विजय (तस्वीर क्रेडिट@KraantiKumar)

अभिनेता विजय के खिलाफ आयकर अनियमितताओं को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में याचिका,एफआईआर दर्ज करने की माँग

चेन्नई,7 मई (युआईटीवी)- दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के लोकप्रिय अभिनेता और तमिलगा वेट्ट्रि कझगम के प्रमुख विजय एक बार फिर कानूनी विवादों के कारण चर्चा में आ गए हैं। मद्रास हाई कोर्ट में उनके खिलाफ कथित आयकर अनियमितताओं को लेकर एक रिट याचिका दायर की गई है,जिसमें अभिनेता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई है। यह मामला वर्ष 2015 में रिलीज हुई फिल्म पुलि से जुड़ा बताया जा रहा है।

मद्रास हाई कोर्ट की रजिस्ट्री ने बुधवार को इस याचिका को नंबर दे दिया है। अब संभावना जताई जा रही है कि इसे जल्द ही अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। फिलहाल अदालत पहले इस याचिका की “मेंटेनेबिलिटी” यानी स्वीकार्यता के मुद्दे पर विचार करेगी। यदि अदालत इसे सुनवाई योग्य मानती है,तो आगे मामले की विस्तृत सुनवाई हो सकती है।

जानकारी के अनुसार यह याचिका पहले पिछले महीने दायर की गई थी,लेकिन शुरुआत में हाई कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे नंबर देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। आठ अप्रैल को खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका को “मेंटेनेबिलिटी” के अधीन नंबर प्रदान किया जाए। अदालत के निर्देश के बाद अब यह मामला औपचारिक रूप से पंजीकृत हो गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म “पुलि” की रिलीज के बाद आयकर विभाग ने 30 सितंबर 2015 को विजय से जुड़े परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज बरामद हुए थे,जिनमें बेहिसाब नकद लेनदेन का संकेत मिला था। याचिका के अनुसार जाँच में यह सामने आया कि फिल्म के निर्माता पी.टी. सेल्वकुमार और शिबू द्वारा अभिनेता विजय को बड़ी राशि का भुगतान किया गया था।

दस्तावेजों के हवाले से याचिका में कहा गया है कि विजय को लगभग 16 करोड़ रुपये चेक के माध्यम से दिए गए थे,जबकि करीब 4.93 करोड़ रुपये नकद भुगतान के रूप में दिए गए थे। आरोप है कि स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस केवल चेक से दिए गए भुगतान पर ही जमा किया गया,जबकि नकद भुगतान पर ऐसा नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह आयकर नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है और इसकी आपराधिक जांच होनी चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि आयकर विभाग की जाँच के दौरान विजय से पूछताछ की गई थी। कथित तौर पर पूछताछ में उन्होंने लगभग पाँच करोड़ रुपये नकद प्राप्त करने की बात स्वीकार की थी और उस राशि पर कर चुकाने के लिए सहमति भी जताई थी। इसके अलावा उन्होंने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का स्वेच्छा से खुलासा किया था।

मामले में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में 29 जुलाई 2016 को विजय ने आकलन वर्ष 2016-17 के लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल किया था। इसमें उन्होंने कुल 35.42 करोड़ रुपये की आय घोषित की थी। इस रिटर्न में कथित अतिरिक्त आय को भी शामिल किया गया था। याचिका में कहा गया है कि अभिनेता ने इसके अलावा 17.81 लाख रुपये के मूल्यह्रास और लगभग 64.71 लाख रुपये के फैंस क्लब खर्च पर भी कर छूट का दावा किया था।

याचिकाकर्ता ने अदालत से माँग की है कि आयकर जाँच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजय के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। साथ ही संबंधित एजेंसियों को एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जाँच का निर्देश दिया जाए। याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के पर्याप्त संकेत मौजूद हैं,तो कानून के तहत निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।

हालाँकि,इस मामले में अभिनेता विजय या उनकी कानूनी टीम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक और फिल्मी हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है क्योंकि विजय अब केवल अभिनेता ही नहीं,बल्कि सक्रिय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेट्ट्रि कझगम के जरिए तमिलनाडु की राजनीति में कदम रखा है और उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है,खासकर तब जब तमिलनाडु की राजनीति में विजय की सक्रियता बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला पुराना है और आयकर से जुड़े कई मुद्दों का समाधान पहले ही हो चुका है। समर्थकों का यह भी तर्क है कि किसी व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त आय घोषित कर कर भुगतान करना कानूनन प्रक्रिया का हिस्सा है।

फिलहाल सबकी नजर मद्रास हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। यदि अदालत इसे स्वीकार करती है,तो मामले की कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम सुनवाई हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर फिल्मी दुनिया,राजनीति और वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच संबंधों को लेकर बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर मामलों में अदालतें आमतौर पर उपलब्ध दस्तावेजों,विभागीय जाँच और कर भुगतान की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला करती हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में अभिनेता विजय के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है।