नई दिल्ली,13 जनवरी (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाली दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज और मौजूदा कप्तान एलिसा हीली ने क्रिकेट के सभी अंतर्राष्ट्रीय फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। इस फैसले के साथ ही महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन तय हो गया है। हीली ने स्पष्ट किया है कि वह फरवरी–मार्च में भारत के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज के बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस साल होने वाले महिला टी20 विश्व कप का हिस्सा नहीं होंगी,ताकि टीम भविष्य की तैयारियों पर पूरी तरह फोकस कर सके।
एलिसा हीली का यह फैसला ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों ही मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए हमेशा सबसे बड़ा सम्मान रहा है और भारत के खिलाफ आने वाली सीरीज उनके शानदार अंतर्राष्ट्रीय करियर की आखिरी सीरीज होगी। हीली ने यह भी बताया कि टीम और देश के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है,ताकि युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके।
हालाँकि,संन्यास से पहले एलिसा हीली पूरी जिम्मेदारी के साथ टीम का नेतृत्व करती नजर आएँगी। वह भारत के खिलाफ पर्थ में होने वाली वनडे सीरीज और एक डे-नाइट टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करेंगी। वहीं,उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि महिला टी20 विश्व कप की तैयारियों को देखते हुए वह भारत के खिलाफ टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा नहीं लेंगी। उनका मानना है कि यह समय टीम संयोजन और भविष्य की रणनीति को मजबूत करने का है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने एलिसा हीली को क्रिकेट की ऑल-टाइम ग्रेट खिलाड़ियों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि हीली का योगदान केवल रन बनाने या विकेटकीपिंग तक सीमित नहीं रहा,बल्कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट की संस्कृति,आक्रामक सोच और जीत की आदत को नई पहचान दी। ग्रीनबर्ग ने यह भी कहा कि हीली ने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत विरासत छोड़ी है,जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
एलिसा हीली ने महज 19 साल की उम्र में वर्ष 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने शुरुआती दिनों से ही उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और शानदार विकेटकीपिंग से सबका ध्यान खींचा। समय के साथ वह महिला क्रिकेट की सबसे खतरनाक बल्लेबाजों और बेहतरीन विकेटकीपरों में शुमार हो गईं। उनके खेल में आक्रामकता,निरंतरता और मैच जिताने की क्षमता साफ दिखाई देती थी।
अपने लंबे और सफल करियर के दौरान एलिसा हीली आठ आईसीसी विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीमों का हिस्सा रहीं। इनमें छह महिला टी20 विश्व कप और दो महिला वनडे विश्व कप शामिल हैं। इसके अलावा वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम की भी अहम सदस्य थीं। बड़े टूर्नामेंट्स में उनका प्रदर्शन हमेशा टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ।
मेग लैनिंग के संन्यास के बाद वर्ष 2023 में एलिसा हीली को ऑस्ट्रेलिया की फुल-टाइम कप्तान नियुक्त किया गया था। कप्तान के रूप में भी उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। उनकी कप्तानी की सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड के खिलाफ 16-0 से मल्टी-फॉर्मेट एशेज वाइटवॉश रही,जिसे ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने 2024 महिला टी20 विश्व कप और 2025 महिला वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में भी जगह बनाई।
व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स की बात करें तो एलिसा हीली के नाम विश्व कप फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर दर्ज है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में उनके नाम रिकॉर्ड 126 डिसमिसल दर्ज हैं,जो एक विकेटकीपर के तौर पर अब तक का सर्वोच्च आँकड़ा है। यह रिकॉर्ड उनकी निरंतरता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में हीली ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 162 टी20, 126 वनडे और 11 टेस्ट मैच खेले। इन मैचों में उन्होंने न केवल रन बनाए,बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में टीम को सँभालने की भूमिका भी निभाई। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बिग बैश लीग में सिडनी सिक्सर्स के लिए खेलते हुए 11 सीजन में उन्होंने 3,000 से अधिक रन बनाए और दो बार टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। विमेंस प्रीमियर लीग में वह यूपी वॉरियर्स की कप्तान भी रह चुकी हैं।
एलिसा हीली का संन्यास न केवल ऑस्ट्रेलिया,बल्कि पूरी क्रिकेट दुनिया के लिए एक युग के अंत जैसा है। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी,शानदार विकेटकीपिंग और प्रेरक कप्तानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
