झारखंड शहरी निकाय चुनाव परिणाम (तस्वीर क्रेडिट@airnowindia)

झारखंड शहरी निकाय चुनाव परिणाम: निर्दलीयों का दबदबा,भाजपा और झामुमो के बीच कड़ा मुकाबला

राँची,28 फरवरी (युआईटीवी)- झारखंड के 48 शहरी निकायों में संपन्न हुए चुनावों के 47 परिणाम घोषित होने के साथ ही राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। घोषित नतीजों के अनुसार इस बार मुकाबला बहुकोणीय रहा और मतदाताओं ने परंपरागत राजनीतिक समीकरणों से इतर स्थानीय मुद्दों,प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और जमीनी सक्रियता को प्राथमिकता दी। परिणामों में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और कई स्थानों पर जीत हासिल की।

अब तक घोषित परिणामों के मुताबिक भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने 13 नगर निकायों में जीत दर्ज की है,जबकि झामुमो समर्थित उम्मीदवार 11 निकायों में विजयी रहे हैं। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी तीन स्थानों पर जीतने में सफल रहे हैं। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने सर्वाधिक 18 निकायों पर कब्जा जमाकर यह संकेत दिया है कि शहरी मतदाता स्थानीय नेतृत्व को तरजीह देने के मूड में हैं। इसके अलावा एक सीट सीपीआई(एमएल) समर्थित प्रत्याशी के खाते में गई है।

राज्य के नौ नगर निगमों में से आठ में मेयर पद के परिणाम घोषित हो चुके हैं। राँची नगर निगम में भाजपा समर्थित रोशनी खलखो ने कांग्रेस समर्थित रमा खलखो को पराजित किया। यह मुकाबला काफी चर्चित रहा और भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाया था। मेदिनीनगर में भाजपा समर्थित अरुणा शंकर ने कांग्रेस समर्थित नम्रता त्रिपाठी को हराकर पार्टी के लिए एक और अहम जीत दर्ज की।

हजारीबाग नगर निगम में स्वतंत्र प्रत्याशी अरविंद राणा ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। यह परिणाम इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत जनसंपर्क और व्यक्तिगत विश्वसनीयता दलगत पहचान पर भारी पड़ सकती है। देवघर में झामुमो समर्थित रवि राउत विजयी रहे,जबकि गिरिडीह में झामुमो समर्थित प्रमिला मेहरा ने जीत हासिल की। इन परिणामों ने झामुमो को शहरी क्षेत्रों में भी मजबूती का संदेश दिया है।

आदित्यपुर में भाजपा समर्थित संजय सरदार ने बाजी मारी,जबकि मानगो नगर निगम में कांग्रेस समर्थित सुधा गुप्ता विजयी रहीं। धनबाद नगर निगम में स्वतंत्र प्रत्याशी संजीव सिंह झामुमो समर्थित चंद्रशेखर अग्रवाल पर बढ़त बनाए हुए हैं और अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा की जा रही है। यदि यह सीट भी निर्दलीय के खाते में जाती है,तो यह बड़ी पार्टियों के लिए एक और झटका माना जाएगा।

नगर निगमों के अलावा 39 छोटे शहरी निकायों,जिनमें नगर पंचायत और नगर परिषद शामिल हैं, के परिणाम भी सामने आ चुके हैं। इन 39 निकायों में 17 पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे, 10 पर भाजपा समर्थित, 9 पर झामुमो समर्थित, 2 पर कांग्रेस समर्थित और 1 पर सीपीआई(एमएल) समर्थित प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि छोटे शहरी क्षेत्रों में भी मतदाताओं ने स्थानीय समीकरणों को अधिक महत्व दिया।

नगर पंचायत अध्यक्ष पद के तहत कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। हुसैनाबाद से अजय भारती,हरिहरगंज से कुमारी शीला चौधरी,छत्तरपुर से अरविंद गुप्ता,श्री बंशीधरनगर से साधना देवी,मझिआंव से सुमित्रा देवी,कोडरमा से साजिद हुसैन लल्लू,बासुकीनाथ से वीणा देवी और जामताड़ा से आशा गुप्ता निर्दलीय के रूप में निर्वाचित हुए।

भाजपा समर्थित विजेताओं में लातेहार से महेश सिंह,डोमचांच से उमेश वर्मा,बड़कीसरैया से शोभा देवी,महागामा से प्रबोध सोरेन,बरहरवा से अर्पिता दास और खूंटी से रानी टुटी शामिल हैं। झामुमो समर्थित प्रत्याशियों में राजमहल से केताबुद्दीन,बुंडू से जितेंद्र उरांव,सरायकेला से मनोज कुमार चौधरी और चाकुलिया से सोमवारी सोरेन विजयी रहे। धनवार से विनय कुमार सांथालिया सीपीआई(एमएल) समर्थित प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए।

नगर परिषद अध्यक्ष पद के परिणामों में गढ़वा से आशीष सोनी,विश्रामपुर से गीता देवी, चतरा से अताउर रहमान,झुमरीतिलैया से रमेश हर्षधर,गोड्डा से सुशील रमानी,पाकुड़ से शबरी पाल,चिरकुंडा से सुनीता देवी,सिमडेगा से ओलिवर लकड़ा और कपाली से परवेज आलम निर्दलीय श्रेणी में जीते। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों में मधुपुर से मीति कुमारी,मिहिजाम से जयश्री देवी,लोहरदगा से अनिल उरांव और गुमला से शकुंतला उरांव विजयी रहीं।

झामुमो समर्थित प्रत्याशियों में साहिबगंज से रामनाथ पासवान,दुमका से अभिषेक चौरसिया, चक्रधरपुर से शनि उरांव,चाईबासा से नितिन प्रकाश और जुगसलाई से नौशान खान ने जीत दर्ज की। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों में फुसरो से निर्मला देवी और रामगढ़ से कुसुमलता कुमारी निर्वाचित हुईं।

इन परिणामों से स्पष्ट है कि झारखंड के शहरी मतदाताओं ने इस बार संतुलित जनादेश दिया है। भाजपा और झामुमो के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला,लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत ने संकेत दिया है कि स्थानीय नेतृत्व और विकास के मुद्दे दलगत राजनीति से ऊपर रहे। आने वाले समय में इन शहरी निकायों का संचालन और स्थानीय विकास कार्य राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।