नई दिल्ली, 4 जून (युआईटीवी)- देश की प्रमुख स्वर्ण आभूषण निर्यातक कंपनियों में शामिल राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा जारी अंतरिम आदेश के बाद कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। हालाँकि,कंपनी के प्रमुख राजेश मेहता ने नियामक संस्था के निष्कर्षों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि आदेश में लगाए गए आरोप और निकाले गए निष्कर्ष सही नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी सेबी की टिप्पणियों का गहन अध्ययन कर रही है और जल्द ही इस मामले में विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।
एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में राजेश मेहता ने कहा कि यह केवल एक अंतरिम आदेश है और इसमें जिन तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए हैं,वे वास्तविक स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करते। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी बिंदुओं की समीक्षा कर रही है और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष नियामक के समक्ष रखेगी। मेहता का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार किया जाना आवश्यक है।
दरअसल,हाल ही में सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इस आदेश में कंपनी पर वित्तीय अनियमितताओं,कॉरपोरेट प्रशासन में गंभीर कमियों तथा आय को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। बाजार नियामक ने अपनी प्रारंभिक जाँच के आधार पर कई गंभीर टिप्पणियाँ की हैं,जिनके बाद निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ गई है।
सेबी के आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स ने भी शेयर बाजार को भेजी गई एक आधिकारिक सूचना में अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कहा कि उसके द्वारा घोषित राजस्व और आय के आँकड़े पूरी तरह सही हैं तथा किसी भी प्रकार से उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत नहीं किया गया है। कंपनी का मानना है कि इस पूरे मामले में कुछ बिंदुओं पर सेबी और कंपनी के बीच संवाद की कमी या गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है,जिसे दस्तावेजी प्रमाणों के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि वह सेबी को सभी आवश्यक और प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है। कंपनी को विश्वास है कि जब सभी तथ्यों और प्रमाणों का समुचित परीक्षण किया जाएगा,तब स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और नियामक संस्था सही निष्कर्ष तक पहुँचेगी। कंपनी ने यह भी कहा कि वह जाँच प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रही है और सभी आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
सेबी के अंतरिम आदेश में आरोप लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2021 से लेकर वित्त वर्ष 2025 तक कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये की आय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नियामक के अनुसार यह कथित अनियमितता कंपनी की एक विदेशी सहायक इकाई के माध्यम से की गई,जिसके वित्तीय विवरणों का पर्याप्त सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया था। सेबी का कहना है कि इस प्रक्रिया ने कंपनी के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इसके अलावा बाजार नियामक ने राजेश मेहता पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आदेश के अनुसार कंपनी के धन का उपयोग कथित रूप से निजी खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया गया,जिसके कारण शेयरधारकों की संपत्ति को लगभग 12,726 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचा। यह आरोप सामने आने के बाद निवेशकों के बीच चिंता और बढ़ गई है,क्योंकि मामला सीधे तौर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस और निवेशकों के हितों से जुड़ा हुआ है।
सेबी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जाँच के दौरान कंपनी ने कई बार महत्वपूर्ण लेखा प्रणालियों,वित्तीय रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेजों तक पूर्ण पहुँच उपलब्ध नहीं कराई। नियामक का आरोप है कि इस वजह से जाँचकर्ताओं और फोरेंसिक ऑडिटरों को कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए गए अनेक लेन-देन का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने में कठिनाई हुई। सेबी के अनुसार यह स्थिति जाँच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली रही और कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि करने में बाधा उत्पन्न हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने अंतरिम आदेश के तहत राजेश मेहता पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। नियामक ने उन्हें अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स की प्रतिभूतियों की खरीद,बिक्री अथवा किसी भी प्रकार के लेन-देन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह जाँच एजेंसियों और नियामक अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करे तथा माँगी गई सभी जानकारियाँ और दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए।
इस घटनाक्रम का असर कंपनी के शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों की चिंताओं और बाजार में बनी अनिश्चितता के कारण राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी दबाव देखा गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी का शेयर लगभग पाँच प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.92 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मामले को लेकर स्पष्टता नहीं आती,तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले जाँच प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक होता है। अंतरिम आदेश प्रारंभिक जाँच के आधार पर जारी किए जाते हैं और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। इसलिए आने वाले दिनों में कंपनी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और स्पष्टीकरण इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
फिलहाल निवेशकों और बाजार की निगाहें राजेश एक्सपोर्ट्स की ओर टिकी हुई हैं। एक तरफ सेबी ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं,वहीं दूसरी ओर कंपनी और उसके प्रमुख राजेश मेहता इन आरोपों को गलत बताते हुए विस्तृत जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताह इस पूरे मामले के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। जाँच के निष्कर्ष और कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस विवाद का कंपनी तथा उसके निवेशकों पर आगे क्या प्रभाव पड़ने वाला है।
