वाशिंगटन,23 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस संघर्ष का उनके प्रशासन से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह से पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार की विरासत है। ट्रंप के अनुसार,इस युद्ध को खत्म करने में जो मुश्किलें आ रही हैं,उनकी जड़ वही पुरानी समस्याएँ हैं,जिनके चलते पिछले कई महीनों से बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँच पाई है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को बेहद जटिल बताते हुए कहा कि यह ऐसा युद्ध है,जो कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था।
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठकों में हिस्सा लेने के बाद वॉशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध कई स्तरों पर उलझा हुआ है। उनके मुताबिक,इसमें सिर्फ राजनीतिक या सैन्य पहलू ही नहीं हैं,बल्कि जमीन,शहरों,सड़कों,नदियों और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े ऐसे मुद्दे भी हैं,जो किसी भी समझौते को बेहद मुश्किल बना देते हैं। ट्रंप ने कहा कि यही वजह है कि यह तय करना भी कठिन हो गया है कि यह युद्ध आखिर किस बिंदु पर जाकर खत्म होगा।
ट्रंप ने दोहराया कि यह युद्ध उनकी नहीं,बल्कि जो बाइडेन की सरकार का युद्ध है। उन्होंने कहा, “यह ऐसा युद्ध है जो कभी होना ही नहीं चाहिए था। यह बाइडेन का युद्ध है। यह मेरा युद्ध नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई अंतर्राष्ट्रीय विवादों को बहुत कम समय में सुलझाया है,लेकिन यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा संघर्ष अब भी उसी जगह अटका हुआ है,जहाँ वह महीनों पहले था। उनके मुताबिक,बातचीत के मुद्दे नए नहीं हैं और लंबे समय से उन्हीं बातों पर चर्चा हो रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि जमीन और सीमाओं को लेकर विवाद इस युद्ध का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि कौन सा इलाका किसके नियंत्रण में होगा,किन सीमाओं को मान्यता दी जाएगी और भविष्य में सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जाएगी,जैसे सवालों पर सहमति बनाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। ट्रंप के अनुसार,यही वजह है कि बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद किसी ठोस समझौते का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
हालाँकि,ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों ही किसी न किसी तरह के समझौते के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के रवैये में यह संकेत जरूर मिलते हैं कि वे युद्ध को हमेशा के लिए जारी नहीं रखना चाहते,लेकिन इसके बावजूद ट्रंप ने किसी बड़ी सफलता या जल्द समाधान की भविष्यवाणी करने से परहेज किया। उनके मुताबिक,मौजूदा हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की उनसे मिलने आए थे और उन्होंने भी एक समझौते पर पहुँचने की इच्छा जताई थी। ट्रंप के अनुसार,जेलेंस्की जानते हैं कि बातचीत के मापदंड क्या हैं और किन मुद्दों पर सहमति बननी है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है,जिसमें बिल्कुल नए विषयों पर चर्चा हो रही हो,बल्कि वही मुद्दे हैं,जिन पर छह या सात महीनों से लगातार बातचीत चल रही है। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति पुतिन एक समझौता करना चाहेंगे। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की भी एक समझौता करना चाहेंगे।”
यूक्रेन की मौजूदा स्थिति को लेकर ट्रंप ने गहरी चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि खासकर सर्दियों के मौसम में यूक्रेन के हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। कई इलाकों में लोग कड़ाके की ठंड में बिना हीटर और बुनियादी सुविधाओं के रहने को मजबूर हैं। ट्रंप के अनुसार,यह इंसानों के लिए बेहद कठोर परिस्थितियाँ हैं और लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहना मानवीय संकट को और गहरा कर सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए ट्रंप ने ग्रीनलैंड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ग्रीनलैंड को लेकर किसी ढाँचे वाले समझौते पर काम कर रही है और अगले दो हफ्तों के भीतर स्थिति साफ हो सकती है। ट्रंप ने यह संकेत दिया कि इस दिशा में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और सभी पक्ष किसी अच्छे नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने इस मौके पर अमेरिका की सैन्य ताकत का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना और अत्याधुनिक हथियार हैं।
वेनेजुएला के संदर्भ में ट्रंप ने वहाँ के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि वहाँ से बड़ी मात्रा में तेल अमेरिका पहुँच रहा है। उनके अनुसार,इससे दोनों देशों को फायदा होगा। ट्रंप ने कहा कि इससे अमेरिका और अधिक समृद्ध होगा और वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग से दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ आ सकता है।
ईरान को लेकर ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त नजर आया,हालाँकि उन्होंने टकराव से बचने की इच्छा भी जताई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को लेकर बड़ी सैन्य तैयारियाँ कर रखी हैं,लेकिन वे सीधे टकराव की स्थिति नहीं चाहते। उन्होंने यह दावा भी किया कि उन्होंने बड़े पैमाने पर होने वाली फाँसी को रुकवाने में भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही ट्रंप ने पहले हुए सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।
अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद संभावित भूमिका पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह शांति प्रयासों में आगे भी शामिल रह सकते हैं। उन्होंने शांति बोर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो उन्हें इसमें शामिल होने का अधिकार है। ट्रंप के मुताबिक,शांति बोर्ड के जरिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम किया जा सकता है और इसमें काफी संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक शांति के लिए ऐसे मंचों की भूमिका भविष्य में और अहम हो सकती है।
घरेलू नीति के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वे घर खरीदने के लिए रिटायरमेंट फंड से पैसे निकालने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि रिटायरमेंट फंड फिलहाल अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ट्रंप के अनुसार,दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के लिए इन फंड्स का संरक्षण जरूरी है।
ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि वे यूक्रेन-रूस युद्ध की जिम्मेदारी से खुद को अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और इसे पूर्व प्रशासन की नीतियों का नतीजा बता रहे हैं। साथ ही,उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि भले ही दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार दिखें,लेकिन जमीनी हकीकत और जटिल मुद्दों के चलते इस युद्ध का अंत अभी भी आसान नहीं दिखता।
