मुंबई,18 मार्च (युआईटीवी)- अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हाल ही में हुए भीषण हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इन हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान चली गई,जिसके बाद न केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है,बल्कि अफगानिस्तान के प्रमुख क्रिकेटरों ने भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। खास तौर पर नवीन-उल-हक ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी तुलना इजरायल से कर दी,जिससे यह मुद्दा और भी ज्यादा संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गरमा गया है।
नवीन-उल-हक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि ईरान पर इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों और उनके अपने देश की राजधानी काबुल पर हुए हमलों में क्या अंतर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इजरायल और पाकिस्तान शासन में अंतर खोजना मुश्किल है।” उनका यह बयान न केवल अफगानिस्तान में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
नवीन के अलावा,अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान राशिद खान ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की है। राशिद खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिकों के खिलाफ इस तरह के हमले बेहद दुखद और चिंताजनक हैं। उन्होंने लिखा कि “पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण नागरिकों के हताहत होने की खबर से मैं गहराई से दुखी हूँ। नागरिक घरों,स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाना,चाहे जानबूझकर हो या गलती से,युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।”
राशिद खान ने आगे कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में इस प्रकार की घटनाएँ और भी अधिक पीड़ा देने वाली हैं। उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि इससे केवल नफरत और विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे इस घटना की निष्पक्ष जाँच करें और दोषियों को सजा दिलाएँ।
इसी क्रम में अफगानिस्तान के एक और प्रमुख खिलाड़ी रहमानुल्लाह गुरबाज ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया। गुरबाज ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर दुनिया कब तक ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साधे रहेगी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “रमजान के दौरान अफगानिस्तान में एक अस्पताल पर बमबारी की गई। अंतर्राष्ट्रीय कानून अब कहाँ है? मानवता कहाँ है? कितने निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद दुनिया बोलेगी?”
इन क्रिकेटरों के बयानों के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उनका समर्थन किया है। कई प्रशंसकों ने पाकिस्तान की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा करार दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे तनाव को उजागर कर दिया है।
दरअसल,दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं,लेकिन तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद यह तनाव और बढ़ गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूच विद्रोही अफगानिस्तान की जमीन से संचालित होते हैं और पाकिस्तान के भीतर हमले करते हैं। इसके जवाब में अफगान तालिबान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है।
कुछ महीनों पहले भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे,जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। उन हमलों में अफगानिस्तान के तीन घरेलू क्रिकेटरों की भी मौत हो गई थी,जिससे खेल जगत में गहरा आक्रोश पैदा हुआ था। इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान में आयोजित होने वाली ट्राई-सीरीज से अपनी टीम को वापस बुला लिया था।
काबुल में हालिया हमलों के बाद यह मुद्दा केवल सैन्य या राजनीतिक नहीं रह गया है,बल्कि यह मानवीय संकट का रूप ले चुका है। बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और बुनियादी ढाँचे को हुए नुकसान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालाँकि,अभी तक इस घटना की पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है और विभिन्न पक्षों के दावे-प्रत्यादावे जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इससे न केवल दोनों देशों के बीच संबंध और बिगड़ सकते हैं,बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे समय में जब दुनिया पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रही है,काबुल जैसी घटनाएँ वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय बन रही हैं।
अफगान क्रिकेटरों द्वारा इस मुद्दे पर खुलकर बोलना यह दर्शाता है कि यह मामला सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं है,बल्कि आम लोगों और समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है। खेल जगत के इन सितारों ने अपने मंच का उपयोग करते हुए दुनिया का ध्यान इस त्रासदी की ओर खींचने की कोशिश की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस घटना पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में किसी निष्पक्ष जाँच के जरिए सच सामने आ पाएगा। फिलहाल,काबुल के लोग इस त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रहे हैं और दुनिया उनकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।
