम की स्थापना के जरिए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इस फोरम को संयुक्त भारत-जर्मनी आर्थिक और निवेश समिति के ढाँचे में एकीकृत किया जाएगा,ताकि निवेश,व्यापार और औद्योगिक सहयोग को व्यवस्थित और दीर्घकालिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके। इससे जर्मन कंपनियों को भारत में और भारतीय कंपनियों को जर्मनी में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
तकनीक के क्षेत्र में सबसे अहम कदम भारत-जर्मनी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पार्टनरशिप पर संयुक्त इरादे की घोषणा रही। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की संवेदनशीलता को देखते हुए यह साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। इसके तहत अनुसंधान,डिजाइन,मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसी कड़ी में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान और जर्मनी की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनी इनफिनियॉन टेक्नोलॉजीज एजी के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
महत्वपूर्ण खनिजों और दूरसंचार के क्षेत्र में सहयोग पर भी संयुक्त आशय घोषणाएँ हुईं। इन समझौतों का मकसद भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी कच्चे माल और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आपसी निर्भरता को मजबूत करना है। इसके साथ ही भारत और जर्मनी ने जैव-अर्थव्यवस्था में अनुसंधान और विकास के लिए भी संयुक्त सहयोग का इरादा जताया,जो सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार माना जा रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार मिला। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और जर्मनी की प्रतिष्ठित चैरिटे यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए,जिससे आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच शोध सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा पर भारत-जर्मनी रोडमैप को लेकर भी चर्चा हुई,जिसमें छात्र विनिमय,संयुक्त डिग्री कार्यक्रम और शोध सहयोग पर जोर दिया गया।
ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे इस दौरे के प्रमुख केंद्र बिंदुओं में रहे। भारत और जर्मनी की फ्लैगशिप ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत 1.24 बिलियन यूरो की नई फंडिंग कमिटमेंट की घोषणा की गई। यह फंडिंग रिन्यूएबल एनर्जी,ग्रीन हाइड्रोजन,पीएम ई-बस सेवा और क्लाइमेट-रेजिलिएंट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्राथमिक प्रोजेक्ट्स को समर्थन देगी। इसके अलावा,दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के लिए भारत-जर्मनी प्लेटफॉर्म के तहत बैटरी स्टोरेज वर्किंग ग्रुप का शुभारंभ भी किया गया।
ग्रीन ऊर्जा के क्षेत्र में निजी कंपनियों के बीच भी महत्वपूर्ण समझौते सामने आए। भारतीय कंपनी एएम ग्रीन और जर्मन कंपनी यूनिपर ग्लोबल कमोडिटीज के बीच ग्रीन अमोनिया के लिए ऑफटेक समझौता हुआ,जिसे भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में,हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की फेयर,एथिकल और सस्टेनेबल भर्ती के लिए ग्लोबल स्किल पार्टनरशिप की फ्रेमवर्क शर्तों पर संयुक्त इरादे की घोषणा की गई। साथ ही,हैदराबाद स्थित नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में रिन्यूएबल एनर्जी में स्किलिंग के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना पर भी सहमति बनी।
संस्कृति,खेल और विरासत के क्षेत्र में भी सहयोग को नया आयाम मिला। गुजरात के लोथल में विकसित किए जा रहे नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के लिए भारत के बंदरगाह,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा जर्मनी के जर्मन मैरीटाइम म्यूज़ियम के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। खेलों में सहयोग के लिए संयुक्त इरादे की घोषणा हुई और हॉकी इंडिया तथा जर्मन हॉकी फेडरेशन के बीच यूथ हॉकी डेवलपमेंट पर समझौता हुआ।
डाक सेवाओं के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। डाक विभाग और ड्यूश पोस्ट एजी के बीच संयुक्त इरादे की घोषणा से लॉजिस्टिक्स और पोस्टल सेवाओं में तकनीकी सहयोग की राह खुलेगी। इसके अलावा,भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी से होकर यात्रा करने पर वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा को लोगों के आवागमन के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।
रणनीतिक और विदेश नीति के स्तर पर दोनों देशों ने ट्रैक 1.5 विदेश नीति और सुरक्षा वार्ता की स्थापना तथा इंडो-पैसिफिक पर बाइलेटरल डायलॉग सिस्टम शुरू करने का फैसला किया। साथ ही,भारत-जर्मनी डिजिटल वार्ता की कार्य योजना 2025-2027 को अपनाया गया,जिससे डिजिटल गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग मजबूत होगा।
अहमदाबाद में जर्मनी के मानद काउंसल के उद्घाटन के साथ चांसलर मर्ज का पहला दिन समाप्त हुआ। कुल मिलाकर,यह दौरा भारत-जर्मनी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़ाकर व्यापक और बहुआयामी सहयोग के नए दौर में ले जाने वाला साबित हुआ है।
