सोना

टैरिफ तनाव के बीच सोना-चाँदी रिकॉर्ड ऊँचाई पर,सुरक्षित निवेश की ओर झुके निवेशक

मुंबई,19 जनवरी (युआईटीवी)- हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चाँदी की कीमतों ने इतिहास रच दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोप के आठ देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है,जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोना और चाँदी खरीदना शुरू कर दिया,जिससे इन दोनों धातुओं की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गईं।

सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना पहली बार 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया। इसी तरह मार्च डिलीवरी वाली चाँदी ने भी नया इतिहास बनाते हुए 3,01,315 रुपये प्रति किलोग्राम का आँकड़ा छू लिया। कारोबार के दौरान हालाँकि,हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला,लेकिन खबर लिखे जाने तक तेजी बरकरार रही। एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपये यानी 1.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,44,955 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था,जबकि एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपये यानी 4.54 प्रतिशत उछलकर 3,00,824 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चाँदी की चमक फीकी पड़ने के बजाय और तेज हो गई। स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.6 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गई,जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर माना जा रहा है। बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली और यह 4,670 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर हुआ। इसी तरह कॉमेक्स पर चाँदी की कीमतें भी मजबूत बनी रहीं और 93 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आईं। हाल ही में कॉमेक्स सिल्वर 94.30 डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक भी पहुँच चुकी है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चाँदी में यह तेजी अचानक नहीं आई है,बल्कि इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान माना जा रहा है,जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाएगा,जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान ने वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। इसके जवाब में यूरोपीय संघ के देशों ने भी अमेरिका को मनाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस टकराव की स्थिति ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है और वे पूँजी को सुरक्षित ठिकानों की ओर ले जा रहे हैं।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक,दुनिया में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता,अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और लगातार बने हुए भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों को मजबूत सहारा दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है या आर्थिक नीति को लेकर सवाल खड़े होते हैं,तब सोना सबसे पसंदीदा सुरक्षित निवेश बनकर उभरता है। चाँदी भी अब सिर्फ कीमती धातु नहीं,बल्कि औद्योगिक माँग के चलते एक मजबूत निवेश विकल्प बनती जा रही है।

बाजार के जानकार यह भी मानते हैं कि अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदें भी सोने और चाँदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। आमतौर पर जब ब्याज दरें घटती हैं,तो बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में सोना ज्यादा आकर्षक हो जाता है,क्योंकि इस पर ब्याज नहीं मिलता,लेकिन इसकी कीमत में तेजी की संभावना बढ़ जाती है। 2025 में अब तक सोने और चाँदी के अच्छे प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा इन धातुओं पर और मजबूत किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार,इस हफ्ते सोने और चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी एक वजह डॉलर इंडेक्स में अस्थिरता है। अगर डॉलर कमजोर होता है,तो सोना और चाँदी आमतौर पर मजबूत होते हैं,क्योंकि ये डॉलर में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड होते हैं। इसके अलावा अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ से जुड़े मामलों पर आने वाला फैसला भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर कोर्ट टैरिफ के पक्ष में कोई सख्त रुख अपनाती है,तो वैश्विक बाजारों में और ज्यादा घबराहट देखने को मिल सकती है।

तकनीकी विश्लेषण की बात करें तो विश्लेषकों का कहना है कि एमसीएक्स पर सोने को 1,41,650 रुपये से 1,40,310 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। वहीं ऊपर की ओर 1,44,150 रुपये से 1,45,670 रुपये के बीच इसमें रेजिस्टेंस देखने को मिल सकती है। अगर सोना इस रेजिस्टेंस को पार कर जाता है,तो आने वाले दिनों में इसमें और तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

चांदी के लिए विशेषज्ञों ने 2,85,810 रुपये से 2,82,170 रुपये प्रति किलो का स्तर सपोर्ट के रूप में बताया है,जबकि 2,94,810 रुपये से 2,96,470 रुपये के बीच रेजिस्टेंस माना जा रहा है। हालाँकि,मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए चाँदी में तेजी का रुझान ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है।

चाँदी की कीमतों को केवल सुरक्षित निवेश की वजह से ही नहीं,बल्कि औद्योगिक माँग से भी समर्थन मिल रहा है। सोलर एनर्जी,इलेक्ट्रिक वाहन,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चाँदी की माँग लगातार बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में चाँदी का उपयोग तकनीकी रूप से बेहद अहम माना जाता है,जिससे लंबे समय में इसकी कीमतों को मजबूती मिलने की संभावना बनी रहती है।

हालाँकि,ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इतनी तेज तेजी के बाद कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार,अगर मुनाफावसूली होती है,तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चाँदी की कीमत 84 डॉलर प्रति औंस तक या घरेलू बाजार में करीब 2,60,000 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ सकती है। इसके बाद एक बार फिर से कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है,क्योंकि बुनियादी माँग और वैश्विक अनिश्चितता का माहौल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

मौजूदा हालात में सोना और चाँदी दोनों ही निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वैश्विक राजनीति,व्यापार युद्ध की आशंकाएँ,ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और औद्योगिक माँग जैसे कारक मिलकर इन कीमती धातुओं को लगातार नई ऊँचाइयों पर पहुँचा रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों और नीति संबंधी फैसलों पर निर्भर करेगी,लेकिन फिलहाल सोना और चाँदी निवेशकों की सुरक्षित पसंद बने हुए हैं।