तेहरान,16 मई (युआईटीवी)- ईरान से जुड़ी एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ईरानी मीडिया और कुछ अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरानी संसद में एक ऐसा प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है,जिसमें डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने वाले व्यक्ति या संगठन को 50 मिलियन यूरो का इनाम देने की बात कही गई है। इस खबर के सामने आने के बाद वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार,यह प्रस्ताव कथित तौर पर ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति से जुड़ा हुआ है। बताया गया है कि समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने “काउंटर-एक्शन” नामक एक योजना के मसौदे का उल्लेख किया है। इस मसौदे में अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। हालाँकि,इस प्रस्ताव को लेकर ईरान की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है,लेकिन रिपोर्टों ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रस्ताव के तहत डोनाल्ड ट्रंप,बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के प्रमुख को निशाना बनाने की बात कही गई है। कथित तौर पर इन नेताओं पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ साजिशों और सुरक्षा खतरों में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक,अजीजी ने कहा कि यह “जवाबी कार्रवाई” का हिस्सा है और इसे ईरान का अधिकार बताया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस मिशन को अंजाम देता है,तो सरकार उसे 50 मिलियन यूरो का इनाम देने के लिए बाध्य होगी। इन बयानों ने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलकों में चिंता पैदा कर दी है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार समर्थक माने जाने वाले अली अकबर राएफीपुर के मीडिया प्लेटफॉर्म “मसाफ” ने पहले दावा किया था कि “किल ट्रंप” नामक अभियान के लिए 50 मिलियन डॉलर की वित्तीय व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है,लेकिन सोशल मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में इसको लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
इसके अलावा एक कथित हैकिंग समूह “हंडाला” का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि इस समूह ने बयान जारी कर दावा किया कि ट्रंप और नेतन्याहू को निशाना बनाने के लिए 50 मिलियन डॉलर उपलब्ध कराए गए हैं। समूह ने यह भी दावा किया कि रकम किसी भी ऐसे व्यक्ति या संगठन को दी जाएगी,जो वास्तविक कार्रवाई करेगा। कथित बयान में यह भी कहा गया कि संचार और वित्तीय लेनदेन के लिए एन्क्रिप्शन और गुप्त तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन रिपोर्टों ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने का काम किया है। दोनों देशों के संबंध पिछले कई वर्षों से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम,पश्चिम एशिया में प्रभाव,आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरें क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं। खासकर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व पहले ही कई सुरक्षा संकटों से जूझ रहा है। अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं,जबकि ईरान अमेरिका और इजरायल की नीतियों को अपने खिलाफ मानता है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मार्च की शुरुआत में ईरान में मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं को बड़े पैमाने पर टेक्स्ट संदेश भेजे गए थे,जिनमें ट्रंप की हत्या के लिए इनाम से जुड़े कथित अंतर्राष्ट्रीय अभियान का प्रचार किया गया था। कुछ मीडिया संस्थानों के साथ साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स में ऐसे संदेशों का जिक्र किया गया है। हालाँकि,इन संदेशों की सत्यता और स्रोत को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह के प्रस्ताव वास्तव में संसद या किसी आधिकारिक मंच पर लाए जाते हैं,तो इसका असर वैश्विक कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। अमेरिका इस तरह के किसी भी बयान या प्रस्ताव को गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देख सकता है।
अब तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से इन रिपोर्टों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं इजरायल भी इस तरह की रिपोर्टों को लेकर सतर्क माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक शक्ति संघर्ष के बीच इस तरह की खबरें केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहतीं,बल्कि इनके दूरगामी कूटनीतिक और सुरक्षा प्रभाव भी हो सकते हैं। खासकर जब इसमें विश्व के बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों के नाम सामने आए हों।
फिलहाल यह मामला अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। दुनिया भर की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ईरान की संसद या सरकार की ओर से इस कथित प्रस्ताव को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और अमेरिका सहित अन्य देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
