ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा फैसला,भारत समेत पाँच देशों को दी सुरक्षित आवाजाही की अनुमति

तेहरान,26 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाते हुए यह घोषणा की है कि वह भारत समेत पाँच मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब क्षेत्र में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं। ईरान के इस कदम को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है,बल्कि कुछ देशों को प्रतिबंधों से छूट दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन देशों के साथ ईरान के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं,उन्हें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवागमन की अनुमति दी गई है।

अराघची के अनुसार,भारत के अलावा रूस,चीन,पाकिस्तान और इराक के जहाजों को भी इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने की छूट दी गई है। उन्होंने कहा, “हमने कुछ ऐसे देशों को गुजरने की अनुमति दी है,जिन्हें हम मित्र मानते हैं। चीन,रूस,भारत,इराक और पाकिस्तान को आने-जाने की अनुमति दी गई है।” यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान अपने कूटनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए समुद्री मार्गों पर नियंत्रण का इस्तेमाल कर रहा है।

दूसरी ओर,ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन देशों को वह शत्रु मानता है या जो वर्तमान संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं,उनके जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अराघची ने संकेत दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका,इजरायल और कुछ खाड़ी देशों से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस फैसले को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में ईरान द्वारा आंशिक नाकाबंदी और चयनात्मक छूट देने का निर्णय वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनका देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। उन्होंने कहा कि दशकों बाद ईरान ने इस क्षेत्र में अपने अधिकार को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है। जब ईरान ने शुरुआत में जलडमरूमध्य की आंशिक नाकाबंदी की घोषणा की थी,तब कई अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों ने इसे केवल एक प्रतीकात्मक कदम बताया था,लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि ईरान अपने फैसलों को लागू करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की रणनीतिक नीति का हिस्सा है,जिसके जरिए वह अपने मित्र देशों को राहत देते हुए विरोधी देशों पर दबाव बनाना चाहता है। इससे न केवल क्षेत्रीय राजनीति पर असर पड़ेगा,बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए यह फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवाजाही की अनुमति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से राहत भरी खबर मानी जा रही है। इससे भारत को तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधानों से बचने में मदद मिलेगी।

हालाँकि,इस फैसले के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान और अन्य प्रमुख देशों के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर लिया गया यह निर्णय न केवल एक सामरिक कदम है,बल्कि यह वैश्विक राजनीति,व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के व्यापक परिदृश्य को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देता है या फिर नए तनावों को जन्म देता है।