संयुक्त राष्ट्र,11 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने दावा किया है कि 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य हमलों में अब तक ईरान में 1,300 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इन हमलों में करीब 10,000 नागरिक स्थलों को भारी नुकसान पहुँचा है। इरावानी ने यह आरोप संयुक्त राष्ट्र में दिए गए अपने बयान में लगाया और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
इरावानी के अनुसार इन सैन्य हमलों में बड़ी संख्या में आवासीय इमारतें और नागरिक सुविधाएँ नष्ट हुई हैं। उन्होंने कहा कि गिरने वाली इमारतों में 7,943 आवासीय मकान, 1,617 वाणिज्यिक केंद्र, 32 चिकित्सा और औषधीय सुविधाएँ,65 स्कूल और शैक्षिक संस्थान तथा 13 रेड क्रेसेंट भवन शामिल हैं। इसके अलावा कई ऊर्जा आपूर्ति केंद्र भी हमलों में प्रभावित हुए हैं। ईरानी राजदूत का कहना है कि इन हमलों में घनी आबादी वाले क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया,जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इज़रायल जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बना रहे हैं। इरावानी ने कहा कि इन हमलों में अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार सैन्य कार्रवाई के दौरान जिस तरह से आवासीय इलाकों,अस्पतालों और शिक्षा संस्थानों पर हमले किए जा रहे हैं,वह अंतर्राष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को अंजाम देते समय किसी तरह का संयम नहीं बरता जा रहा और लगातार हमले जारी हैं।
इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान कई घटनाओं का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि शनिवार रात तेहरान और अन्य शहरों में ईंधन भंडारण सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए। इन हमलों के कारण खतरनाक और विषैले प्रदूषक वातावरण में फैल गए,जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों से वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है।
ईरान ने इस मामले में ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार विस्फोटों के बाद वातावरण में जहरीले तत्व फैल गए,जिससे बच्चों, महिलाओं,बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम काफी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमलों से केवल तत्काल नुकसान ही नहीं होता,बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
इरावानी ने कहा कि इन हमलों के कारण पर्यावरणीय दायित्वों का भी उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कई समझौते किए गए हैं,जिनमें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन और जैव विविधता कन्वेंशन शामिल हैं। ईरान का कहना है कि सैन्य हमलों से पैदा हुआ प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति इन अंतर्राष्ट्रीय समझौतों की भावना के खिलाफ है।
ईरान ने तेहरान के मेहराबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर हुए हमले का भी जिक्र किया। इरावानी के अनुसार इस हमले में कई नागरिक विमान और हवाई अड्डे की सुविधाएँ नष्ट हो गईं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। इससे हवाई यातायात और नागरिक सेवाओं पर भी बड़ा असर पड़ा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हमले नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
इसके अलावा उन्होंने हर्मोज़गन प्रांत के केशम द्वीप पर स्थित एक जल शोधन संयंत्र पर हमले का भी उल्लेख किया। इस संयंत्र के क्षतिग्रस्त होने से करीब 30 गाँवों में पीने के पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार इस हमले से हजारों लोगों को साफ पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है,जिससे मानवीय संकट की स्थिति बन सकती है।
ईरान ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रविवार को इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में स्थित रामाडा होटल पर जानबूझकर हमला किया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में चार ईरानी कूटनीतिज्ञों की मौत हो गई। इरावानी ने इस घटना को एक गंभीर आतंकवादी कृत्य और युद्ध अपराध बताया। उन्होंने कहा कि किसी अन्य संप्रभु देश के क्षेत्र में कूटनीतिज्ञों की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई की माँग की है। इरावानी ने कहा कि ईरानी जनता के खिलाफ चल रहे इस “खूनी युद्ध” को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय को हस्तक्षेप करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
अपने बयान के अंत में ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि उनका देश अपने लोगों,अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी प्रकार के बाहरी हमलों के सामने झुकने वाला नहीं है और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान के इन आरोपों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले पर वैश्विक शक्तियाँ और संयुक्त राष्ट्र किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
