रणवीर सिंह पर ‘कांतारा’ टिप्पणी को लेकर ईशनिंदा के आरोप (तस्वीर क्रेडिट@yuvrajpawale7)

‘कांतारा’ मिमिक्री विवाद: रणवीर सिंह की याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी,10 अप्रैल को अगली सुनवाई

नई दिल्ली,25 मार्च (युआईटीवी)- फिल्म ‘कांतारा’ से जुड़े मिमिक्री विवाद में बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की याचिका पर मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में अभिनेता ने उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों और एफआईआर को खारिज करने की माँग की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान सार्वजनिक हस्तियों की जिम्मेदारी को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अपने बयानों और आचरण के प्रभाव को समझना चाहिए।

यह मामला पिछले वर्ष गोवा में आयोजित भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान सामने आया था,जब रणवीर सिंह ने मंच पर फिल्म ‘कांतारा’ में दिखाए गए दैवीय किरदार की मिमिक्री की थी। इस प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगाया गया कि अभिनेता की यह प्रस्तुति धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट में जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आपत्तियाँ दर्ज करने में हुई देरी भी विचारणीय है,लेकिन इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि सार्वजनिक हस्तियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रणवीर सिंह का रवैया उचित नहीं था,हालाँकि यह भी प्रतीत हुआ कि अदालत उनकी ओर से माँगी गई माफी पर विचार करने को तैयार है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि जब कोई सार्वजनिक व्यक्तित्व किसी मंच से कुछ कहता या करता है,तो उसका प्रभाव बहुत व्यापक होता है और इससे समाज के विभिन्न वर्ग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इस पूरे विवाद की जड़ उस घटना में है जब रणवीर सिंह ने ‘कांतारा’ फिल्म में अभिनेता-निर्देशक ऋषभ शेट्टी द्वारा निभाए गए ‘दैव’ के किरदार से प्रेरित एक दृश्य की मिमिक्री की थी। इस दृश्य को लेकर कर्नाटक के कुछ धार्मिक संगठनों और स्थानीय समुदायों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि यह प्रस्तुति भगवान पंजुरली,जो कि क्षेत्रीय आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं,का अपमान है।

विवाद बढ़ने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में रणवीर सिंह के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गईं। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि अभिनेता ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई,बल्कि स्थानीय परंपराओं और आस्थाओं का भी अनादर किया। इसके बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की,जिसे चुनौती देते हुए रणवीर सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले के तूल पकड़ने के बाद रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी भी माँगी थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था और यदि उनकी प्रस्तुति से किसी को दुख पहुँचा है,तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उनकी इस माफी को कुछ लोगों ने स्वीकार किया,जबकि कई संगठनों ने इसे पर्याप्त नहीं माना और कानूनी कार्रवाई की माँग जारी रखी।

कर्नाटक हाई कोर्ट में चल रही यह सुनवाई अब इस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि अदालत किस तरह इस मामले में संतुलन बनाती है। एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा है,वहीं दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है।

अदालत ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है। इस दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि रणवीर सिंह की याचिका पर क्या रुख अपनाया जाएगा और क्या उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाएगा या नहीं।

इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक हस्तियों को अपने बयानों और प्रस्तुतियों के दौरान किस हद तक जिम्मेदारी बरतनी चाहिए। मनोरंजन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय में एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

‘कांतारा’ मिमिक्री विवाद केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं रह गया है,बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता,धार्मिक आस्था और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजरें कर्नाटक हाई कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं,जो इस मामले की दिशा तय करेगा।