हंता वायरस के खतरे के बीच एमवी होंडियस के यात्रियों की वापसी (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

हंता वायरस के खतरे के बीच एमवी होंडियस के यात्रियों की वापसी,नीदरलैंड पहुँचीं अंतिम निकासी उड़ानें

आइंडहोवन,12 मई (युआईटीवी)- हंता वायरस संक्रमण की आशंका के बीच एमवी होंडियस जहाज से जुड़े यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने का अभियान अब लगभग पूरा हो चुका है। मंगलवार को इस अभियान की अंतिम दो निकासी उड़ानें नीदरलैंड के आइंडहोवन एयर बेस पर उतरीं। इन उड़ानों के पहुँचने के साथ ही स्वास्थ्य एजेंसियों और प्रशासन ने राहत की सांस ली,हालाँकि अब भी यात्रियों और चालक दल की गहन चिकित्सीय जाँच जारी रहेगी। पूरे घटनाक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि हंता वायरस को गंभीर और कई बार जानलेवा संक्रमण माना जाता है।

डच विदेश मंत्रालय के अनुसार,पहली निकासी उड़ान ऑस्ट्रेलिया की ओर से संचालित की गई थी। इस विमान में छह यात्री सवार थे। इसके कुछ ही समय बाद दूसरी उड़ान भी आइंडहोवन एयर बेस पहुँची,जिसका संचालन डच सरकार की ओर से किया गया था। इस विमान में कुल 22 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इनमें एक डच नागरिक शामिल था,जबकि बाकी 21 लोग अलग-अलग देशों के नागरिक बताए गए हैं।

स्थानीय समयानुसार पहला विमान देर रात लगभग 12 बजकर 30 मिनट पर एयर बेस पर उतरा। इसके करीब 15 मिनट बाद दूसरी उड़ान भी वहाँ पहुँच गई। दोनों विमानों के पहुँचते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को तत्काल चिकित्सा निगरानी में ले लिया। सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है,ताकि संक्रमण फैलने की किसी भी संभावना को रोका जा सके।

नीदरलैंड के राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संस्थान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की गहन चिकित्सा जाँच की जाएगी। इसके तहत हवाई अड्डे पर ही सभी के नमूने लिए गए हैं,जिन्हें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार के संक्रमण की शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है,क्योंकि हंता वायरस तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,डच प्रशासन ने यात्रियों और चालक दल के लिए विशेष क्वारंटीन व्यवस्था भी की है। विदेशी नागरिकों और चालक दल के सदस्यों को फिलहाल क्वारंटीन होटलों में रखा जाएगा। नियमों के अनुसार,जाँच पूरी होने तक उन्हें अपने घर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है,ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

इस बीच एमवी होंडियस जहाज के डच संचालक ‘ओशनवाइड एक्सपीडिशन्स’ ने सोमवार को बयान जारी कर बताया कि जहाज स्पेन के टेनेरिफ द्वीप से रवाना हो चुका है और अब नीदरलैंड के रॉटरडैम बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार जहाज को यह यात्रा पूरी करने में लगभग छह दिन का समय लगेगा और इसके रविवार तक रॉटरडैम पहुँचने की संभावना है। जहाज के पहुँचने के बाद वहाँ भी व्यापक जाँच और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

पूरे मामले के बाद हंता वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,हंता वायरस एक जूनोटिक वायरस है,जो मुख्य रूप से कृन्तकों यानी चूहों और उनसे मिलते-जुलते जीवों में पाया जाता है। यह वायरस प्राकृतिक रूप से इन जीवों को संक्रमित करता है और कुछ परिस्थितियों में इंसानों तक भी पहुँच सकता है। इंसानों में संक्रमण होने पर यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और कई मामलों में मौत भी हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक हंता वायरस का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग प्रकार से देखने को मिलता है। अमेरिका महाद्वीप में यह वायरस हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है। यह बीमारी फेफड़ों और हृदय को तेजी से प्रभावित करती है। संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है और स्थिति अचानक बिगड़ सकती है।

वहीं यूरोप और एशिया में हंता वायरस मुख्य रूप से हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम नामक बीमारी का कारण बनता है। यह बीमारी गुर्दों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है। मरीजों में तेज बुखार,रक्तस्राव,गुर्दों की समस्या और कमजोरी जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी की गंभीरता वायरस के प्रकार और संक्रमित व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है।

हालाँकि,अब तक हंता वायरस के लिए कोई विशेष दवा या उपचार उपलब्ध नहीं है,लेकिन शुरुआती पहचान और सहायक चिकित्सा देखभाल मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉक्टरों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति की श्वसन प्रणाली,हृदय और गुर्दों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है। गंभीर मामलों में मरीज को आईसीयू में भी भर्ती करना पड़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित कृन्तकों के मूत्र,मल या लार के संपर्क में आने से फैलता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे दूषित वातावरण में सांस लेता है या संक्रमित सतहों के संपर्क में आता है,तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में कृन्तकों के काटने से भी वायरस फैल सकता है, हालाँकि,ऐसा बहुत कम देखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव ही इस वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। लोगों को ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है,जहाँ चूहों या अन्य कृन्तकों की मौजूदगी अधिक हो। घरों और सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई बनाए रखना भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।

एमवी होंडियस से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाया है कि संक्रामक बीमारियों का खतरा आज भी गंभीर बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और समुद्री परिवहन के दौर में किसी भी संक्रमण को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं और यात्रियों की निगरानी लगातार जारी है,ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।