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टीसीएस पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका,सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका; 220 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ

नई दिल्ली,16 जून (युआईटीवी)- भारत की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को अमेरिका में चल रहे एक लंबे कानूनी विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेड सीक्रेट्स से जुड़े मामले में कंपनी की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है,जिसके बाद टीसीएस को कुल 220 मिलियन डॉलर का वित्तीय प्रभाव झेलना पड़ेगा। कंपनी ने इस संबंध में मंगलवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में फैसले की पुष्टि की।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ ही निचली अदालतों द्वारा दिए गए उस फैसले को बरकरार रखा गया है,जिसमें टीसीएस को 168 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया गया था। यह मामला कई वर्षों से अमेरिकी न्यायालयों में चल रहा था और कंपनी ने अंतिम राहत की उम्मीद में सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार नहीं किए जाने के बाद अब कंपनी के लिए कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो गए हैं।

टीसीएस ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 15 जून 2026 को यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड स्टेट्स कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फिफ्थ सर्किट के फैसले की समीक्षा के लिए दायर उसकी ‘रिट ऑफ सर्टिओरारी’ याचिका को अस्वीकार कर दिया। इसका अर्थ यह है कि अपीलीय अदालत का फैसला यथावत रहेगा और कंपनी को निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अकाउंटिंग मानकों के अनुरूप वह पहले ही इस मामले से संबंधित 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान अपने खातों में कर चुकी है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब उसे नुकसान,ब्याज और कानूनी खर्चों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान करना पड़ेगा। यह राशि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में एक बार होने वाले असाधारण खर्च के रूप में दर्ज की जाएगी।

यह कानूनी विवाद वर्ष 2019 में शुरू हुआ था,जब डलास की एक संघीय अदालत में डीएक्ससी टेक्नोलॉजी की पूर्ववर्ती कंपनी कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन ने टीसीएस के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने एक अन्य बीमा कंपनी ट्रांसअमेरिका के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके माध्यम से प्राप्त गोपनीय कारोबारी जानकारियों का उपयोग कर प्रतिस्पर्धी जीवन बीमा प्लेटफॉर्म विकसित करने की कोशिश की।

वादी पक्ष का दावा था कि यह जानकारी ट्रेड सीक्रेट्स की श्रेणी में आती थी और उसका उपयोग व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए किया गया। दूसरी ओर टीसीएस ने लगातार इन आरोपों का विरोध किया और कहा कि उसने किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी का अवैध उपयोग नहीं किया है। बावजूद इसके,मामला अदालत में आगे बढ़ता रहा और अंततः जूरी ने वादी पक्ष के दावों को स्वीकार कर लिया।

साल 2023 में मामले की सुनवाई कर रही जूरी ने सुझाव दिया था कि टीसीएस को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स के दुरुपयोग के लिए 210 मिलियन डॉलर का भुगतान करना चाहिए। हालाँकि,बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया। इस संशोधित राशि में 56 मिलियन डॉलर वास्तविक हर्जाने के रूप में और 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाने के रूप में शामिल थे।

इसके बाद टीसीएस ने फैसले को चुनौती देते हुए फिफ्थ यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स का रुख किया। कंपनी को उम्मीद थी कि अपीलीय अदालत उसके पक्ष में निर्णय दे सकती है, लेकिन वर्ष 2025 में अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद टीसीएस ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की समीक्षा की माँग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में कंपनी का मुख्य तर्क यह था कि डीएक्ससी टेक्नोलॉजी वास्तविक आर्थिक नुकसान को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर पाई है और इसलिए उसे ‘अनुचित लाभ’ के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। टीसीएस ने यह भी कहा था कि दंडात्मक हर्जाने की राशि अत्यधिक है और इसे कम किया जाना चाहिए। हालाँकि,सर्वोच्च अदालत ने इन दलीलों पर सुनवाई के लिए मामला स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।

इस फैसले का असर केवल कानूनी मोर्चे तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका वित्तीय प्रभाव भी कंपनी के आगामी तिमाही परिणामों में दिखाई देगा। 220 मिलियन डॉलर की कुल देनदारी भारतीय मुद्रा में हजारों करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। हालाँकि,टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी के लिए यह राशि उसके समग्र कारोबार की तुलना में सीमित मानी जा सकती है,फिर भी यह एक महत्वपूर्ण असाधारण व्यय के रूप में दर्ज होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वैश्विक आईटी उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच प्रतिभा अधिग्रहण,बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापारिक गोपनीयता की सुरक्षा को लेकर अदालतें लगातार सख्त रुख अपना रही हैं। ऐसे में कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रतिस्पर्धी कारोबार से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

टीसीएस लंबे समय से दुनिया की अग्रणी आईटी सेवा कंपनियों में शामिल रही है और उसका कारोबार दर्जनों देशों में फैला हुआ है। कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और वैश्विक ग्राहक आधार को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानूनी झटका उसके दीर्घकालिक विकास को प्रभावित नहीं करेगा। हालाँकि,निवेशक और बाजार विश्लेषक आने वाले समय में इस फैसले के वित्तीय प्रभाव और कंपनी की रणनीतिक प्रतिक्रिया पर करीबी नजर बनाए रखेंगे।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ यह बहुचर्चित कानूनी लड़ाई लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गई है। अब टीसीएस को अदालत द्वारा निर्धारित वित्तीय दायित्वों का पालन करना होगा और इस मामले से जुड़े प्रभावों को अपने वित्तीय खातों में दर्ज करना होगा। यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय कॉरपोरेट जगत में ट्रेड सीक्रेट्स और बौद्धिक संपदा अधिकारों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करता है।