पेरिस,7 मई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर जारी अस्थिरता के बीच फ्रांस ने होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में बड़ी पहल की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत के बाद सभी पक्षों से होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को तुरंत और बिना किसी शर्त के समाप्त करने का आह्वान किया है। मैक्रों ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल होना बेहद जरूरी है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक बुनियादी ढाँचे और कई जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा भी की। मैक्रों ने कहा कि हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाना होगा।
मैक्रों ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी मौजूदा स्थिति वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बिना देरी और बिना किसी शर्त के सामान्य आवाजाही बहाल की जानी चाहिए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के अनुसार संघर्ष से पहले जिस तरह नौवहन की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित थी,उसी व्यवस्था को दोबारा स्थापित करना अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।
फ्रांस ने इस दिशा में एक बहुराष्ट्रीय समुद्री मिशन का भी प्रस्ताव रखा है। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा तैयार किया गया यह मिशन जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों के बीच भरोसा बहाल करने में मदद कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मिशन युद्ध में शामिल पक्षों से अलग और स्वतंत्र रहेगा,ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस का विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल इस मिशन के लिए आगे तैनात किया जा सकता है।
मैक्रों ने कहा कि हाल की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मिशन की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उनका मानना है कि समुद्री सुरक्षा को लेकर बहुपक्षीय सहयोग ही इस संकट से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है और वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी चर्चा करेंगे।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में शांति बहाल होने से परमाणु कार्यक्रम,बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चल रही वार्ताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने संकेत दिया कि यूरोपीय देश प्रतिबंधों में राहत देने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं,यदि कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति होती है।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरें तेज हो गई हैं। अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार दोनों देश युद्ध समाप्त करने के लिए एक बड़े समझौते के करीब पहुँच चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान परमाणु संवर्धन पर रोक लगाने के लिए तैयार हो सकता है,जबकि अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो सकता है। साथ ही दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही पर लगी पाबंदियों को समाप्त करने पर भी विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है,तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिल सकती है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे तेल की कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।
गौरतलब है कि ईरान,अमेरिका और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद करीब 40 दिनों तक संघर्ष चलता रहा। इसके बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की गई थी। हालाँकि,युद्धविराम के बावजूद तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बना रहा।
युद्धविराम के बाद ईरान और अमेरिका ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में शांति वार्ता का एक दौर आयोजित किया था। उस वार्ता से कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका,लेकिन दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और अब नए प्रस्ताव पर ईरान विचार कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में फ्रांस की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूरोप लंबे समय से पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मैक्रों की पहल को कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका,ईरान और यूरोपीय देशों के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हुई हैं। यदि होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य स्थिति बहाल होती है और प्रतिबंधों में ढील को लेकर सहमति बनती है,तो यह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ी सफलता साबित हो सकती है। वहीं अगर बातचीत विफल होती है, तो क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
