नई दिल्ली,23 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने एक ऐसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का अनावरण किया है,जो आने वाले वर्षों में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठा सकता है। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ रखा गया है,जिसे आधुनिक खगोल विज्ञान की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है। यह टेलीस्कोप विशेष रूप से सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों, यानी एक्सोप्लैनेट की खोज करने के साथ-साथ डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसे रहस्यमयी तत्वों को समझने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस टेलीस्कोप के अनावरण के दौरान एजेंसी के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने कहा कि यह मिशन पृथ्वी को ब्रह्मांड का एक नया नक्शा देने में सक्षम होगा। उन्होंने इसे वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे ब्रह्मांड के विस्तार,संरचना और विकास को समझने में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। यह टेलीस्कोप न केवल नए ग्रहों की खोज करेगा,बल्कि उन प्रक्रियाओं को भी समझने में मदद करेगा जिनसे ग्रहों का निर्माण होता है।
करीब 12 मीटर लंबा यह सिल्वर रंग का टेलीस्कोप बड़े सोलर पैनल के साथ तैयार किया गया है। इसे अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना इस साल सितंबर में बनाई गई है,जहाँ इसे एक उन्नत रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के लिए निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स की सेवाएँ ली जाएँगी,जो हाल के वर्षों में अंतरिक्ष अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जानी जाती है।
इस टेलीस्कोप का नाम अमेरिकी खगोलशास्त्री नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है,जिन्हें ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप की माँ’ कहा जाता है। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था और उनके प्रयासों की वजह से आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा मिली। इस टेलीस्कोप के जरिए उनके सपनों को एक नई ऊँचाई मिलने की उम्मीद है।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप की सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल व्यू एरिया है,जो हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक है। इसका मतलब यह है कि यह एक ही समय में आकाश के बड़े हिस्से का अवलोकन कर सकेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार,अपने पूरे मिशन के दौरान यह टेलीस्कोप करीब एक अरब आकाशगंगाओं की रोशनी को मापने में सक्षम होगा,जो ब्रह्मांड के अध्ययन में एक अभूतपूर्व उपलब्धि मानी जाएगी।
इस टेलीस्कोप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह तारों की तेज रोशनी को ब्लॉक करके उनके आसपास मौजूद ग्रहों और ग्रह निर्माण की डिस्क को सीधे देख सके। यह तकनीक खगोल विज्ञान में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है,क्योंकि अब तक वैज्ञानिकों को ऐसे ग्रहों को अप्रत्यक्ष तरीकों से पहचानना पड़ता था। रोमन टेलीस्कोप की मदद से अब इन ग्रहों का अधिक स्पष्ट और सटीक अध्ययन संभव होगा।
इसके अलावा,यह टेलीस्कोप हमारी आकाशगंगा में मौजूद ग्रहों की संख्या और उनके प्रकार के बारे में विस्तृत डेटा तैयार करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में जीवन के अनुकूल परिस्थितियां कितनी सामान्य या दुर्लभ हैं। साथ ही यह डार्क एनर्जी और डार्क मैटर जैसे जटिल विषयों पर भी नई जानकारी जुटाने में मदद करेगा, जो अब तक वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी पहेली बने हुए हैं।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को तैयार करने में एक दशक से अधिक समय लगा है और इसकी लागत 4 अरब डॉलर से ज्यादा बताई जा रही है। इसे पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा, जहाँ यह बिना किसी बाधा के ब्रह्मांड का गहन अध्ययन कर सकेगा। टेलीस्कोप को दूसरे सन-अर्थ लाग्रांज पॉइंट,यानी एल2 पर रखा जाएगा। यह एक ऐसा स्थान है,जहाँ सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल संतुलन में रहते हैं,जिससे किसी भी वस्तु को स्थिर कक्षा में बनाए रखना आसान हो जाता है।
एल2 पर स्थित होने से टेलीस्कोप को तापमान स्थिरता भी मिलेगी,जो इसके उपकरणों के लिए बेहद जरूरी है। इस वजह से यह हबल टेलीस्कोप की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और उच्च गुणवत्ता वाला डेटा प्रदान करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी डेटा क्वालिटी लगभग 10 गुना बेहतर होगी,जिससे ब्रह्मांड के अध्ययन में नई संभावनाएँ खुलेंगी।
इस मिशन से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार,यह टेलीस्कोप हर दिन करीब 11 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजेगा। इतनी बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण वैज्ञानिकों के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर होगा,लेकिन इससे मिलने वाली जानकारी भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा देगी।
‘नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह न केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद करेगा,बल्कि मानवता को यह जानने के और करीब ले जाएगा कि हम इस विशाल ब्रह्मांड में कहाँ खड़े हैं और हमारे जैसे जीवन की संभावनाएँ कितनी व्यापक हैं।
