ट्रंप और शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा,शी जिनपिंग ने दिया भरोसा- चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा

वाशिंगटन,20 मई (युआईटीवी)- डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि बीजिंग ईरान को किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति नहीं कर रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाए हुए है और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशों को तेज कर रहा है। ट्रंप के बयान को वैश्विक राजनीति और अमेरिका-चीन संबंधों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

व्हाइट हाउस में बन रहे नए बॉलरूम के निर्माण स्थल का दौरा करते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे सीधे तौर पर यह वादा किया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी ने मुझसे कहा है कि चीन ईरान को कोई हथियार सप्लाई नहीं कर रहा। यह बहुत अच्छा वादा है और मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूँ।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दौरान यह भी कहा कि हाल के महीनों में उनके और शी जिनपिंग के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई है और उन्होंने चीन यात्रा के दौरान अच्छा समय बिताया। उन्होंने कहा, “हमने चीन में बहुत अच्छा समय बिताया। राष्ट्रपति शी और मैंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और हमारी बातचीत काफी सकारात्मक रही।”

ट्रंप ने अपनी बातचीत में मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति,ईरान की सैन्य गतिविधियों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का भी जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल ईरान का समुद्री रास्ता नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है,जिसका इस्तेमाल पूरी दुनिया के व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए होता है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से इन समुद्री मार्गों का इस्तेमाल दबाव बनाने के साधन के रूप में करता रहा है।

उन्होंने कहा, “ईरान ने 47 वर्षों तक समुद्री रास्तों को सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल किया है,लेकिन यह सिर्फ ईरान का रास्ता नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग है।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब पश्चिमी देशों को आशंका है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन भी इस क्षेत्र में शांति चाहता है,क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आने वाले तेल पर निर्भर करता है। ट्रंप के अनुसार,चीन समझता है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष बढ़ा,तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीजिंग स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है और यही कारण है कि उसने ईरान को हथियार न भेजने का भरोसा दिया है।

ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को हाल के वर्षों में काफी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी आकलन के मुताबिक ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइल क्षमता खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना भी लगभग पूरी तरह कमजोर हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे अनुमान के अनुसार ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं। उसकी नौसेना और वायुसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।” हालाँकि,ट्रंप ने यह भी माना कि ईरान के पास अब भी कुछ जवाबी क्षमता मौजूद है,लेकिन उसकी नई सैन्य ताकत विकसित करने की क्षमता काफी कमजोर पड़ चुकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के कई निर्माण केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है,जिससे उसकी सैन्य उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है। ट्रंप के मुताबिक, “हमने उनके अधिकांश निर्माण केंद्रों को निशाना बनाया है,इसलिए उनकी नई सैन्य क्षमता तैयार करने की ताकत बहुत कम बची है।”

ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई के काफी करीब पहुँच गया था,लेकिन मध्य पूर्व के सहयोगी देशों ने कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ और समय देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब,कतर,संयुक्त अरब अमीरात,बहरीन और कुवैत जैसे देश लगातार अमेरिका के साथ संपर्क में हैं और ईरान से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा, “हम सब मिलकर बातचीत कर रहे हैं। इजरायल भी इस मामले में एक अच्छा सहयोगी रहा है।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार पहुँच गया,तो सबसे बड़ा खतरा इजरायल और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को होगा।

उन्होंने कहा, “अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया,तो सबसे पहले खतरा इजरायल को होगा। इससे परमाणु तबाही जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।” ट्रंप ने इस मुद्दे को वैश्विक तेल बाजार से भी जोड़ा और कहा कि यदि मध्य पूर्व में लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा,तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है,जिसमें वह एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है और दूसरी तरफ चीन जैसी बड़ी शक्तियों के साथ संवाद के रास्ते खुले रखना चाहता है। अमेरिका यह समझता है कि ईरान पर प्रभाव डालने में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है,क्योंकि चीन ईरान का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार माना जाता है।

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरानी तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है। चीन ने हमेशा ईरान पर लगाए गए एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध किया है और परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की वकालत की है। बीजिंग का मानना है कि प्रतिबंधों और सैन्य दबाव की बजाय कूटनीति और संवाद से स्थायी समाधान संभव है।

अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों और मध्य पूर्व की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। यदि चीन वास्तव में ईरान को सैन्य सहायता सीमित रखता है,तो इससे क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालाँकि,ईरान की ओर से अभी तक ट्रंप के इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं चीन ने भी सार्वजनिक रूप से इस बातचीत की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद ट्रंप के बयान ने वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव,परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताओं और वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर के बीच ट्रंप का यह बयान आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का अहम विषय बना रह सकता है। अमेरिका,चीन और ईरान के बीच बदलते समीकरण अब केवल क्षेत्रीय नहीं,बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करने वाले माने जा रहे हैं।