नई दिल्ली,16 मई (युआईटीवी)- नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला की जाँच में अब बड़ा मोड़ आ गया है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने इस मामले के कथित मास्टरमाइंड के रूप में केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। जाँच एजेंसी का दावा है कि कुलकर्णी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे और उन्हें प्रश्नपत्रों तक विशेष पहुँच हासिल थी। सीबीआई का कहना है कि इसी पहुँच का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने छात्रों तक परीक्षा से पहले सवाल पहुँचाने का काम किया।
नीट यूजी परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने छात्रों और अभिभावकों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब तक इस मामले में कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जाँच लगातार आगे बढ़ रही है।
सीबीआई के अनुसार,पीवी कुलकर्णी लंबे समय से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था से जुड़े हुए थे। जाँच में यह सामने आया है कि उन्होंने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर छात्रों का चयन किया और उन्हें कथित तौर पर असली प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल उपलब्ध कराए। इस मामले में पहले गिरफ्तार की गई आरोपी मनीषा वाघमारे की भूमिका भी जाँच एजेंसी के अनुसार काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मनीषा को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था।
जाँच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुलकर्णी ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित अपने घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए थे। इन सत्रों के दौरान वह कथित तौर पर सवाल,उनके विकल्प और सही उत्तर छात्रों को डिक्टेट करते थे। छात्र उन सवालों को अपनी नोटबुक में लिखते थे। सीबीआई का दावा है कि छात्रों द्वारा लिखे गए कई सवाल हूबहू 3 मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं।
यह खुलासा जाँच एजेंसियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र की सामग्री कुछ लोगों तक पहुँच चुकी थी। जाँच अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और प्रश्नपत्र तक पहुँच कैसे बनाई गई।
पीवी कुलकर्णी मूल रूप से लातूर जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। फिलहाल उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पुणे ले जाया गया और वहाँ से आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है। जाँच एजेंसी को उम्मीद है कि कुलकर्णी से पूछताछ के दौरान इस पूरे रैकेट से जुड़े कई और अहम नाम सामने आ सकते हैं।
सीबीआई ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई शहरों से गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं। जयपुर,गुरुग्राम,नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से सात लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से पाँच आरोपियों को पहले ही सात दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा जा चुका है। बाकी आरोपियों को भी ट्रांजिट रिमांड के बाद दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी।
पिछले 24 घंटों के दौरान जांच एजेंसी ने देश के कई हिस्सों में छापेमारी अभियान भी चलाया। इस दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण,मोबाइल फोन,लैपटॉप और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। अब इन सभी की फॉरेंसिक और तकनीकी जाँच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक डेटा से इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई,जब लातूर में कुछ अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि एक कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट में पूछे गए 42 सवाल नीट यूजी परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते थे। शुरुआत में इस मामले की जाँच स्थानीय पुलिस ने की,लेकिन जैसे-जैसे मामले की गंभीरता बढ़ती गई,जाँच केंद्रीय एजेंसियों तक पहुँच गई और बाद में सीबीआई ने जाँच अपने हाथ में ले ली।
जाँच एजेंसियों का कहना है कि यह केवल एक स्थानीय स्तर का मामला नहीं लगता,बल्कि इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। यही वजह है कि सीबीआई अब पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। एजेंसी यह भी जाँच कर रही है कि कहीं परीक्षा प्रणाली के भीतर मौजूद कुछ लोगों की मिलीभगत से यह पूरा रैकेट तो नहीं चलाया जा रहा था।
इस मामले ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करके मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएँ परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले की निष्पक्ष और तेज जाँच की माँग की है,ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जरूरत है। डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों की निगरानी को और मजबूत बनाने की माँग भी उठने लगी है।
फिलहाल सीबीआई की जाँच लगातार जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जाँच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि कितने छात्रों तक कथित तौर पर प्रश्नपत्र पहुँचाया गया और इसके बदले कितनी रकम ली गई। पूरे देश की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल जाँच पर टिकी हुई है।
