नई दिल्ली,7 मई (युआईटीवी)- भारत और वियतनाम ने अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद सामने आया। भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए वियतनामी राष्ट्रपति और भारतीय नेतृत्व के बीच हुई चर्चा के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने व्यापार,निवेश, तकनीक,ऊर्जा और डिजिटल सहयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और वियतनाम एशिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और दोनों देशों के पास आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार और उद्योग स्तर पर सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी है,ताकि दोतरफा व्यापार,निवेश और तकनीकी साझेदारी को और गति मिल सके।
दोनों देशों ने बाजार तक पहुँच को आसान बनाने पर भी विशेष जोर दिया। इसके तहत भारत के कृषि उत्पादों जैसे अंगूर और अनार के लिए वियतनाम के बाजार में अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई,वहीं वियतनाम के ड्यूरियन और पोमेलो जैसे फलों के लिए भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। इस कदम को दोनों देशों के कृषि और खाद्य व्यापार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वियतनाम ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के लिए भारत से अधिक आयात बढ़ाना चाहता है। वियतनाम की यह रणनीति वैश्विक व्यापार परिस्थितियों और बदलते आर्थिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों ने कंपनियों के लिए कारोबार को सरल बनाने,नियमों को अधिक अनुकूल बनाने और अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को आसान बनाने पर भी चर्चा की।
वार्ता के दौरान नेताओं ने आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते यानी एआईटीआईजीए की समीक्षा को जल्द पूरा करने पर जोर दिया। दोनों पक्षों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के अनुरूप इस समझौते को और अधिक प्रभावी तथा लाभकारी बनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह समीक्षा समय पर पूरी होती है,तो भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।
भारत और वियतनाम ने उच्च तकनीक और आधुनिक उद्योगों में निवेश को लेकर भी व्यापक सहमति जताई। दोनों देशों ने परिवहन,विनिर्माण,लॉजिस्टिक्स,नवीकरणीय ऊर्जा,स्मार्ट कृषि,इलेक्ट्रिक वाहन,सूचना प्रौद्योगिकी,स्वास्थ्य सेवाएँ,एग्रो-प्रोसेसिंग,जलीय कृषि, पर्यटन और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग और निवेश बढ़ाने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के उद्योग जगत को नई संभावनाएँ मिलेंगी और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में भी भारत और वियतनाम ने सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया। दोनों देशों ने अपने-अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच बेहतर तालमेल और इनोवेशन केंद्रों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल और स्टार्टअप इकोसिस्टम वियतनाम के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है,जबकि वियतनाम की विनिर्माण क्षमता भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। भारत और वियतनाम ने तेल और गैस खोज के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत नए कुओं के विकास में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई,जो वियतनाम के कानूनों और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह सहयोग रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और ई-कॉमर्स को भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार मानते हुए दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई। खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के लिए नीतिगत सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहयोग से छोटे व्यवसायों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।
संयुक्त बयान में डिजिटल तकनीकों के महत्व को भी रेखांकित किया गया। दोनों नेताओं ने भारतीय रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के बीच डिजिटल भुगतान और वित्तीय नवाचार से जुड़े समझौते का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने क्यूआर कोड आधारित भुगतान प्रणालियों को जोड़ने पर सहमति जताई,जिससे पर्यटन,व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत और वियतनाम ने भविष्य की तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए। दोनों देशों ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर,6जी तकनीक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,अंतरिक्ष विज्ञान,परमाणु तकनीक,समुद्री विज्ञान,बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ तत्वों के क्षेत्र में सहयोग को भी नई प्राथमिकता दी गई है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा और आपदा-प्रतिरोधी तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। भारत और वियतनाम दोनों ही जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों में शामिल हैं,इसलिए स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीकों में साझेदारी को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा वियतनाम में आसियान-भारत ट्रैकिंग,डेटा रिसेप्शन स्टेशन और डेटा प्रोसेसिंग सुविधा की स्थापना में हो रही प्रगति का भी स्वागत किया गया। नेताओं ने इस परियोजना को जल्द पूरा करने पर जोर दिया।
संयुक्त बयान में दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ क्षेत्र में सहयोग को भी अहम बताया गया। भारत की आईआरईएल इंडिया लिमिटेड और वियतनाम के रेडियोधर्मी एवं दुर्लभ तत्व प्रौद्योगिकी संस्थान वीआईएनएटीओएम के बीच हुए समझौते का दोनों देशों ने स्वागत किया। इस समझौते को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में दोनों देशों की भूमिका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक नहीं,बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच दोनों देशों की साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए अहम भूमिका निभा सकती है। आने वाले वर्षों में यह संबंध एशिया की नई आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों में एक मजबूत उदाहरण के रूप में उभर सकता है।
