टोक्यो,14 मार्च (युआईटीवी)- पूर्वी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। शनिवार को उत्तर कोरिया की ओर से समुद्र की दिशा में एक प्रोजेक्टाइल दागे जाने की खबर सामने आई है। उत्तर कोरिया और जापान दोनों देशों ने इस प्रक्षेपण की पुष्टि की है और जापान के अधिकारियों का मानना है कि यह संभवतः एक बैलिस्टिक मिसाइल थी। यह लॉन्च ऐसे समय पर हुआ है,जब क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है,जिसके कारण पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है।
दक्षिण कोरिया की सेना ने पत्रकारों को भेजे एक संक्षिप्त संदेश में बताया कि उत्तर कोरिया की ओर से एक प्रोजेक्टाइल पूर्वी तट के पास स्थित समुद्री क्षेत्र की दिशा में दागा गया। हालाँकि,दक्षिण कोरियाई सेना ने तत्काल इस प्रक्षेपण के प्रकार,दूरी या तकनीकी क्षमता के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की। अधिकारियों ने कहा कि वे इस घटना की विस्तृत जाँच कर रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
जापान के कोस्ट गार्ड ने भी इस प्रक्षेपण को लेकर जानकारी साझा की। कोस्ट गार्ड के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रोजेक्टाइल समुद्र में ही गिर गया। बाद में जापान के रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर कोस्ट गार्ड ने बताया कि स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग 1:30 बजे उत्तर कोरिया से एक बैलिस्टिक मिसाइल जैसी वस्तु लॉन्च की गई थी। अधिकारियों का अनुमान है कि यह मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर समुद्र में जाकर गिरी।
इस घटना के बाद जापान सरकार ने तुरंत स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संक्षिप्त संदेश जारी कर बताया कि यह संभवतः एक बैलिस्टिक मिसाइल थी। साथ ही सरकार ने संबंधित एजेंसियों और प्रतिक्रिया टीमों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि इस प्रक्षेपण से जुड़ी हर जानकारी का विश्लेषण किया जाए और जनता को समय पर सही सूचना उपलब्ध कराई जाए।
जापान सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को विमानों,जहाजों और अन्य महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयारी बनाए रखना आवश्यक है। हालाँकि,फिलहाल इस घटना से किसी नुकसान या खतरे की कोई खबर सामने नहीं आई है,फिर भी क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क बनी हुई हैं।
यह प्रक्षेपण ऐसे समय में हुआ है,जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ चल रहा है। यह अभ्यास लगभग 11 दिनों तक चलता है और इसमें दोनों देशों की सेनाएँ संयुक्त रूप से सैन्य तैयारियों और रणनीतिक समन्वय का अभ्यास करती हैं। इस साल भी इस अभ्यास में कई तरह के सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यास शामिल किए गए हैं।
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का कहना है कि ऐसे अभ्यास वास्तव में उसके खिलाफ हमले की तैयारी का हिस्सा होते हैं। उत्तर कोरिया ने पहले भी कई बार इन अभ्यासों के दौरान या उसके आसपास मिसाइल परीक्षण किए हैं,जिन्हें वह अपनी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन बताता है।
दूसरी ओर दक्षिण कोरिया और अमेरिका लगातार यह कहते रहे हैं कि उनके संयुक्त सैन्य अभ्यास पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति के हैं और उनका उद्देश्य केवल संभावित खतरों के खिलाफ तैयार रहना है। दोनों देशों का कहना है कि इन अभ्यासों का मकसद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और सैन्य सहयोग को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा इस तरह के मिसाइल परीक्षण अक्सर राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने के लिए किए जाते हैं। जब भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं,तब प्योंगयांग की ओर से ऐसे कदम देखने को मिलते हैं। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ जाता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ती है।
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने कई तरह की मिसाइलों का परीक्षण किया है,जिनमें लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं। इन परीक्षणों को लेकर अमेरिका,जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों ने चिंता जताई है और संयुक्त राष्ट्र स्तर पर भी इस पर चर्चा होती रही है।
फिलहाल शनिवार को किए गए इस प्रक्षेपण के बारे में अधिक तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसके डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह वास्तव में किस प्रकार की मिसाइल थी और इसकी संभावित मारक क्षमता क्या हो सकती है।
यह घटना पूर्वी एशिया में पहले से मौजूद सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है। अमेरिका,जापान और दक्षिण कोरिया इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं,जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर ध्यान दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मिसाइल परीक्षण क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।
