एयर इंडिया

मध्य पूर्व तनाव का असर: एयर इंडिया ने यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए बढ़ाईं उड़ानें, यात्रियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली,17 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक हवाई यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया ने यात्रियों की बढ़ती माँग को देखते हुए यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए अतिरिक्त उड़ानों के संचालन की घोषणा की है। एयरलाइन के इस कदम को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में आ रही बाधाओं के बीच एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।

एयर इंडिया ने मंगलवार को बताया कि वह 19 मार्च से 28 मार्च के बीच कुल 36 अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करेगी। ये उड़ानें दिल्ली और मुंबई को दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ेंगी,जिनमें लंदन (हीथ्रो),टोरंटो,फ्रैंकफर्ट और ज्यूरिख शामिल हैं। कंपनी के अनुसार,इस निर्णय से इन मार्गों पर 10,000 से अधिक अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी,जिससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और बढ़ती माँग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

एयरलाइन के अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है,जब पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्गों पर दबाव बढ़ गया है। मध्य पूर्व में जारी हालात के चलते कई उड़ानों को वैकल्पिक और लंबे मार्गों से संचालित करना पड़ रहा है,जिससे यात्रा समय और परिचालन लागत दोनों बढ़ रहे हैं। इसके चलते कई एयरलाइंस की क्षमता प्रभावित हुई है और यात्रियों को टिकट मिलने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त उड़ानें विशेष रूप से दिल्ली-लंदन (हीथ्रो),मुंबई-लंदन (हीथ्रो),दिल्ली-फ्रैंकफर्ट, दिल्ली-ज्यूरिख और दिल्ली-टोरंटो मार्गों पर संचालित की जाएँगी। ये सभी मार्ग भारतीय यात्रियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं और वर्तमान परिस्थितियों में इनकी माँग और भी बढ़ गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी एयर इंडिया ने 10 मार्च से 18 मार्च के बीच 78 अतिरिक्त उड़ानों के संचालन का ऐलान किया था। लगातार बढ़ती माँग को देखते हुए एयरलाइन ने अपनी क्षमता में और वृद्धि करने का फैसला किया है। कंपनी ने बताया कि इन अतिरिक्त उड़ानों के लिए बुकिंग उसकी आधिकारिक वेबसाइट,मोबाइल ऐप और अधिकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से शुरू की जा रही है,ताकि अधिक से अधिक यात्रियों तक यह सुविधा पहुंच सके।

एयर इंडिया के अनुसार,यह कदम केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है। कंपनी का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और सीमित अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी के बीच यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।

इस बीच,नागर विमानन महानिदेशालय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने भी एयर इंडिया को राहत देते हुए यूरोप,अमेरिका और कनाडा के लिए लंबी दूरी की उड़ानों के शुल्क नियमों में अस्थायी छूट प्रदान की है। यह छूट इसलिए दी गई है क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते कई हवाई क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए गए हैं,जिसके कारण एयरलाइंस को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ रही है,बल्कि उड़ानों के समय में भी वृद्धि हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों में एयरलाइंस के लिए परिचालन को सुचारू बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। लंबे मार्गों के कारण लागत बढ़ने के साथ-साथ समय-सारिणी भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में एयर इंडिया द्वारा अतिरिक्त उड़ानों का संचालन यात्रियों के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

दूसरी ओर,देश की प्रमुख लो-कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो ने भी पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी सेवाओं को लेकर अहम घोषणा की है। इंडिगो ने बताया कि वह 16 मार्च से 28 मार्च के बीच पश्चिम एशिया से आने-जाने वाली 252 साप्ताहिक उड़ानों का संचालन करेगी। इनमें सऊदी अरब के लिए लगभग 126 उड़ानें,संयुक्त अरब अमीरात के लिए 98 उड़ानें और ओमान के लिए 28 उड़ानें शामिल हैं।

हालाँकि,इंडिगो ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्षेत्र के कुछ गंतव्यों के लिए उसकी सेवाएँ अस्थायी रूप से निलंबित रहेंगी। इनमें दोहा,कुवैत,बहरीन,दम्माम,फुजैरा,रस अल खैमाह और शारजाह जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। एयरलाइन के अनुसार,यह निर्णय नेटवर्क समायोजन के तहत लिया गया है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम आवश्यक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल ऊर्जा बाजार या समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक हवाई यात्रा पर भी पड़ रहा है। हवाई मार्गों में बदलाव,उड़ानों की संख्या में कमी और टिकटों की बढ़ती कीमतें इस बात का संकेत हैं कि स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है।

ऐसे में एयर इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल यात्रियों को राहत देगा,बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय एयरलाइंस बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से अपने परिचालन में बदलाव करने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में यदि क्षेत्रीय हालात में सुधार होता है,तो उड़ानों की स्थिति भी सामान्य हो सकती है,लेकिन फिलहाल एयरलाइंस और यात्रियों दोनों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय बना हुआ है।