नई दिल्ली,15 अप्रैल (युआईटीवी)- बैडमिंटन की दुनिया से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। डेनमार्क के दिग्गज खिलाड़ी और दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता विक्टर एक्सेलसन ने 32 साल की उम्र में प्रोफेशनल बैडमिंटन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। एक्सेलसन का यह फैसला उनके प्रशंसकों और खेल जगत के लिए बेहद भावुक करने वाला है,क्योंकि वह अभी भी शानदार फॉर्म में नजर आ रहे थे। हालाँकि,लगातार पीठ की गंभीर समस्या ने उन्हें यह कठिन निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया।
एक्सेलसन ने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए बताया कि वह पिछले काफी समय से पीठ की समस्या से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि सर्जरी के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और बार-बार होने वाले दर्द के कारण वह न तो सही तरीके से ट्रेनिंग कर पा रहे थे और न ही प्रतिस्पर्धा के उच्च स्तर पर खेल पा रहे थे। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर को विराम देने का फैसला किया।
उन्होंने बैडमिंटन यूरोप से बातचीत में कहा कि यह निर्णय लेना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था,लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गई थीं कि उन्हें अपने शरीर की सुननी पड़ी। एक्सेलसन ने बताया कि पिछले साल अप्रैल में उनकी पीठ की सर्जरी हुई थी,जिसके बाद उन्होंने लंबी पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरते हुए वापसी की कोशिश की। हालाँकि,अक्टूबर में उन्हें फिर से चोट का झटका लगा,जिसने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया। इसके बाद से वह लगातार दर्द में थे और किसी भी बड़े टूर्नामेंट में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के साथ नहीं उतर पा रहे थे।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में एक्सेलसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंडिया ओपन और जर्मन ओपन जैसे बड़े खिताब अपने नाम किए थे। इन जीतों ने यह संकेत दिया था कि वह अब भी दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं,लेकिन इन टूर्नामेंट्स के बाद उनकी चोट ने उन्हें पूरी तरह से खेल से दूर कर दिया। डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि वह खेल जारी रखते हैं, तो उनकी समस्या और गंभीर हो सकती है और उन्हें एक और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
विक्टर एक्सेलसन का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 2010 में प्रोफेशनल बैडमिंटन में कदम रखा और जल्द ही अपनी प्रतिभा के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बना ली। वह उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शामिल हैं,जिन्होंने वर्ल्ड टूर सुपर 1000 स्तर या उससे ऊपर के लगभग सभी बड़े खिताब जीते हैं। उनकी तकनीक,फिटनेस और मानसिक मजबूती उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती थी।
ओलंपिक खेलों में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। इसके अलावा रियो ओलंपिक 2016 में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था। इस तरह वह ओलंपिक इतिहास में सबसे सफल पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक बन गए।
विश्व चैंपियनशिप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 2017 और 2022 में खिताब जीतकर खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में स्थापित किया। खास बात यह है कि वह विश्व चैंपियन बनने वाले केवल दूसरे गैर-एशियाई खिलाड़ी हैं,जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा उन्होंने तीन बार यूरोपीय चैंपियनशिप का खिताब जीता और थॉमस कप में भी अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
एक्सेलसन ने अपने करियर के दौरान जिस तरह का खेल दिखाया,उसने बैडमिंटन को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाने में योगदान दिया। उनकी फिटनेस,अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उनके रिटायरमेंट से निश्चित रूप से बैडमिंटन जगत में एक बड़ी कमी महसूस की जाएगी।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी है कि यदि दर्द जारी रहता है,तो उन्हें एक और सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। हालाँकि,ऐसी स्थिति में भविष्य में और जटिलताएँ बढ़ सकती हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए संन्यास लेने का फैसला किया।
विक्टर एक्सेलसन का संन्यास बैडमिंटन के एक सुनहरे युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने करियर में जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं,वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मानक स्थापित करती हैं। खेल प्रेमियों के लिए यह एक भावुक पल जरूर है,लेकिन उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
