एच-2बी वीजा

अमेरिका ने वीजा बॉन्ड नीति का दायरा बढ़ाया,50 देशों के नागरिकों को देना होगा 15 हजार डॉलर

वाशिंगटन,19 मार्च (युआईटीवी)- वैश्विक आव्रजन नीतियों को सख्त करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने वीजा बॉन्ड कार्यक्रम का विस्तार कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि 2 अप्रैल से इस नीति को बढ़ाकर कुल 50 देशों पर लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत बिजनेस और पर्यटन वीजा,यानी बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी नागरिकों को 15 हजार डॉलर का बॉन्ड जमा करना होगा,जिसे वीजा नियमों का पालन करने पर वापस कर दिया जाएगा।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,यह बॉन्ड एक तरह की वित्तीय गारंटी है,जिसका मुख्य उद्देश्य उन मामलों को कम करना है,जिनमें विदेशी नागरिक वीजा की निर्धारित अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में ठहर जाते हैं। ओवरस्टे की समस्या लंबे समय से अमेरिका के लिए चिंता का विषय रही है और इसी को नियंत्रित करने के लिए यह नीति लागू की गई है। अधिकारियों का मानना है कि जब लोगों से पहले ही एक बड़ी राशि जमा करवाई जाएगी,तो वे नियमों का पालन करने के प्रति अधिक जिम्मेदार होंगे।

इस कार्यक्रम के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार,अब तक लगभग एक हजार विदेशी नागरिकों को इस योजना के तहत वीजा जारी किया गया है,जिनमें से 97 प्रतिशत लोग समय पर अपने देश लौट गए। इसके विपरीत,पिछले प्रशासन के अंतिम वर्ष में उन्हीं देशों के करीब 44 हजार से अधिक लोग वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुके रहे थे। इन आँकड़ों को देखते हुए अमेरिकी सरकार ने इस योजना के विस्तार का फैसला किया है।

नई सूची में 12 देशों को जोड़ा गया है,जिनमें कंबोडिया,इथियोपिया,जॉर्जिया,ग्रेनेडा,लेसोथो, मॉरीशस,मंगोलिया,मोज़ाम्बिक,निकारागुआ,पापुआ न्यू गिनी,सेशेल्स और ट्यूनीशिया शामिल हैं। ये देश अब उन 38 देशों की सूची में शामिल हो जाएँगे,जहाँ यह नियम पहले से लागू है। पहले से शामिल देशों में अल्जीरिया,अंगोला,बांग्लादेश,भूटान,नेपाल,नाइजीरिया, सेनेगल,तंजानिया,युगांडा,जाम्बिया और जिम्बाब्वे जैसे देश शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इस कार्यक्रम का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए ‘इमिग्रेशन जोखिम कारकों’ का आकलन किया जाएगा,जिसमें यह देखा जाएगा कि किन देशों के नागरिक वीजा नियमों का कितना पालन करते हैं और ओवरस्टे के मामले कितने हैं। जिन देशों में ओवरस्टे की दर अधिक होगी,उन्हें इस सूची में शामिल किया जा सकता है।

इस नीति का एक आर्थिक पहलू भी सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक,अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे किसी व्यक्ति को देश से बाहर निकालने में औसतन 18 हजार डॉलर का खर्च आता है। ऐसे में यदि वीजा बॉन्ड के जरिए ओवरस्टे को कम किया जाता है,तो इससे अमेरिकी करदाताओं के पैसे की बड़ी बचत हो सकती है। अनुमान है कि इस कार्यक्रम के कारण हर साल करीब 800 मिलियन डॉलर तक की बचत हो रही है।

वीजा बॉन्ड नियम खासतौर पर बी1 और बी2 वीजा पर लागू होता है,जो अमेरिका के सबसे ज्यादा जारी किए जाने वाले नॉन-इमिग्रेंट वीजा हैं। इनका उपयोग व्यापारिक यात्राओं,पर्यटन और पारिवारिक मुलाकातों के लिए किया जाता है। ऐसे में इस नीति का प्रभाव उन लोगों पर सीधे तौर पर पड़ेगा,जो अल्पकालिक यात्रा के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की आव्रजन नीति को और सख्त बनाने की दिशा में उठाया गया है। इससे जहाँ एक ओर ओवरस्टे की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा,वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल वही लोग अमेरिका में प्रवेश करें, जो नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हलाँकि,कुछ आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि जमा करना कई देशों के नागरिकों के लिए कठिन हो सकता है,जिससे उनके लिए अमेरिका की यात्रा करना मुश्किल हो जाएगा।

इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन इस नीति को प्रभावी और जरूरी मान रहा है। उनका कहना है कि यह केवल सुरक्षा और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने का उपाय है,न कि किसी विशेष देश या नागरिकों के खिलाफ भेदभाव। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वीजा की सभी शर्तों का पालन करने वाले लोगों को उनका बॉन्ड पूरी तरह वापस कर दिया जाएगा।

वीजा बॉन्ड कार्यक्रम का विस्तार अमेरिका की आव्रजन नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल ओवरस्टे की समस्या को कम करने का प्रयास है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिका अब अपने वीजा नियमों को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इस नीति का वैश्विक यात्रा और आव्रजन पर क्या असर पड़ेगा,यह देखना दिलचस्प होगा।